डायबिटीज़ में पुरुषों की तुलना में स्‍ट्रोक की वजह से ज्‍यादा मरती हैं महिलाएं

Picture credit : express.co.uk

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एक नई स्‍टडी में सामने आया है कि डायबिटीज़ की वजह से महिलाओं में स्‍ट्रोक का खतरा पुरुषों के मुकाबले ज्‍यादा होता है।

अमूमन 55 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में ह्रदय रोगों का खतरा पाया गया। इस रिसर्च में पता चला कि डायबिटीज़ से ग्रस्‍त महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले स्‍ट्रोक का खतरा ज्‍यादा रहता है।

महिलाओं में मेनोपॉज़ के कारण सुरक्षात्‍मक एस्‍ट्रोजन की कमी होने लगती है जिससे डायबिटीज़ के मरीज़ों में कार्डियोवस्‍कुलर रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इस स्‍टडी के अनुसार विकसित देशों में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं स्‍ट्रोक की वजह से ज्‍यादा मर रही हैं। साल 2010 में 60 प्रतिशत महिलाओं की मृत्‍यु का कारण स्‍ट्रोक था।

इस स्‍टडी में शोधकर्ताओं ने 11,000 पुरुषों और 19,000 से ज्‍यादा महिलाओं पर रिसर्च की। सात साल तक इन प्रतिभागियों पर नज़र रखी गई और इनमें से लगभग 3000 लोग स्‍ट्रोक से ग्रस्‍त पाए गए।

इनके ब्‍लड शुगर कंट्रोल के आधार पर डायबिटीज़ से ग्रस्‍त ना होने वाली महिलाओं में भी 19 से 42 प्रतिशत से ज्‍यादा खतरा पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जवान महिलाओं की तुलना में 55 साल और इससे अधिक उम्र की महिलाओं डायबिटीक महिलाओं में स्‍ट्रोक का खतरा ज्‍यादा रहता है।

स्‍टडी के मुताबिक पुरुषों में स्‍ट्रोक और मधुमेह के बीच कोई खतरा नहीं पाया गया। इस स्‍टडी में खुलासा हुआ है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डायबिटीज़ की बीमारी में स्‍ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।

Picture credit : diabetesbienestarysalud.com

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डायबिटीज़ से ग्रस्‍त पुरुषों में क्‍यों नहीं है खतरा

अपनी आंतों को सुरक्षित रखने के लिए पुरुष अधिक देखभाल और दवाओं का प्रयोग करते हैं। पुरुष एस्पिरिन और स्‍टैटिन जैसी दवाओं का सेवन करते हैं जबकि महिलाएं ऐसा नहीं करती हैं। ये भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में स्‍ट्रोक के खतरे का बड़ा कारण है।

इसके अलावा डायबिटीज़ से ग्रस्‍त महिलाओं में हाई कोलेस्‍ट्रॉल लेवल या हाई ब्‍लड प्रेशर का खतरा पुरुष मधुमेह रोगियों की तुलना में ज्‍यादा रहता है।

क्‍या है बचाव

स्‍ट्रोक से बचने का सबसे बेहतर तरीका है बचाव। बढ़ते शुगर और स्‍ट्रोक के बीच संबंध होता है और अगर शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल ना किया गया तो स्‍ट्रोक के साथ-साथ कई अन्‍य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। हालांकि, जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इस खतरे को टाला जा सकता है।

महिलाओं और पुरुषों में अलग है डायबिटीज़

पुरुषों में बीमारी की शुरुआत में लक्षण ज्‍यादा गंभीर नहीं होते हैं लेकिन बाद में ये भयंकर हो सकते हैं। शुरुआती लक्षणों में बार-बार भूख और प्‍यास लगना, अचानक से वजन कम होना, बार-बार मूत्र लगना और चक्‍कर आना शामिल है। पुरुषों में मधुमेह की वजह से यौन समस्‍या जैसे इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन की दिक्‍कत भी आती है।

Picture credit : cdn.diabetesselfmanagement.com

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महिलाओं में मधुमेह की बीमारी धीरे से बढ़ती है और इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते हैं। जो महिलाएं अस्‍वस्‍थ जीवनशैली जीती हैं उनमें मधुमेह का खतरा ज्‍यादा रहता है। डायबिटीज़ के बढ़ने पर ह्रदय रोग, किडनी रोग और स्‍ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं अधिक उम्र की महिलाओं में कोरोनरी ह्रदय रोग, हाइपरग्‍लाइसेमिया और हाइपोग्‍लाइसेमिया और आंखों से संबंधित रोग का खतरा भी बना रहता है। इसकी वजह से महिलाओं का गर्भपात या शिशु में कोई विकार भी हो सकता है।

लेस्बियन महिलाओं में डायबिटीज़ का खतरा

एक स्‍टडी में ये बात सामने आई है कि जो महिलाएं लेस्बियन हैं या बाईसेक्‍शुअल हैं उनमें हिट्रोसेक्‍शुअल महिलाओं की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा होता है। इस स्‍टडी के परिणाम मई, 2018 में ही डायबिटीज़ केयर में प्रकाशित हुए हैं।

ऐसी महिलाओं में समाज के कारण तनाव का स्‍तर बहुत ज्‍यादा होता है और यही टाइप 2 डायबिटीज़ होने का मुख्‍य कारण है। ऐसी महिलाओं में सामान्‍य तनाव की जगह माइनॉरिटी स्‍ट्रेस होता है। जैसे कि इन्‍हें भेदभाव और अपनी पसंद को लेकर कई तरह के दबाव और परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। इस वजह से इनमें स्‍ट्रेस का होना सामान्‍य बात है लेकिन इस वजह से ये कई बीमारियों का शिकार बन सकती हैं जिनमें टाइप 2 डायबिटीज़ भी शामिल है।

ज्‍यादा पुरुष बनते हैं मधुमेह रोगी

हैल्‍थ इंश्‍योरेंस कंपनी द्वारा करवाए गए एक सर्वे में सामने आया है कि कॉर्पोरेट सेक्‍टर में काम करने वाले लोगों में महिलाओं से ज्‍यादा पुरुषों में डायबिटीज़ का खतरा है।

इस सर्वे के अनुसार डायबिटीज़ से संबंधित दवाओं पर महिलाओं से 13 प्रतिशत ज्‍यादा पुरुषों ने खर्च किया है। वहीं पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने बेहतर तरीके से डायबिटीज़ को कंट्रोल किया है। डायबिटीज़ को समझने के लिए अपोलो म्‍यूनिक हैल्‍थ इंश्‍योरेंस ने देशभर के 800,000 कॉर्पोरेट हैल्‍थ इंश्‍योरेंस कस्‍टमर्स पर स्‍टडी करवाई। इस स्‍टडी में सामने आया है कि कॉर्पोरेट वर्कप्‍लेस में 36-45 उम्र के वर्कर्स की तुलना में 46-60 साल की उम्र के बीच के लोगों में मधुमेह के मरीज़ ज्‍यादा थे।

इस तरह डायबिटीज़ की बीमारी महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग होती है। हालांकि, इनका ईलाज एक ही तरह से किया जा सकता है।

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