रसोई में रखा ये मामूली सा मसाला मधुमेह रोगियों के लिए दवा से कम नही है

Picture credit : graina.com.au

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अगर लंबे समय तक मधुमेह का ईलाज ना किया जाए तो इसकी बीमारी में कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं। इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार मूत्र आना, प्‍यास लगना, थकान महसूस होना, अचानक वजन का कम होना, आंखों का धुंधलापन होना आदि शामिल है।

डायबिटीज़ को नियंत्रित करने और इससे बचने का उपाय है कि आप एक्टिव रहें और संतुलित आहार लें लेकिन एशियाई मसाला हल्‍दी से भी ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है।

डॉक्‍टर का कहना है कि हल्‍दी अग्‍नाश्‍य के कार्य में अहम भूमिका निभाती है और बीटा सेल्‍स से इंसुलिन रिलीज़ करने के कार्य को बेहतर करती है।

दो मौकों पर 14 डायबिटीज़ के मरीज़ों का ग्‍लूकोज़ टॉलरेंस टेस्‍ट करवाया गया जिसमें उन्‍हें 75 ग्राम ग्‍लूकोज़ के साथ प्‍लासेबो और 6 ग्राम हल्‍दी दी गई। दो घंटे बाद इनके खून के सैंपल लिए गए ताकि इंसुलिन पर हल्‍दी के असर का पता लगाया जा सके।

हल्‍दी के गुण

हल्‍दी के पौधे की जड़ को पीसकर इसका मसाला बनाया जाता है। सालों से हल्‍दी को इसके औषधीय प्रयोगों के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि हल्‍दी ना केवल मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद होती है बल्कि इससे दर्द से राहत और रोग से बचाव करने में भी मदद मिलती है।

क्‍या कहती है रिसर्च

हल्‍दी में करक्‍यूमिन नामक यौगिक होता है जोकि इस मसाले को औषधीय गुण देता है।

साल 2013 में हुई एक स्‍टडी के मुताबिक करक्‍यूमिन से रक्‍त में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर कम किया जा सकता है साथ ही मधुमेह के कारण होने वाली मुश्किलों को भी दूर किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि करक्‍यूमिन डायबिटीज़ से बचाने में भी मददगार होता है। करक्‍यूमिन और हल्‍दी के मावन शरीर को मिलने वाले फायदों को लेकर अभी और रिसर्च होना बाकी है

अन्‍य रिसर्च की मानें तो हल्‍दी से ब्‍लड शुगर के स्‍तर को संतुलित किया जा सकता है और ये मधुमेह को नियंत्रित करने में भी मददगार साबित होती है। ये गुण हल्‍दी के सप्‍लीमेंट्स में भी होते हैं। साथ ही ये कई अन्‍य फायदे भी देता है जैसे पाचन को दुरुस्‍त करना आदि।

Picture credit : freepressjournal.in

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हल्‍दी खाने से नुकसान भी है

हल्‍दी का सेवन करना मधुमेह के मरीज़ों के लिए सुरक्षित रहता है। अगर हल्‍दी में मौजूद करक्‍यूमिन का सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाए तो इसके हानिकारक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं। इसका उच्‍च मात्रा में सेवन करना खतरनाक हो सकता है। रोज़ 4 ग्राम करक्‍यूमिन का सेवन कर सकते हैं।

हल्‍दी के नुकसान

  • जी मितली
  • अपच
  • डायरिया

अधिक मात्रा में हल्‍दी का सेवन करने से लिवर को भी नुकसान हो सकता है। अगर आपको गॉल ब्‍लैडर में कोई दिक्‍कत या रोग है तो आपको हल्‍दी का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

डा‍यबिटीज़ के मरीज़ों के लिए उनकी डाइट सबसे ज्‍यादा जरूरी होती है इसलिए अपने आहार में हल्‍दी को शामिल करने से पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श जरूर कर लें। संतुलित मात्रा में आप डॉक्‍टर की सलाह के बिना भी हल्‍दी का सेवन कर सकते हैं। हालांकि, डॉक्‍टर आपकी सेहत के अनुसार आपको इसके खतरे और फायदों के बारे में बता सकते हैं।

डायबिटीज़ को हल्‍दी से कंट्रोल करना

करक्‍यूमिन मधुमेह के मरीज़ों को कई तरह से प्रभावित करता है। इससे हाई ब्‍लड शुगर के स्‍तर और शरीर में इंसुलिन की प्रतिक्रिया को सुधारा जा सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज़ में अग्‍नाश्‍य की कोशिकाएं धीमी हो जाती है और सूजन की समस्‍या रहती है। अग्‍नाश्‍य मं सूजन की वजह से शरीर में इंसुलिन नहीं बन पाता है। साथ ही ये इंसुलिन रेसिस्‍टेंस का भी कारण बनता है। हल्‍दी एंटी-इंफ्लामेट्री होती है जिससे इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में भी राहत मिलती है। हल्‍दी का एंटी इंफ्लामेट्री यौगिक शरीर में प्रोटीन की क्रिया को मजबतू करता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों में हल्‍दी से क्षतिग्रस्‍त हुए अग्‍नाश्‍य को ठीक किया जा सकता है। अग्‍नाश्‍य के बीटा सेल्‍स के सही तरह से काम ना करने पर इंसुलिन नहीं बन पाता है। हल्‍दी से बीटा सेल्‍स के कार्य को ठीक किया जा सकता है और इस तरह अग्‍नाश्‍य को पहुंची क्षति को ठीक किया जा सकता है। हल्‍दी ब्‍लड शुगर लेवल को संतुलित करने में भी कारगर साबित होती है जोकि डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत जरूरी है।

Picture credit : thecostaricanews.com

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इसे अलावा हल्‍दी से ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस को भी कम किया जा सकता है। जब शरीर में प्राकृतिक एंटीऑक्‍सीडेंट और रिएक्टिव ऑक्‍सीजन स्‍पेशियस के उत्‍पादन के बीच संतुलन खो जाता है तो ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस होने लगता है।

ये रिएक्टिव ऑक्‍सीजन स्‍पेशियस ऐसे अणु होते हैं जो कोशिकाओं को समान्‍य रूप से कार्य करने में मदद करते हैं। जब इन ऑक्‍सीजन स्‍पेशियस की मात्रा बढ़ती है तो इससे सूजन और कोशिकाओं के नष्‍ट होने की समस्‍या हो सकती है। ये ठीक नहीं है। हल्‍दी एंजाइम्‍स की मात्रा बढ़ाती है जिन्‍हें एंटीऑक्‍सीडेंट के नाम से जाना जाता है। इससे डायबिटीज़ के मरीज़ों में पाया जाने वाला ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस कम होता है।

हल्‍दी को आहार में कैसे करें शामिल

हल्‍दी आपको किसी भी किराने की दुकान पर मिल जाएगी। दक्षिण अमेरिका में हल्‍दी बहुत प्रसिद्ध है और भारत में तो कोई भी व्‍यंजन और औषधीय दवा इसके बिना बनती ही नहीं है। हल्‍दी की सबसे खास बात ये है कि आप इसे बड़ी आसानी से अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।

किसी भी फूड पर एक चुटकी हल्‍दी छिड़क कर आप उसे खा सकते हैं। इससे खाने को एक अलग रंग भी मिलता है। अगर आप अपने खाने में इसे नहीं डालना चाहते या रोज़ ऐसा खाना खाते-खाते बोर हो गए हैं तो आप अपने ड्रिंक्‍स में भी हल्‍दी डालकर पी सकते हैं।

कई लोग उबले हुए अंडों पर हल्‍दी छिड़क कर खाते हैं या रोस्‍ट की गई सब्जियों, चावल या सूप में हल्‍दी डालते हैं। स्‍मूदी या एक गिलास दूध में भी हल्‍दी डालकर पिया जा सकता है। भारत के कुछ क्षेत्रों में हल्‍दी की चाय भी बहुत लोकप्रिय है। इसका ज्‍यादा से ज्‍यादा लाभ पाने के लिए इसे लाल मिर्च के साथ मिलाकर खाएं। आप किसी भी खाने की चीज़ पर हल्‍दी डालकर खा सकते हैं और इससे खाने के स्‍वाद में भी कोई बदलाव नहीं आएगा।

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