डायबिटीज़ की बीमारी में पैरों में रूक जाता है रक्‍त का प्रवाह, इसे ऐसे कर सकते हैं बेहतर

Picture credit : md-health.com

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अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के अनुसार इस समय दुनियाभर में डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। खराब होती जीवनशैली और असंतुलित आहार की वजह से ये बीमारी तेजी से फैल रही है।

डायबिटीज़ की बीमारी में पैरों और तलवों की रक्‍त वाहिकाएं सख्‍त और संकरी हो जाती है और इनमें ठीक तरह से रक्‍तप्रवाह नहीं हो पाता है। शरीर‍ के विभिन्‍न हिस्‍सों में ठीक तरह से रक्‍तप्रवाह ना होने के कारण पैरों में सर्द-गर्म या दर्द महसूस होना बंद हो जाता है। पैरों में रक्‍तप्रवाह के लिए एक्‍सरसाइज़ बहुत मददगार होती है।

रक्‍तप्रवाह खराब हो तो क्‍या करें

अगर आपकी पैरो की न्‍यूरोपैथी हुई है तो आपको पैरों में खराब रक्‍तप्रवाह की समस्‍या आ सकती है। डायबिटीज़ में पैरों की खास देखभाल करने की जरूरत होती है और आप कुछ बातों का ध्‍यान रखकर ऐसा कर सकते हैं।

रोज़ पैरों को खुद भी चैक करें और अपने डॉक्‍टर से अपनी डायबिटीज़ फुट केयर के बारे में पूछें। आपके पैरों की जांच पोडियाट्रिस्‍ट या फुट डॉक्‍टर कर सकते हैं।

रोज़़ पैरों की जांच और कॉम्‍प्रेहेंसिव में फर्क होता है। कॉम्‍प्रेहेंसिव जांच में आपके पैरों में सनसनाहट को जांचने के लिए जांचकर्ता 10 एमएम फिशिंग लाइन टाइप फिलामेंट करता है। वो आपसे आंखें बंद करने को कहेंगें और आपसे पूछेंगें कि पैरों में जहां वो आपका छू रहे हैं वहां आपको कुछ महसूस हो रहा है नहीं।

अगर त्‍वचा का कोई हिस्‍सा सख्‍त है या उस पर घाव है या अल्‍सर हो गया है या आपका अल्‍सर ठीक होने का नाम नहीं ले रहा है तो जांचकर्ता इस बात को भी नोट करेगा। वो आपसे पैरों की देखभाल से जुड़े कई सवाल भी पूछ सकते हैं और वो आपको कुछ फुट केयर टिप्‍स या निर्देश भी दे सकते हैं।

आपको डॉक्‍टर द्वारा बताई गई सभी फुट केयर निर्देशों का पालन करना चाहिए। डायबिटीज़ के मरीज़ों और खराब रक्‍तप्रवाह और न्‍यूरोपैथी से पीडित लोगों को साल में एक बार पोडियाट्रिस्‍ट के पास जरूर जाना चाहिए। अगर आपके पैरों की उंगलियों के नाखून मोटे हैं तो आपको ज्‍यादा जल्‍दी चैकअप करवाने की जरूरत होती है।

अगर आप मधुमेह के मरीज़ हैं तो अपने पैरों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही ना बरतें।

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पैरों में रक्‍तप्रवाह कैसे करें बेहतर

कुछ प्राकृतिक और औषधीय तरीकों से आप पैरों में रक्‍तप्रवाह को बेहतर आौर पैरों मे होने वाले अल्‍सर को ठीक कर सकते हैं।

अपने रक्‍तचाप और कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित रखें और ब्‍लड शुगर और ए1सी का भी ध्‍यान रखें। डॉक्‍टर से सारे चैकअप करवाएं और डायबिटीक जुराब पहनें। रोज़ अपने पैरों को चैक करें और देखें कि कहीं उनमें कोई घाव तो नहीं है।

कुछ दवाओं से रक्‍तप्रवाह को बेहतर किया जा सकता है लेकिन ये संकरी वाहिकाओं और धमनियों में काम नहीं कर पाती हैं।

अगर धमनियां बंद या संकरी हो गई है और उनमें रक्‍तप्रवाह नहीं हो पा रहा है तो धमनियों के ईलाज के लिए एंजियोप्‍लास्‍टी की जा सकती है। धमनी में एक कैथेटर और बैलून डाला जाता है तो धमनी को खोल देता है। कुछ गंभीर मामलों में बंद धमनी में स्‍टेंट डाला जाता है जिससे की उसमें रक्‍तप्रवाह हो सके।

अगर पैरों में रक्‍तप्रवाह का ब्‍लॉकेज बहुत ज्‍यादा नहीं है कोरोनरी बाईपास सर्जरी करवाई जा सकती है। इसमें मरीज़ के शरीर से ही वेन हारवेस्‍टिड बनाए जाते हैं ताकि उसके शरीर में रक्‍तप्रवाह बेहतर हो सके।

स्‍ट्रेचिंग

स्‍ट्रेचिंग एक्‍सरसाइज़ करने से तनाव के स्‍तर में कमी आती है और पूरे शरीर में रक्‍तप्रवाह बेहतर हो पाता है और मांसपेशियां कसी हुई रहती हैं। मांसपेशियों को स्‍ट्रेच करने खासतौर पर डायबिटीज़ के मरीज़ों में इससे रक्‍त का प्रवाह बढ़ जाता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ स्‍पोर्ट्स मेडिसन के अनुसार हर सप्‍ताह कम से कम दो सेशन स्‍ट्रेचिंग के होने चाहिए जिसमें शरीर की सभी मुख्‍य मांसपेशियों की स्‍ट्रेचिंग शामिल हो।

एडियों, पैरों के लिए भी आप स्‍ट्रेचिंग एक्‍सरसाइज़ कर सकते हैं इससे भी मधुमेह के मरीज़ों में रक्‍तप्रवाह बेहतर हो पाता है। पैरों की स्‍ट्रेचिंग के लिए दीवार के सामने खड़े हो जाएं। अब दाएं पैर के घुटने पर बॉल से दबाएं और नीचे की ओर झुकें। सीधे पैर पर दीवार से 24 ईंच की दूरी पर बॉल को रखें।

एंकल रोटेशन

इस एक्‍सरसाइज़ से पैरों, एडियों और पैरों की उंगलियों में रक्‍तप्रवाह बेहतर होता है। इसके लिए किसी आरामदायक कुर्सी पर बैठ जाएं और पैरों को जमीन पर आराम से रखें। जमीन से सीधे पैर को 12 ईंच ऊपर उठाएं और अंगूठ को शरीर से दूर रखें। अंगूठे को गोल घुमाएं। पंजे को घुमाते समय पैर को सीधा रखें। इससे रक्‍तप्रवाह ए‍डी तक पहुंचता है। दस बार घुमाने के बाद दूसरी दिशा में पंजे को घुमाएं। दस बार घुमाने के बाद दूसरे पैर पर भी ऐसा ही करें।

एरोबिक एक्‍सरसाइज़

शरीर के निचले हिस्‍से पर केंद्रित एरोबिक एक्‍सरसाइज़ में डांस, वॉकिंग, तैराकी और बाइकिंग शामिल है। इसके लिए आपको आरामदायक जूते पहनना सबसे ज्‍यादा जरूरी है। इससे पैरों को जरूरी आराम मिलता है।

मधुमेह की बीमारी में अपने फुटवेयर के टाइप का भी पूरा ध्‍यान रखना चाहिए। ऐसे में फुटवेयर पूरी तरह से फिट होना चाहिएइतना भी ज्‍यादा फिट ना हो कि आपके पैर में दर्द होने लगे। ऐसा करने से पैरों में अल्‍सरनाखूनों में समस्‍या आदि हो सकती है। फुटवेयर ऊपर से मुलायम बिना सीम के होने चाहिए जिससे तलवे को आराम मिल सके। इसके अलावा वाइड टो कैप्‍स के वाले फुटवेयर में डायबिटीज़ के मरीज़ पहन सकते हैं। हमेशा ध्‍यान रखें कि इनसोल मुलायम हो और इसकी लाइनिंग्‍स पर कोई रिंकल या सीम ना हो।

अकसर लोग पैरों की अंगुलियों के नाखूनों को ज्‍यादा महत्‍व नहीं देते हैं और इसी वजह से हम आपको इसके बारे में अलग से बता रहे हैं। डायबिटीक मरीज़ों को अपने पैरों के नाखून काटकर शेप में रखना चाहिए। इन्‍हें ज्‍यादा छोटा ना रखें। साइड में नाखूनों को ना काटें। नहाने के बाद नाखून काटना थोड़ा आसान होता है लेकिन इस समय ये नरम हो जाते हैं इसलिए थोड़ी सावधानी बरतना जरूरी है।

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