क्‍या डायबिटीज़ के मरीज़ खा सकते हैं ‘घी’ ?

Picture credit : punjabi.dailypost.in

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सामान्‍य लोगों की तुलना में डायबिटीज़ के मरीज़ों की डाइट बहुत अलग होती है। इन्‍हें अपनी डाइट में ऐसी चीज़ों को शामिल करना होता है जिनका असर इनके ब्‍लड शुगर लेवल पर ना पड़े। कुकिंग में इस्‍तेमाल होने वाले तेलों को सेहत के लिए बेहतर बताया जाता है लेकिन असल में ये फायदे से ज्‍यादा नुकसान देते हैं। तो क्‍या इनसे बेहतर घी है ?

हालांकि, घी में भी अच्‍छी खासी मात्रा में फैट होता है लेकिन फिर भी सेहत विशेषज्ञ इसे सेहत के लिए फायदेमंद बताते हैं।

सदियों से घी का प्रयोग दवाओं में किया जाता है। घी में कई पोषक तत्‍व मौजूद रहते हैं जोकि डायबिटीज़ के मरीज़ों को स्‍वस्‍थ रखने में मदद करता है। अब आप सोच रहे होंगें कि कुकिंग ऑयल्‍स की जगह घी में ऐसा क्‍या होता है जो ये डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फायदेमंद रहता है।

इस वजह से घी है सेहतमंद

मैक्रोबायोटिक न्‍यूट्रिशनिस्‍टट एंड हैल्‍थ कोच शिल्‍पा अरोड़ा का कहना है कि घी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए दवा का काम करता है। घी में फैटी एसिड होते हैं जो मेटाबोलाइजिंग में मदद करते हैं और हाई ब्‍लड शुगर को संतुलित रखते हैं। इसके अलावा चावल के साथ घी खाने से डायबिटीज़ के मरीज़ों को चावल में मौजूद शुगर को पचाने में आसानी होती है। हालांकि, मधुमेह रोगियों को वैदिक घी का ही सेवन करना चाहिए। घी बनाने में देसी गाय के दूध का प्रयोग करना चाहिए क्‍योंकि इसके ज्‍यादा से ज्‍यादा सेहत को फायदे मिलते हैं।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए घी दवा है : ये हैं कारण

Picture credit : easyayurveda.com

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  • देसी घी हैल्‍दी फैट का बेहतरीन स्रोत माना जाता है जोकि खाने से उनके पोषक तत्‍वों को अवशोषित करने में मदद करता है। ये प्रक्रिया ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है और इस तरह आप डायबिटीज़ को भी नियंत्रित रख पाते हैं।
  • घी की वजह से पाचन तंत्र की क्रिया भी दुरुस्‍त रहती है। अगर आप अपने भोजन में सही मात्रा में घी का सेवन करते हैं तो आपको कब्‍ज की समस्‍या से भी मुक्‍ति मिलती है।
  • शरीर में जमा वसा भी सही मात्रा में किए गए घी के सेवन से पिघल जाता है और इससे डायबिटीज़ की बीमारी को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
  • घी के सेवन से गट हार्मोन की क्रिया भी बेहतर होती है। ये क्रिया शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन के स्राव को बेहतर करती है जिससे मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • इसके अलावा घी को विटामिन के और कई एंटीऑक्‍सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है जो कि इम्‍युनिटी को बेहतर करता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों में अकसर ये समस्‍या देखी जाती है।
  • ऑर्गेनिक घी के सेवन से बैड कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को घटाने में मदद मिलती है।
  • घी को हाई कार्बोहाइड्रेट फूड्स के साथ हाई ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स फूड्स जैसे चावल, वहाइट ब्रेड, परांठा आदि के साथ लेने से जीआई कम करने में मदद मिलती है। ये मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।
  • घी एक बेहतरीन स्रोत है लेकिन आपको इसका सेवन इसमें कुछ बदलाव करके ही करना चाहिए। ज्‍यादा मात्रा में घी ना खाएं क्‍योंकि किसी भी चीज़ की अति नुकसानदायक होती है। इसके अलावा घर पर बना घी ही फायदेमंद होता है। अपने डायबेटोलॉजिस्‍ट से सलाह लेकर ही घी का सेवन करें तभी आपको इसके ज्‍यादा से ज्‍यादा फायदे मिल पाएंगें।
  • गाय का घी सबसे ज्‍यादा फायदेमंद होता है और इस बात में कोई शक नहीं है। घर पर गाय के दूध से बना घी खाने से दिमाग तेज होता है और हड्डियों को मजबूती मिलती है और कब्‍ज दूर होता है, शरीर में जमा फैट पिघल जाता है।

कुछ लोग घी की जगह मक्‍खन का भी सेवन करते हैं लेकिन क्‍या आपको पता है कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को घी का सेवन करना चाहिए या मक्‍खन का ?

Picture credit : goodfood.com

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मक्‍खन में 51 प्रतिशत सैचुरेटेड फैट होता है। इसे कम मात्रा में खाना सेहत के लिए बेहतर होता है। आज जिस पर्यावरण में हम रह रहे हैं वो पूरी तरह से रसायनों से भरी है और ऐसे में हमारे खाने में भी ये मिले होते हैं।

चूंकि मक्‍खन में वसा की मात्रा अधिक होती है इसलिए ये कई बीमारियों का कारण बनता है। यूएस के हार्वर्ड टी.एच चान स्‍कूल ऑफ पब्‍लिक हैल्‍थ की एक स्‍टडी में पाया गया है कि दिन में 12 ग्राम मक्‍खन खाने से डायबिटीज़ का खतरा बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है।

किसी फूड में सैचुरेटेड फैट कितना है इस बात से ज्‍यादा जरूरी है कि उसे कितनी मात्रा में खाया जा रहा है। मक्‍खन प्रोसेस्‍ड फूड होता है और इसी वजह से इसे हानिकारक माना जाता है। जहां घर पर सफेद मक्‍खन को मलाई और दूध की क्रीम को जलाकर बनाया जाता है वहीं स्‍टोर में मिलने वाला मक्‍खन मिल्‍क फैट और मिल्‍क प्रोटीन से मिलकर बनता है और बाद में इसमें नमक डाला जाता है। इसमें ट्रांस फैट होता है जोकि सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचाता है।

इस स्‍टडी के शोधकर्ताओं की मानें तो सैचुरेटेड और एनिमल फैट जैसे चीज़ और मक्‍खन में सैचुरेटेड फैटी एसिड और ट्रांस फैट प्रचुर मात्रा में होता है, इनका सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बह़त ज्‍यादा बढ़ जाता है जबकि होल फैट योगर्ट इस खतरे को कम करता है।

अब तो आप समझ गए ना कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को मक्‍खन से ज्‍यादा घी खाने से फायदा मिलता है लेकिन आपको इसके सेवन में एक और बात का खास ध्‍यान रखना है और वो ये है कि आपको घर पर गाय के दूध से बना घी ही खाना है। मधुमेह रोगियों के लिए घर पर बना घी ही फायदा पहुंचाता है वरना अगर ये अधिक मात्रा में घी का सेवन कर लें तो इन्‍हें फायदे की जगह नुकसान हो सकता है।

एक बात का आपको बहुत ध्‍यान रखना है और वो ये है कि आपको किसी भी चीज़ को अत्‍यधिक मात्रा में नहीं खाना क्‍योंकि किसी भी चीज़ की अति नुकसानदायक होती है। आपके लिए घी का ज्‍यादा सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।

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