टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ ले सकते हैं कीटोजेनिक डाइट ?

Picture credit : ketoship.wordpress.com

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आपने अब तक कीटोजेनिक डाइट के बारे में काफी कुछ सुना होगा। आजकल सिलेब्रिटी और सुपरमॉडल्‍स इसी डाइट को फॉलो कर रहे हैं।

क्‍या कीटो डाइट डायबिटीज़ के मरीज़ भी अपना सकते हैं ?

स्‍टडी में इस सवाल का जवाब मिलता है। कुछ वैज्ञानिक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि कीटो डाइट सेहत के लिए अच्‍छी होती है जबकि अन्‍य रिसर्च जैसे कि साल 2016 में सितंबर में न्‍यूट्रिएंट्स में प्रकाशित हुई एक स्‍टडी के मुताबिक कीटोजेनिक डाइट मधुमेह रोगियों के आहार में साबुत अनाज के सेवन को सीमित या खत्‍म कर देती है।

कीटो डाइट से डायबिटीज़ को कंट्रोल करने में बहुत मदद और फायदे मिलते हैं। हालांकि, इस डाइट को अपनाना इतना भी आसान नहीं है। तो चलिए जानते हैं कीटो डाइट और इससे जुड़ी खास बातों और तथ्‍यों के बारे में…

कैसे काम करती है कीटोजेनिक डाइट

कीटो डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम और फैट ज्‍यादा होता है। इसका मतलब है कि कीटो डाइट लेने से कार्ब का सेवन कम हो जाता है। आमतौर पर दिनभर में 50 ग्राम कार्ब का सेवन किया जा सकता है।

सामान्‍य तौर पर लोग ऐसे आहार का सेवन करते हैं जिसमें कार्बोहाइड्रेट की कोई सीमा नहीं होती है। टर्की, चीज़ और होलग्रेन ब्रेड से बने वैजी सैंडविच, 1 आउंस पोटैटो चिप्‍स में लगभग 51 ग्राम कार्ब होता है। इन चीज़ों को खाने से इंसुलिन लेवल गिर जाता है और ऐसे में शरीर केटोसिस की स्थिति में पहुंच जाता है जिसमें कार्बोहाइट्रेड की जगह फैट खर्च होने लगता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए कीटोजेनिक डाइट के फायदे

अगर आप टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो आपको कीटोजेनिक डाइट लेने से फायदा होगा। ज्‍यादा से ज्‍यादा प्रोटीन और फैट का सेवन करने से मरीज़ को भूख कम लगती है और कार्बोहाइड्रेट के मुकाबले प्रोटीन और फैट पचने में ज्‍यादा समय लेता है इसलिए इससे वजन घटाने में भी मदद मिलती है। इससे शरीर में एनर्जी भी बनी रहती है।

कीटोजेनिक डाइट के अन्‍य फायदों के बारे में बात करें तो सितंबर 2016 में जर्नल ऑफ ओबेसिटी एंड ईटिंग डिस्‍ऑर्डर के मुताबिक डायबिटीज़ के मरीज़ों को कीटो डाइट से ए1सी टेस्‍ट के रिजल्‍ट को बेहतर करने में मदद मिलती है। इस टेस्‍ट में हर तीन महीने में ब्‍लड शुगर लेवल चैक किया जाता है और लो कैलोरी डाइट से ज्‍यादा ये डाइट फायदेमंद होती है। साथ ही इससे लो फैट डाइट के मुकाबले ट्राइग्लिसराइड भी कम होता है जोकि मधुमेह रोगियों को ह्रदय से संबंधित बीमारियों से बचाता है। आपको बता दें कि मधुमेह रोगियों में ह्रदय रोगों का खतरा बहुत ज्‍यादा होता है।

Picture credit : diabeticmuscleandfitness.com

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इसके अलावा कीटो डाइट, लो फैट डाइट के मुकाबले वजन घटाने में ज्‍यादा कारगर साबित होती है। इस डाइट की मदद से 10 पाउंट तक वजन घटाकर भी आप ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल करने वाली दवाओं पर निर्भरता को कम कर सकते हैं। इसके अलावा अगस्‍त 2013 में यूरोपियन जर्नल ऑफ क्‍लीनिकल न्‍यूट्रिशियन के जर्नल में पाया गया है कि कीटोजेनिक डाइट से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल और फास्टिंग ब्‍लड शुगर लेवल बेहतर होता है।

डायबिटीज़ में कीटो डाइट

हमारा ये मतलब बिलकुल नहीं है कि मधुमेह के मरीज़ों के लिए कीटो डाइट सबसे ज्‍यादा बेहतर और असरकारी होती है। कुछ स्‍टडी में ये बात भी सामने आई है कि ईटिंग प्‍लांस जैसे कि मेडिटेरेनिअन डाइट जिसमें लीन मीट, मछली, नट्स, फल-सब्जियां, ऑलिव ऑयल और साबुत अनाज शामिल हो वो मधुमेह की बीमारी में फायदेमंद रहती है। उदाहरणार्थ, अप्रैल 2014 में एक स्‍टडी के मुताबिक मेडिटेरेनिअन डाइट से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा कम किया जा सकता है।

इसके अलावा साल 2011 में भी प्रकाशित हुई एक स्‍टडी के मुताबिक मेडिटेरेनिअन डाइट से इस बीमारी को दूर किया जा सकता है। डायबिटीज़ के मरीज़ भी इसमें कुछ बदलाव कर इसका सेवन कर सकते हैं। इस डाइट से बेहतर तरीके से ब्‍लड शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है।

वहीं कीटो डाइट के कुछ खतरे भी हैं। साल 2016 में ओबेसिटी एंड ईटिंग डिस्‍ऑर्डर के जर्नल के मुताबिक कीटोजेनिक डाइट के कारण टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर को लो रखने के लिए खाने वाली दवाओं की वजह से हाइपोग्‍लाइसेमिया और लो ब्‍लड शुगर का खतरा रहता है। इसके अलावा कीटोजेनिक डाइट के और भी कई नुकसान होते हैं जैसे कि मुंह से बदबू आना, चक्‍कर आना, जी मितली, सिरदर्द, बेहोशी, कंफ्यूज़ रहना, ज्‍यादा प्‍यास लगना और भूख लगना, दिल की धड़कन का बढ़ना, बुखार या ठंडा रहना।

कीटोजेनिक डाइट में क्‍या करें शामिल

कीटोजनिक डाइट फॉलो करने से पहले अपने डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें। अगर आप इस डाइट को फॉलो करते हैं तो इन चीज़ों को आप खा सकते हैं। अगर आपको लगता है कि इनमें से कुछ चीज़ों में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्‍यादा है तो आप उनका सेवन सीमित कर सकते हैं और उसकी जगह उच्‍च प्रोटीन और हैल्‍दी फैट ले सकते हैं।

कीटोजेनिक डाइट प्‍लान में इन चीज़ों को शामिल कर सकते हैं :

  • अंडे और मांस
  • मछली
  • एवोकैडो
  • नट्स और बीज
  • नॉन फैट प्‍लेन ग्रीक योगर्ट
  • नॉन स्‍टार्च वैजी
  •  ऑलिव ऑयल
  • कीटोजेनिक डाइट में इन चीज़ों का सेवन कम या सीमित मात्रा में करें :
  • अनाज
  • शराब
  • फल, जिनमें कार्ब की मात्रा ज्‍यादा हो
  • किसी भी तरह का शुगर
  • आर्टिफिशियल स्‍वीटनर
  • प्रोसेस्‍ड फूड

अगर आपको किडनी रोग है तो आपको कीटोजेनिक डाइट को सेवन नहीं करना चाहिए। टाइप 1 डायबिटीज़ के मरीज़ों में भी कीटो डाइट के सेवन के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है क्‍योंकि अब तक जितनी भी रिसर्च हुई हैं उसमें इसे टाइप 2 डायबिटीज़ के लिए ही प्रभावी बताया गया है। टाइप 1 डायबिटीज़ के मरीज़ों में टाइप 2 डायबिटीज़ के मुकाबले कीटोस का खतरा ज्‍यादा रहता है।

अगर आपको कोई ईटिंग विकार रहा है तो आपको ये डाइट लेने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह ले लेनी चाहिए। डायबिटीज़ के मरीज़ों को कोई भी डाइट या फूड को अपने आहार में शामिल करने से पहले अपने सेहत विशेषज्ञ से सलाह ले लेनी चाहिए। आपके लिए आहार बहुत महत्‍वपूर्ण होता है इसलिए इसे नज़रअंदाज़ करना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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