इन चीज़ों को खाकर घटा सकते हैं बैली फैट, डायबिटीज़ से मिलेगी सुरक्षा

Picture credit : everydayhealth.com

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बैली फैट यानि पेट पर चर्बी जमा होने के कारण डायबिबटीज़ के साथ-साथ कई अन्‍य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पेट के ऊपर जमी चर्बी सबसे ज्‍यादा दिखाई देती है और शरीर के बाकी हिस्‍सों के मुकाबले पेट पर चर्बी होना नुकसानदेह होता है।

पेट पर जमा चर्बी हार्मोंस को बाधित करती है और इंसुलिन रेसिस्‍टेंस और सूजन बढ़ाती है। इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में व्‍यक्‍ति टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त हो जाता है जिसमें शरीर को ग्‍लूकोज़ देने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है और शरीर को एनर्जी नहीं मिल पाती है। ग्‍लूकोज़ शरीर को एनर्जी देने का प्रमुख स्रोत होता है।

पेट के ऊपर वसा जमा होता है जबकि बाकी अंगों पर वसा का होना इतना खतरनाक नहीं होता है। ये फैट शरीर में सूजन का कारण बन सकता है जिसकी वजह से मधुमेह, हाई ब्‍लड प्रेशर, ह्रदयरोग और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। शरीर के सभी अंगों में से पेट वाला हिस्‍सा बहुत महत्‍वपूर्ण होता है इसलिए इस हिस्‍से पर वसा का जमना लिवर, अग्‍नाश्‍य पाचन तंत्र और किडनी को अपना काम करने में बाधित करता है।

अगर आप बैली फैट को सिर्फ ओवरवेट या मोटापे का खतरा समझ रहे हैं तो आप गलत हैं। कुछ लोग ओवरवेट नहीं होते हैं लेकिन फिर भी उनके पेट पर अतिरिक्‍त वसा जमा होता है जोकि इंसुलिन रेसिस्‍टेंस का कारण बनता है। समय पर ईलाज ना करने पर इंसुलिन रेसिस्‍टेंस टाइप 2 डायबिटीज़ में तब्‍दील हो जाती है और कई गंभीर परेशानियां पैदा करती है।

कुछ खाद्य पदार्थों जैसे शुगरयुक्‍त ड्रिंक्‍स की वजह से पेट की चर्बी बढ़ती है। जब हम सूक्रोज़, फ्रूक्‍टोज़़ युक्‍त बेवरेज या हाई फ्रूक्‍टोज कॉर्न सिरप का सेवन करते हैं तो इससे पेट पर चर्बी बढ़ने लगती है। इस एक्‍स्‍ट्रा बैली फैट से ऐसा हार्मोन पैदा होता है जो इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में अहम रोल अदा करता है। बाद में ये टाइप 2 डायबिटीज़ का रूप ले लेता है।

शरीर पर वसा के जमने में आनुवांशिक और हार्मोंस भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए आप पूरी से बैली फैट को बढ़ने से नहीं रोक सकते हैं लेकिन अगर आप अपनी डाइट में कुछ फूड्स को शामिल करें तो बैली फैट को कम करने में मदद मिल सकती है साथ ही ये फूड्स ब्‍लड शुगर को भी कंट्रोल में रखेंगीं। तो चलिए जानते हैं कि बैली फैट से दूर रहने के लिए आपको अपनी डाइट में किन चीज़ों को शामिल करना चाहिए।

Picture credit : healthsachoice.com

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पानी

पानी सबसे ज्‍यादा जरूरी है। अपनी डाइट में सभी शुगरयुक्‍त ड्रिंक्‍स को हटाकर उसकी जगह पानी को दें। इससे शरीर में पानी की कमी पूरी होती है और नमी बनी रहती है। ऐसा करने से भूख नियंत्रित रहती है और आप कम खाते हैं। साल 2015 में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि जो मोटे बच्‍चे खाने से पहले 2 कप पानी पीते थे उन्‍होंने खाना खाने के बाद पानी पीने वाले बच्‍चों की तुलना में जल्‍दी वजन घटाया था।

वेजिटेरियन प्रोटीन का काम करते हैं बींस

छोले, ब्‍लैक बींस या व्‍हाइट बींस को सलाद में शामिल कर खा सकते हैं या फिर इन्‍हें स्‍मूदी बनाते समय प्‍यूरी की तरह भी डाल सकते हैं। बींस में कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेट और लीन प्रोटीन के साथ-साथ घुलनशील फाइबर भी होता है जोकि ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है और भूख को कम कर ओवरईटिंग से बचाता है।

नाश्‍ते में अंडे खाने से घटेगा बैली फैट

आहार में पर्याप्‍त मात्रा में प्रोटीन लेने से बैली फैट को घटोन में मदद मिलती है। स्‍टडी में सामने आया है कि जो लोग ज्‍यादा प्रोटीन खाते हैं उनमें कम बैली फैट होता है। साल 2012 में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई थी उच्‍च क्‍वालिटी का प्रोटीन खाने से बैली फैट कम होता है। अंडों में हाई क्‍वालिटी प्रोटीन होता है।

इंसुलिन सेंसिटिविटी को घटा सकता है एवोकैडो

इस क्रीमी फ्रूट में मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है। ये फैट पेट को 3 घंटे तक भरा हुआ रखता है। एक बार में आप ¼ एवोकैडो खा सकते हैं। एवोकैडो में मैग्‍नीशियम होता है जोकि इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद करता है।

कार्बोहाइड्रेट की जगह मोनोसैचुरेटेड फैट लेने से इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है।

Picture credit : sepalika.com

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रंग-बिरंगी सब्जियों में कम होता है कार्ब

गहरे रंग, संतरे और पीली सब्जियों का सेवन करने से पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है। साल 2014 नवंबर में जर्नल ऑफ द एकेडमी ऑफ न्‍यूट्रिशियन एंड डायबिटिक्‍स में प्रकाशित एक स्‍टडी के मुताबिक जो युवा इन रंगों की सब्जियां खाते हैं उनमें इंसुलिन सेंसिटिविटी ज्‍यादा और कम बैली फैट होता है।

हरी सब्जियां जैसे केल और पालक में कार्बोहाइड्रेट कम होता है और ये इंसुलिन और ब्‍लड शुगर को प्रभावित नहीं करती हैं। इनसे फाइबर मिलता है जो कि वजन कम करने में मदद करता है। हरी सब्जियों को नियंत्रित मात्रा में खाने की जरूरत नहीं है।

नट्स से होता है वजन कम

बादाम, अखरोट और अन्‍य तरह के नट्स में हैल्‍दी मोनोअनसैचुरेटेड फैट होता है। कई स्‍टडी में खुलासा हुआ है कि इससे पेट की चर्बी घटाने में मदद मिलती है। दिन में ¼ कप नट्स खा सकते हैं। नट्स्‍ में कैलोरी ज्‍यादा होती है इसलिए सीमित मात्रा में ही इसका प्रयोग करें। मुट्ठीभर नट्स खा सकते हैं या फिर कॉटेज चीज़ या ग्रीक योगर्ट पर भी नट्स को डालकर खा सकते हैं।

ह्रदय की सेहत को दुरुस्‍त करती है फैटी फिश

लीन प्रोटीन का संबंध सूजन को कम करने और ह्रदय रोगों के खतरे को कम करने से है। इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड ईपीए और डीएचए होता है। रिसर्च में सामने आया है कि प्रोटीन लेने से पेट की चर्बी कम की जा सकती है। 3 से 4 आउंस साल्‍मन या अन्‍य फैटी‍ फिश जैसे ट्यूना या सारदिंस सप्‍ताह में कई बार खाने से फायदा हो सकता है। लीन प्रोटीन से पेट भरा रहता है और ये इंसुलिन लेवल को प्रभावित किए बिना ही वजन कम करने में मदद करता है। कुछ फैटी फिश में मर्करी की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है इसलिए इसे कम ही खाना चाहिए। अपनी पसंदीदा फैटी फिश चुनते समय उसमें मर्करी की मात्रा का ध्‍यान रखें।

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