रोज़ रेड वाइन पीने से मधुमेह रोगियों का दिल रहेगा स्‍वस्‍थ

Picture credit : express.co.uk

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रोज़ रात को एक गिलास रेड वाइन पीने से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को कोलेस्‍ट्रॉल और कार्डिएक हैल्‍थ को मैनेज करने में मदद मिलती है। डायबिटीज़ के मरीज़ों में कार्डियोवस्‍कुलर रोगों का खतरा सामान्‍य लोगों की तुलना में ज्‍यादा रहता है और स्‍टडी के मुताबिक इनमें गुड कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम रहता है।

वाइन खासतौर पर रेड वाइन लेने से डायबिटीज़ के मरीज़ों को फायदा होता है। हाल ही में एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि रेड वाइन को डायबिटीज़ के मरीज़ अपनी हैल्‍दी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इससे मधुमेह रोगियों में कार्डियो मेटाबोलिक रिस्‍क घटता है।

रेड और व्‍हाइट वाइन दोनों ही शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती हैं। स्‍टडी की मानें तो एल्‍कोहल मेटाबोलिक जेनेटिक प्रोफाइल पर निर्भर करता है। स्‍लो एल्‍कोहल मेटाबोलाइज़र लोगों को वाइन से ब्‍लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है जबकि फास्‍ट एल्‍कोहल मेटाबोलाइज़र में एथानॉल ग्‍लूकोज़ कंट्रोल असर नहीं कर पाता है।

इस स्‍टडी में शामिल इजराइल की बेन गूरिओन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने डायबिटीज़ में शराब के मॉडरेट और सुरक्षित सेवन पर अध्‍ययन किया था और उन्‍हें से भी जानना था कि किस टाइप की वाइन का सेवन मधुमेह रोगी कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने 2 साल के ट्रायल के दौरान डायबिटीज़ के 224 मरीज़ों पर अध्‍ययन किया। इन लोगों की डायबिटीज़ नियंत्रित थी और इन्‍हें एल्‍कोहल का सेवन करने के लिए कहा गया। इन प्रतिभागियों की उम्र 45 से 75 साल के बीच थी। इन्‍हें रोज़ मॉडरेट वाइन का सेवन करने के लिए कहा गया साथ ही इन्‍हें संतुलित आहार लेने की भी सलाह दी गई। अध्‍ययन में शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को ड्राइविंग करने से पहले शराब पीने से मना किया था।

रेड वाइन को मेटाबोलिक से जुड़ी सभी तरह की समस्‍याओं में कारगर बताया गया है और ये खासतौर पर लिपिट प्रोफाइल में बेहतर बदलाव करती है। साथ ही ये गुड कोलेस्‍ट्रॉल को भी बढ़ाती है।

रेड वाइन और व्‍हाइट वाइन के बीच अंतर जानने के लिए भी शोधकर्ताओं ने रिसर्च की। 150 मिली लीटर ड्राई रेड या व्‍हाइट टेस्‍टिड वाइन में लगभग 17 ग्राम एथेननॉल और 120 किलो कैलोरी होती है लेकिन व्‍हाइट वाइन के मुकाबले रेड वाइन में कुल सात गुना फेनॉल ज्‍यादा होता है और 13 गुना रेसवेराटोल ज्‍यादा पाया जाता है।

रेड वाइन में मौसूद पॉलीफेनॉल्‍स में रेसवेराटॉल होता है। इस यौगिक को ह्रदय की सुरक्षा और एंटी एजिंग सप्‍लीमेंट के तौर पर जाना जाता है।

रेड वाइन के अलावा शराब का असर

डायबिटीज़ के मरीज़ हाइपोग्‍लाइसेमिया या हाइपरग्‍लाइसेमिया का शिकार होते हैं। अगर शुगर के बिना एलकोहल का सेवन किया जाए तो इससे आपके शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बहुत ज्‍यादा नीचे गिर सकता है। जब ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य से नीचे गिर जाएगा तो लिवर की सामान्य प्रतिक्रिया इसकी कमी को रोकने के लिए ग्लूकोज का उत्पादन करने लगेगी। लेकिन एल्‍कोहल के सेवन पर ये प्रक्रिया बाधित होने लगती है। एल्‍कोहल को पचाने के लिए लिवर पर बोझ बढ़ जाएगा और इस वजह से ग्‍लूकोज़ का उत्‍पादन नहीं कर पाएगा।

लिवर में पहुंचकर एल्‍कोहल एनएडीएच नामक एक केमिकल का उप्‍तादन करती है जोकि लिवर में ही रहता है। ये केमिकल ग्‍लूकोज़ के सामान्‍य उत्‍पादन को बाधित करता है और हाइपोग्‍लाइसेमिया के खतरे को बढ़ा देता है।

एल्‍होकल में कुछ बदलाव करके मधुमेह रोगियों में हाइपोग्‍लाइसेमिया का खतरा भी रहता है लेकिन थोड़ा कम रहता है क्‍योंकि व्‍हिस्‍की की कई वैरा‍यटियों में शुगर नहीं होती है, इस वजह से हाइपोग्‍लाइसेमिया का खतरा भी हो सकता है।

किसे नहीं करना चाहिए व्‍हिस्‍की का सेवन

अगर आप इन समस्‍याओं से गुज़र रहे हैं तो आपको एल्‍कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए :

  • पैरों और हाथों की नसों को क्षति पहुंची हो तो
  • उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या
  • मधुमेह का आंखों पर असर
  • ट्राई‍ग्‍लिसराइड का उच्‍च स्‍तर

जैसा कि स्‍टडी में बताया गया है कि रोज़ एक गिलास रेड वाइन पीकर मधुमेह के मरीज़ दिल को दुरुस्‍त और कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम कर सकते हैं। तो अब अगर आप मधुमेह रोगी हैं तो आज से भी रेड वाइन का सेवन करना शुरु कर दें लेकिन इस बात का ध्‍यान जरूर रखें कि इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्‍टर की सलाह जरूर ले लें।

डायबिटीज़ को नियंत्रित रखने के टिप्‍स

  • ओवरवेट होने पर मधुमेह का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वहीं प्रत्‍येक किलो वजन घटाने से मधुमेह का खतरा भी 16 प्रतिशत तक कम हो जाता है। स्‍वस्‍थ जीवनशैली और डाइट के ज़रिए वजन आसानी से घटाया जा सकता है। छोटी-छोटी बातों का ध्‍यान रखकर आप लंबे समय तक स्‍वस्‍थ रह सकते हैं।
  • कई तरह के फल-सब्जियां खाएं, प्रोटीन लें और फैट के बेहतर स्रोतों का सेवन करें। जिन फूड्स में ट्रांस फैट यानि की हाइड्रोजेनरेटेड फैट, प्रोसेस्‍ड फूड और शुगर ज्‍यादा होता है उनसे दूर रहें। कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेट्स में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। इन्‍हें पचने में थोड़ा समय लगता है और इस वजह से ये लंबे समय तक ऊर्जा का बेहतर स्रोत बन सकते हैं।
  • ओबेसिटी और डायबिटीज़ से संबंधित अध्‍ययनों में शुगरयुक्‍त बेवरेज़ेज़ के संबंध के बारे में बताया गया है। इन्‍हें अपनी डाइट से हटाकर आप कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं। रोज़ाना कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं। खूब सारे फल खाएं और शरीर को डिहाइड्रेट रखने के लिए हर्बल टी पीएं।
  • ना के बराबर शारीरिक क्रिया करने वाले लोगों में सबसे ज्‍यादा मधुमेह का खतरा रहता है। एक्‍सरसाइज़ से कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ज्‍यादा संवेदनशील हो जाती है। इसके लिए आप ब्रिस्‍क वॉक कर सकते हैं। 35-40 मिनट तक रोज़ हल्‍के व्‍यायाम से भी फायदा हो सकता है।
  • आज शायद ही ऐसा कोई व्‍यक्‍ति होगा जिसे कोई तनाव या परेशानी ना हो। तनाव की वजह से कई तरह के हार्मोन रिलीज़ होते हैं जिससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। कई अध्‍ययनों में भी ये बात साबित हुई है कि मेडिटेशन करने से तनाव को कम किया जा सकता है। शारीरिक व्‍यायाम और सोशल सपोर्ट से तनाव को कम किया जा सकता है।

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