जानिए इंसुलिन रेसिस्‍टेंस के बारे में सब कुछ

Picture credit : liverdoctor.com

Picture credit : liverdoctor.com

कई खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट, शुगर और स्‍टार्च पाया जाता है जोकि शरीर को एनर्जी प्रदान करने का प्रमुख स्रोत माना जाता है। आपका पाचन तंत्र कार्ब को ग्‍लूकोज़ या शुगर में तब्‍दील कर रक्‍त कोशिकाओं में प्रवाहित करता है। इंसुलिन की मदद से कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ को अवशोषित कर बॉडी को एनर्जी दी जाती है लेकिन अगर आप इंसुलिन रेसिस्‍टेंस से ग्रस्‍त हैं तो आपके शरीर में कोशिकाओं को ग्‍लूकोज़ अवशोषित करने में दिक्‍कत आ सकती है और आपके शरीर को ठीक तरह से काम करने के लिए ज्‍यादा इंसुलिन की जरूरत पड़ती है।

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस को ठीक किया जा सकता है लेकिन इसे ठीक करने से पहले आपको ये जान लेना चाहिए कि इंसुलिन क्‍या है और कैसे ये ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के कंट्रोल को प्रभावित करता है।

क्‍या है इंसुलिन

पैं‍क्रियाज़ यानि अग्‍नाश्‍य में बनने वाला इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है जो मेटाबॉलिज्‍म में अहम भूमिका निभाता है। खाना खाने के बाद अग्‍नाश्‍य रक्‍तवाहिकाओं में इंसुलिन को प्रवाहित करता है। इंसुलिन मांसपेशियों, कोशिकाओं और वसा तक जाने के लिए रक्‍तकोशिकाओं में शुगर को प्रवेश करने देता है।

ये हार्मोन इसलिए भी महत्‍वपूर्ण माना जाता है क्‍योंकि ये रक्‍तवाहिकाओं में शुगर को बढ़ने से रोकता है। आप जितना ज्‍यादा खाते हैं ब्‍लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए शरीर उतना ही ज्‍यादा इंसुलिन रिलीज़ करता है और इसे संतुलित मात्रा में बनाए रखने की कोशिश करता है।

क्‍या है इंसुलिन रेसिस्‍टेंस

Picture credit : webmd.com

Picture credit : webmd.com

इंसुलिन का उत्‍पादन और रिलीज़ होना एक प्राकृतिक मेटाबॉलिक क्रिया है जो खाना खाने के बाद सभी के शरीर में होती है लेकिन कुछ लोग इंसुलिन का इस्‍तेमाल ठीक तरह से नहीं कर पाते हैं।

एनर्जी पाने के लिए शरीर की कोशिकाएं, फैट और मांसपेशियां रक्‍तवाहिकाओं में ग्‍लूकोज़ को अवशोषित करने में सक्षम होनी चाहिए। अगर शरीर में इंसुलिन ठीक तरह से नहीं बन पाता है तो रक्‍त में ग्‍लूकोज़ जमने लगता है और ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। नार्मल ब्‍लड शुगर लेवल बनाए रखने के लिए पैंक्रियाज़ को इस संवेदनशीलता यानि रेसिस्‍टेंस को खत्‍म कर ज्‍यादा इंसुलिन रिलीज़ करना होता है।

हर व्‍यक्‍ति के शरीर में इंसुलिन रेसिस्‍टेंस का प्रभाव अलग होता है। कभी-कभी पैंक्रियाज़ के इंसुलिन ज्‍यादा बनाने पर इंसुलिन रेसिस्‍टेंस से निपटना और ब्‍लड शुगर को सामान्‍य रखना आसान हो जाता है। लेकिन कुछ मामलों में इंसुलिन रेसिस्‍टेंस से निपटने के लिए पैंक्रियाज़ पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन बना पाने में असक्षम होता है। इस वजह से हाई ब्‍लड शुगर यानि हाइपरग्‍लाइसेमिया और कई सेहत संबंधित परेशानियां रहती हैं।

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस की वजह से कई बीमारियां घेर लेती हैं और इन्‍हें ही आप इसका लक्षण भी मान सकते हैं। ये बीमारियां हैं …

प्री डायबिटीज़

अगर पैंक्रियाज़ को शरीर में ग्‍लूकोज़ को संभालने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन बनाने में दिक्‍कत आ रही है तो आपका ब्‍लड शुगर लेवल हल्‍का से बढ़ सकता है और आप प्री डायबिटीज़ के शिकार हो सकते हैं। इसका मतलब है कि आपका ब्‍लड शुगर सामान्‍य से ज्‍यादा पहुंच गया है लेकिन डायबिटीज़ की बीमारी होने जितना हाई नहीं हुआ है।

आज इस समस्‍या से 84.1 मिलियन लोग ग्रस्‍त है। प्री डायबिटीज़ की बीमारी के कारण टाइप 2 डायबिटीज़ के साथ-साथ ह्रदय रोग, स्‍ट्रोक, आंखों में दिक्‍कत और किडनी रोग आदि हो सकते हैं।

Picture credit : healthfulnessguide.com

Picture credit : healthfulnessguide.com

टाइप 2 डायबिटीज़

प्री डायबिटीज़ में पैंक्रियाज़ को ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन बनाने में ज्‍यादा मेहनत करनी पड़ती है लेकिन अगर पैंक्रियाज़ जरूरत के अनुसार इंसुलिन ना बना पाए तो ये इंसुलिन रेसिस्‍टेंस प्रीडायबिटीज़ से टाइप 2 डायबिटीज़ का रूप ले सकती है।

मेटाबॉलिक सिंड्रोम

मेटाबॉलिक सिंड्रोम का संबंध भी इंसुलिन रेसिस्‍टेंस से होता है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम में ऐसे कई कारण होते हैं तो व्‍यक्‍ति को टाइप 2 डायबिटीज़ और ह्रदय रोग का शिकार बना देता है। इनके अलावा इंसुलिन रेसिस्‍टेंस का कारण हाई ब्‍लड प्रेशर, असामान्‍य कोलेस्‍ट्रॉल लेवल, हाई टाइग्‍लिसराइड और चौड़ी कमर हो सकती है।

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस के कारण

अभी तक इंसुलिन रेसिस्‍टेंस के सही कारण के बारे में पता नहीं चल पाया है लेकिन कुछ कारकों को इससे जोड़कर देखा जाता है जो इस प्रकार हैं :

  • ओबेसिटी
  • हाई कैलोरी, हाई शुगर डाइट लेना
  • शारीरिक व्‍यायाम की कमी
  • स्‍टेरॉएड का ज्‍यादा सेवन
  • गंभीर तनाव
  • पीसीओडी

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस के प्रमुख लक्षण

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में कोई सामने दिखने वाला लक्षण नज़र नहीं आता है इसलिए आपको पता नहीं चलता कि आपको इंसुलिन रेसिस्‍टेंस है। प्री डायबिटीज़ या टाइप 2 डायबिटीज़ होने तक इसके बारे में पता नहीं चल पाता है।

अगर आपका ब्‍लड शुगर लेवल ज्‍यादा है या आप प्रीडायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो आपको तेज भूख और प्‍यास लगती है और थकान महसूस होती है और आंखें कमजोर होने लगती हैं। इंसुलिन रेसिस्‍टेंस की वजह से गर्दन और बगल में गहरे दाग भी पड़न लगते हैं जिसे एकेनथोसिस निग्रिकंस कहते हैं।

इंसुलिन रेसिस्‍टेंस के बढ़ने और टाइप 2 डायबिटीज़ होने पर पैरों और हाथों में सनसनाहट महसूस होने लगती है।

क्‍या है ईलाज

अपनी लाइफस्‍टाइल में कुछ बदलाव कर आप इस परेशानी से बच सकते हैं। पर्याप्‍त नींद लेकर, रोज़ शारीरिक व्‍यायाम कर, लो कार्ब डाइट लेकर, डॉक्‍टर द्वारा बताई गई दवाओं का सेवन कर, धूम्रपान छोड़कर, स्‍ट्रेस से दूर रहकर आप इस समस्‍या को ठीक कर सकते हैं।

अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट युक्‍त चीज़ों में कुछ बदलाव करें और धूम्रपान जैसी बुरी आदतों छोड़ दें। इसकी वजह से ना केवल मधुमेह बल्कि कई तरह के रोग जैसे ह्रदय रोग, स्‍ट्रोक, नर्व डैमेज और नेत्र संबंधी समस्‍या भी हो सकती है।

अब तो आप अच्‍छी तरह से जान गए होंगें कि प्री डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ को जन्‍म देने वाली इंसुलिन रेसिस्‍टेंस क्‍या है और ये किस तरह आपको गंभीर रोग दे सकता है। अगर आपको उपरोक्‍त बताए गए लक्षणों में से कुछ दिखाई दे रहे हैं तो तुरंत अपना इंसुलिन चैक करवाएं। अगर आप भी इंसुलिन रेसिस्‍टेंस से गस्‍त हैं तो आपको जल्‍द से जल्‍द इसका ईलाज शुरु करवा लेना चाहिए वरना इसकी वजह से आप किसी गंभीर बीमारी का शिकार भी हो सकते हैं और आप तो जानते ही हैं कि अगर एक बार डायबिटीज़ की बीमारी हो गई तो आपका पूरा जीवन ही तहस-नहस हो जाएगा।

Read source

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *