लेस्बियन और बाईसेक्‍शुअल महिलाओं में ज्‍यादा रहता है टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा, वजह उड़ा देगी होश

Picture credit : dynamitenews.com

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यौन संबंधों को लेकर आपकी रूचि पर भी आपमें डायबिटीज़ का विकार होना निर्भर करता है। जी हां, एक स्‍टडी में ये बात सामने आई है कि जो महिलाएं लेस्बियन हैं या बाईसेक्‍शुअल हैं उनमें हिट्रोसेक्‍शुअल महिलाओं की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा होता है। इस स्‍टडी के परिणाम मई, 2018 में ही डायबिटीज़ केयर में प्रकाशित हुए हैं।

इससे पहले भी इस मुद्दे पर रिसर्च हो चुकी है और शोधकर्ताओं को पहले भी कुछ ऐसे ही परिणाम मिले थे।

वैसे तो किसी इंसान की सेक्‍शुअल प्रेफरेंस उसका निजी अधिकार है लेकिन इसका असर आपकी सेहत पर भी पड़ता है। इस स्‍टडी में यही सामने आया है कि जो महिलाओं पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं में दिलचस्‍पी रखते हैं उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा रहता है।

लेस्बियन और बाइसेक्‍शुअल महिलाओं में स्‍ट्रेस बनता है वजह

ऐसी महिलाओं में समाज के कारण तनाव का स्‍तर बहुत ज्‍यादा होता है और यही टाइप 2 डायबिटीज़ होने का मुख्‍य कारण है। ऐसी महिलाओं में सामान्‍य तनाव की जगह माइनॉरिटी स्‍ट्रेस होता है।

जैसे कि इन्‍हें भेदभाव और अपनी पसंद को लेकर कई तरह के दबाव और परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। इस वजह से इनमें स्‍ट्रेस का होना सामान्‍य बात है लेकिन इस वजह से ये कई बीमारियों का शिकार बन सकती हैं जिनमें टाइप 2 डायबिटीज़ भी शामिल है।

शोधकर्ताओं की मानें तो डायबिटीज़ के बढ़ते खतरे के कई कारण हो सकते हैं जिनमें गरीबी और पर्याप्‍त हैल्‍थकेयर सुविधाओं की कमी शामिल है। हालांकि, माइनॉरिटी स्‍ट्रेस और डायबिटीज़ के लेस्बियन और बाईसेक्‍शुअल महिलाओं में खतरे को लेकर अभी और अध्‍ययन किया जाना बाकी है। हाल ही में हुई स्‍टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि बॉडी वेट को मापने के लिए प्रयोग होने वाला बीएमआई आपकी सेक्‍शुअल पसंद और रिलेशनशिप संबंधित रोगों में अहम भूमिका निभाता है।

सेक्‍शुएलिटी और डायबिटीज़ के बीच कैसे पता चला संबंध

Picture credit : hindustantimes.com

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स्‍टडी में 94,000 महिलाओं पर रिसर्च की गई। 1989 में हुई इस स्‍टडी में सभी महिलाओं की उम्र 24 से 44 साल के बीच थी। 2013 तक हर साल इन महिलाओं से टाइप 2 डायबिटीज़ की का चैकअप करवाने और रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। इनमें से 1267 महिलाओं ने खुद को लेस्बियन और बाईसेक्‍शुअल बताया जबकि 92,983 महिलाओं ने खुद को हिट्रोसेक्‍शुअल पाया।

इसके परिणाम में खुलासा हुआ कि 27 प्रतिशत लेस्‍बियन और बाईसेक्‍शुअल महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा था और ये आकंडा हिट्रोसेक्‍शुअल महिलाओं की तुलना में काफी ज्‍यादा था। वहीं ले‍स्बियन, बाईसेक्‍शुअल और हिट्रोसेक्‍शुअल महिलाओं में जवानी में ये खतरा ज्‍यादा पाया गया। इसमें शोधकर्ताओं ने बीएमआई को प्रमुख कारक माना।

शोधकर्ताओं ने पाया कि लेस्बियन और बाईसेक्‍शुअल महिलाओं में ओबेसिटी और ओबेसिटी से संबंधित स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का खतरा भी बहुत ज्‍यादा था लेकिन इस सबमें एक अहम बात जो सामने आई है वो ये है कि बाईसेक्‍शुअल और लेस्बियन महिलाओं में बीमारियों का खतरा बढ़ाने में सोसायटी सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार है।

ये स्‍टडी इस बात पर गौर नहीं करती है कि लेस्बियन और बाईसेक्‍शुअल महिलाओं में रोगों का खतरा ज्‍यादा है बल्कि इसमें इस बात पर गौर दिया गया है कि ऐसी महिलाओं में बढ़ते रोगों का कारण समाज में पैदा हुआ भेदभाव है। अगर उसे दूर कर दिया जाए तो लेस्बियन महिलाएं भी हिट्रोसेक्‍शुअल की तरह स्‍वस्‍थ रह सकती हैं।

अगर आप इस तरह की बीमारियों से बचना चाहती हैं तो स्‍ट्रेस को कम करें और अपनी लाइफ में खुश रहें।

महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज़ के लक्षण भी कुछ अलग होते हैं और हर महिला को इसके बारे में पता होना चाहिए। अगर आपको पहले से ही जानकारी होगी तो इन लक्षणों के सामने आने पर आप तुरंत ईलाज शुरु करवा सकती हैं।

तो चलिए जानते हैं महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज़ के लक्षणों के बारे में..

Picture credit : boldsky.com

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महिलाओं में मधुमेह की बीमारी धीरे से बढ़ती है और इसके लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते हैं। जो महिलाएं अस्‍वस्‍थ जीवनशैली जीती हैं उनमें मधुमेह का खतरा ज्‍यादा रहता है। डायबिटीज़ के बढ़ने पर ह्रदय रोग, किडनी रोग और स्‍ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं अधिक उम्र की महिलाओं में कोरोनरी ह्रदय रोग, हाइपरग्‍लाइसेमिया और हाइपोग्‍लाइसेमिया और आंखों से संबंधित रोग का खतरा भी बना रहता है। इसकी वजह से महिलाओं का गर्भपात या शिशु में कोई विकार भी हो सकता है।

महिलाओं में मधुमेह की बीमारी में कुछ अलग तरह के लक्षण सामने आते हैं। जिस तरह के लक्षण मधुमेह की बीमारी में पुरुषों में दिखाई देते हैं, महिलाओं में उससे कुछ अलग लक्षण सामने आते हैं।

मधुमेह की बीमारी में महिलाओं में जो लक्षण सामने आते हैं उनमें वजाईना में यीस्‍ट इंफेक्‍शन और मूत्र मार्ग में संक्रमण शामिल है। डायबिटीज़ के कुछ सामान्‍य लक्षण इस प्रकार हैं -:

  • मुंह में सूखापन और प्‍यास ज्‍यादा लगना
  • रात में बार-बार मूत्र आना
  • भूख बढ़ जाना
  • आंखों में कमज़ोरी
  • शुष्‍क त्‍वचा और खुजली की समस्‍या
  • त्‍वचा का रंग काला पड़ना
  • वजन में कमी आना
  • घाव का देरी से भरना या जल्‍दी-जल्‍दी संक्रमण होना
  • कमज़ोर या थकान महसूस करना
  • हाथ और पैर में सनसनाहट महसूस होना

इन लक्षणों के अलावा महिलाओं को मधुमेह की बीमारी में कुछ इस तरह की समस्‍याओं से भी रूबरू होना पड़ता है :-

  • मूत्र मार्ग में संक्रमण
  • त्‍वचा संक्रमण
  • वजाईना में इंफेक्‍शन
  • संभोग के दौरान दर्द या असहज महसूस होना
  • ऑर्गेज्‍म पाने में असफल रहना
  • मनोवैज्ञानिक लक्षण (जैसे चिड़चिड़ापन, बहुत ज्‍यादा आलस आना, व्‍याकुल रहना)
  • जिन महिलाओं कोगर्भावधि डायबिटीज़ होती है उनमें उपरोक्‍त बताए गए लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। गर्भावधि डायबिटीज़ में ब्‍लड शुगर टेस्‍ट के ज़रिए इसका पता लगाया जा सकता है। इस बीमारी में महिलाओं को फाइबरयुक्‍त चीज़ों का सेवन करना चाहिए।
  • पिछले कुछ सालों में डायबिटीज़ से ग्रसित लोगों की संख्‍या में भारी इज़ाफा हुआ है और इससे भी ज्‍यादा वृद्धि इस बीमारी से होने वाली मृत्‍यु में हुआ है। महिलाओं में अकसर ये बीमारी 40 की उम्र के बाद होती है लेकिन कई बार ये पहले भी हो सकती है। ये बीमारी बस आपकी जीवनशैली पर निर्भर करती है।

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