जानिए कितनी रेड मीट खा सकते हैं टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़

Picture credit : express.co.uk

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डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपनी डाइट का बहुत ख्‍याल रखना पड़ता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि आप अपनी पसंद की चीज़ों को ही छोड़ दें। आपको बस बेहतर चीज़ों को चुनना है। अगर आपको मीट यानि मांस खाना पसंद है तो आपको पता होना चाहिए कि आपको कैसे क्‍वालिटी रेड मीट चुनना है और प्रोसेस्‍ट टाइप वाली मीट जैसे कोल्‍ड कट्स आदि से बचना है।

अगर आपको डायबिटीज़ नहीं है तो आपको रेड मीट या प्रोसेस्‍ड मीट खाने से फायदा होता है क्‍योंकि दिल की सेहत के लिए इसे बेहत विकल्‍प माना जाता है। वहीं अगर आपको मधुमेह की बीमारी है तो प्रोसेस्‍ड मीट में आने वाले फैट और नमक से आपको इस बीमारी को कंट्रोल करने में दिक्‍कत आ सकती है। वहीं दूसरी ओर डायबिटीज़ डाइट में प्रोटीन, सही मात्रा में लीन रेड मीट होना चाहिए लेकिन सीमित मात्रा में।

डायबिटीज़ और रेड मीट के बारे में

जापान में शोधकर्ताओं ने 45 से 75 साल की उम्र के 27,425 पुरुषों और 36,424 महिलाओं की खानपान की आदतों और डायबिटीज़ के खतरों पर अध्‍ययन किया। शोधकर्ताओं को  महिलाओं से ज्‍यादा पुरुषों में रेड मीट और प्रोसेस्‍ड मीट के सेवन से मधुमेह के संबंध का पता चला। जितनी ज्‍यादा पुरुषों ने ऐसी मीट का सेवन किया उनमें उतना ही ज्‍यादा टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा पाया गया। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्‍लीनिकल न्‍यूट्रिशन की एक स्‍टडी में भी कुछ ऐसे ही परिणाम आए थे।

इसका मतलब है कि रेड मीट और प्रोसेस्‍ड मीट से ह्रदय रोगों और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है। खासतौर पर प्रोसेस्‍ड मीट में सोडियम और एडिटिव्‍स की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है जोकि सेहत को बहुत नुकसान देते हैं।

डायबिटीक डाइट में रेड मीट की जगह

ऐसी कोई सीमा नहीं है कि डायबिटीज़ और प्री डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए कितनी मात्रा में रेड मीट खाना सुरक्षित रहता है। सेहत विशेषज्ञों की मानें तो जितना हो सके डायबिटीज़ के मरीज़ों को रेड मीट का सेवन कम करना चाहिए और इसकी जगह व्‍हाइट मीट जैसे चिकन, पोल्‍ट्री, मछली या अन्‍य सीफूड खा सकते हैं।

हैल्‍दी डायबिटीज़ डाइट में रेड मीट को शामिल करने के लिए आपको थोड़ा प्‍लान करके चलना पड़ेगा। इसके तहत आपको कभी-कभी कम मात्रा में ही रेड मीट का सेवन करना है। डायबिटीज़ रोगी एक सप्‍ताह में 18 आउंस से ज्‍यादा पकी हुई रेड मीट नहीं खा सकते हैं।

अगर आप सीमित मात्रा में रेड मीट खाते हैं तो लंबे समय तक इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। मीट से ब्‍लड शुगर नहीं बढ़ता है लेकिन इसका ज्‍यादा सेवन करने से कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है जोकि वजन बढ़ने का कारण बनता है और सभी जानते हैं कि मोटापे में डायबिटीज़ को कंट्रोल करना और मुश्किल हो जाता है।

रेड मीट : क्‍या चुनें

डायबिटीज़ डाइट में प्रोटीन के स्रोतों को संतुलित करना भी अहम होता है। ऐसा नहीं है कि आप बिलकुल भी रेड मीट नहीं खा सकते हैं बल्कि इसकी जगह अगर आप रेड मीट खाते हैं तो अपनी डाइट में सैचुरेटेड फैट की मात्रा को कम कर दें।

जिस रेड मीट के नाम में राउंड और लोएन आता है वो फायदेमंद होती है क्‍योंकि इनमें फैट सबसे कम होता है। अगर आप ग्राउंड बीफ खाना चाहते हैं तो इसका लेबल चैक करें, इस पर 95 प्रतिशत लीन होता है। साथ ही बीफ में कोई अन्‍य फैट भी शामिल ना करें।

अगर आपका बजट हो तो आप ग्रास फेड बीफ भी खा सकते हैं। ऐसी मीट में हैल्‍दी फैट होता है और इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड भी होता है।

सैंडविच बनाने के लिए प्रोसेस्‍ड मीट की जगह घर पर बने मीट का प्रयोग करें या फिर दुकान से ताजा मीट लेकर आएं। मीट की पतली स्‍लाइस काटकर ताजी सलाद के साथ इसे सैंडविच में लगाकर खाएं।

Picture credit : careguru.in

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रेड मीट क्‍या है

रेड मीट में वील, पोर्क, मटन, गोट, लैंब और बीफ होता है। पशुओं से मिलने वाली मीट को ही रेड मीट कहा जाता है। इसमें मछली और मुर्गी से मिलने वाले व्‍हाइट मीट के मुकाबले माइओग्‍लोबिन बहुत ज्‍यादा मात्रा में होता है। पोल्‍ट्री को व्‍हाइट मीट कहा जाता है जबकि गूज़ और डक को रेड मीट।

आपको जानकर हैरानी होगी कि सूअर के मांस यानि पोर्क को भी रेड मीट की लिस्‍ट में शामिल किया गया है। वैसे तो पोर्क व्‍हाइट मीट होता है लेकिन इसमें माइओग्‍लोबिन की मात्रा 0.10 प्रतिशत से 0.30 प्रतिशत तक होता है जिस वजह से इसे रेड मीट कहा जाता है।

पोषण नहीं होता है रेड मीट में ?

ऐसा नहीं है रेड मीट से शरीर को कोई न्‍यूट्रिशन नहीं मिलता है। रेड मीट में आयरन, जिंक, फास्‍फोरस, क्रिएटिन, विटामिन बी 12, राइबोफ्लेविन, नियासिन और थिआमिन प्रचुर मात्रा में होता है। ये सभी पोषक तत्‍व रेड मीट में पाए जाते हैं लेकिन इसके बावजूद रेड मीट का सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए। इसकी जगह सीफूड या अन्‍य हाई प्रोटीन फूड खाए जा सकते हैं।

प्रोसेस्‍ड मीट

एक स्‍टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि अनप्रोसेस्‍ड मीट से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा 19 प्रतिशत ज्‍यादा रहता है। पोर्क, लैंब और बीफ से मिलने वाली मीट को अनप्रोसेस्‍ड मीट कहा गया है जिनमें नमक, स्‍मोकिंग या किसी भी तरह के केमिकल का प्रयोग प्रिजर्व रखने के लिए नहीं किया जाता है।

वहीं प्रोसेस्‍ड मीट में सलामी, हॉट डॉग, सॉसेज और कई तरह के लंच मीट शामिल हैं। प्रोसेस्‍ड मीट का सेवन करने से ना केवल टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है बल्कि ये कई अन्‍य रोगों को भी जन्‍म दे सकता है। रेड मीट खाने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा तो बढ़ता ही साथ में ये कई अन्‍य घातक रोगों जैसे कैंसर, ह्रदय रोग आदि का भी कारण बनता है।

अगर आपको अपनी डाइट में रेड मीट का सेवन कम करने में दिक्‍कत आ रही है तो आपको सप्‍ताह में एक बार ‘मीट फ्री’ दिन रखना चाहिए। 15 प्रतिशत रेड मीट का सेवन कम करने से भी सेहत को बहुत फायदा होगा।

अन्‍य चीज़ों से प्रोटीन लेने की कोशिश करें। बादाम और दालों में बहुत प्रोटीन होता है। आप रेड मीट की जगह इनसे प्रोटीन ले सकते हैं। खाने में मीट की जगह सब्जियां और बींस को शामिल करें।

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