जानिए टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को कितनी पीनी चाहिए ग्रीन टी  

Picture credit : naturoveda.com

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हम सभी जानते हैं कि शरीर के लिए ग्रीन टी कितनी फायदेमंद होती है। ये दिल की सेहत, संक्रमण से लड़ने और मस्तिष्‍क को दुरुस्‍त करने का काम करती है लेकिन क्‍या टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ ग्रीन टी का सेवन कर सकते हैं ?

डायबिटीज़ में क्‍यों चुनने चाहिए गुड ड्रिंक्‍स

टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी में शरीर की कोशिकाएं सही तरीके से ब्‍लड शुगर को अवशोषित नहीं कर पाती है जोकि शरीर को ऊर्जा देने का प्रमुख स्रोत होता है। इस वजह से इंसुलिन रेसिस्‍टेंस होने लगता है। इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का लेवल बढ़ जाता है जिसे हाइपरग्‍लाइसेमिया कहते हैं। इस वजह से मधुमेह मरीज़ों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। इसमें ह्रदय रोग, किडनी फेल होना और नर्व के डैमेज होने का खतरा रहता है।

आप जो भी पीते और खाते हैं उसका असर ब्‍लड शुगर पर पड़ ता है। आमतौर पर लोग स्‍पोर्ट्स ड्रिंक्‍स, सोडा और फ्रूट जूस पीते हैं जिनमें खूब शुगर होता है और ये ओबेसिटी और मधुमेह का कारण बनते हैं। जबकि ग्रीन टी का सेवन करने से ब्‍लड शुगर लेवल संतुलित रहता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों को ग्रीन टी के फायदे

ग्रीन टी से वजन कम किया जा सकता है और ये टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर को भी नियंत्रित रखती है। कई रिसर्च में ये बात साबित भी हो चुकी है। ग्रीन टी के फायदे इसकी वैरायटी पर भी निर्भर करते हैं। एक ग्रीन टी बैग में 0 कैलोरी होती है। इसका मतलब है कि ये शुगरयुक्‍त और सोडा एवं एनर्जी ड्रिंक्‍स का बेहतरीन विकल्‍प है।

वजन कम करने के दौरान इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी बढ़ाना होता है और इससे ब्‍लड शुगर लेवल कम होता है। एक स्‍टडी मे टाइप 2 डायबिटीज़ के 63 लोगों को ग्रीन की अलग-अलग डोज़ दी गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि रेाज़ 4 कप ग्रीन टी पीने से वजन कम हुआ और ब्‍लड प्रेशर में भी कमी आई।

शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्रीन टी में कैटेचिन होता है जोकि पाचन को कम कर कार्बोहाइड्रेट्स का अवशोषण बढ़ाकर इंसुलिन की संवेदनशीलता को कम कर देता है।

वहीं अन्‍य स्‍टडी की मानें तो रोज़ ग्रीन टी पीने से प्रतिभागियों के इंसुलिन रेसिस्‍टेंस पर सकारात्‍मक असर देखा गया। इन प्रतिभागियों को चार सप्‍ताह तक रोज़ ग्रीन टी पीने के लिए कहा गया था। इससे इनमें इंसुलिन की संवेदनशीलता घटी और एचडीएल यानि गुड कोलेस्‍ट्रॉल लेवल में सुधार आया। 5 आंउस पानी में 3 ग्राम ग्रीन टी डालकर पीने से रोज़ कई कप ग्रीन टी पीने जितना ही फायदा होता है। ग्रीन टी अकेले ब्‍लड शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्रोल नहीं कर सकती है। संतुलित आहार जिसमें शुगर की मात्रा कम हो और सिंपल कार्बोहाइड्रेट हो और सैचुरेटेड फैट हो उसकी भी जरूरत पड़ती है। साथ ही रोज़ अपने ब्‍लड शुगर लेवल को भी चैक करें।

मधुमेह रोगी कितनी ग्रीन टी पी सकते हैं

Picture credit : nutraingredients-asia.com

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शोधकर्ताओं का कहना है कि ग्रीन टी को पीने से कोई नकारात्‍मक असर नहीं पड़ता है लेकिन आपको इसमें शुगर नहीं मिलानी है। डायबिटीज़ के मरीज़ों को ग्रीन टी के फायदे पाने के लिए इसमें चीनी नहीं मिलानी चाहिए। बिना चीनी के ग्रीन टी पीएं या फिर इसकी जगह स्‍टेविआ का प्रयोग करें।

स्‍टेविआ शुगर का विकल्‍प है जोकि स्‍टेविआ पौधे से मिलती है। इसमें 1 से भी कम कैलोरी और ना के बराबर कार्ब होता है इसलिए ये मधुमेह रोगियों के लिए चीनी का बेहतरीन विकल्‍प माना जाता है। एक स्‍टडी में पाया गया है कि डायबिटीज़ के मरीज़ लो कैलोरी स्‍वीटनर जैसे एस्‍पारटेम या सूक्रोज़ का सेवन करते हैं जबकि खाने के बाद स्‍टेविआ लेने से ब्‍लड शुगर और इंसुलिन लेवल में गिरावट आती है।

अगर आपको बिना चीनी के ग्रीन टी बहुत ज्‍यादा कड़वी लगती है तो आप इसमें शहद, ब्राउन शुगर डाल सकते हैं या फिर स्‍टेविआ जैसे स्‍वीटनर भी काम आ सकते हैं।

ग्रीन टी पीते समय कैफीन का भी ध्‍यान रखना होता है जोकि ब्‍लड शुगर और रक्‍तचाप को प्रभावित करता है। टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ह्रदय रोग के कारण मरने का खतरा सामान्‍य लोगों की तुलना में 2 से 4 गुना ज्‍यादा होता है।

अगर आप अपने शरीर पर कैफीन के असर को देखना चाहते हैं तो ग्रीन टी पीने से पहले अपना ब्‍लड शुगर चैक करें और पीने के 1 से 2 घंटे बाद फिर चैक करें। अगर पहले और बाद में आपका ब्‍लड शुगर लेवल संतुलित रहा है तो आप कैफीन का सेवन कर सकते हैं। ब्‍लडप्रेशर को मापने के लिए होम ब्‍लडप्रेशर का इस्‍तेमाल करें।

अच्‍छी बात ये है कि कॉफी और ब्‍लैक टी की तुलना में ग्रीन टी में कैफीन कम होता है। मायो क्‍लीनिक के अनुसार 8 आउंस ग्रीन टी में 25 से 29 मिलीग्राम कैफीन होता है जबकि इतनी ही मात्रा की कॉफी में 95 से 165 मिलीग्राम और ब्‍लैक टी में 25 से 48 मिलीग्राम कैफीन होता है।

लेकिन अगर आपकी बॉडी कैफीन को लेकर संवेदनशील है तो आपको दिक्‍कत हो सकती है। हर चीज़ का हर इंसान पर अलग-अलग असर होता है।

टाइप 2 डायबिटीज़ को कैसे मैनेज करे ग्रीन टी

ग्रीन, उलोंग और ब्‍लैक टी में इनको प्रोसेस्‍ड करने का तरीका अलग होता है। ग्रीन टी ताजी पत्तियों से बनती है जिसमें उसे ताजी रखने के लिए स्‍टीम किया जाता है। इसमें टी का हरा रंग और एंटीऑक्‍सीडेंट यौगिक सुरक्षित रहते हैं। उलोंग थोड़ी सी खमीरीकृत होती है जबकि ब्‍लैक टी पूरी तरह से खमीरीकृत होती है।

ब्‍लैक टी और उलोंग टी का स्‍वाद थोड़ा हल्‍का होता है इसलिए कुछ लोग इसे पीना ज्‍यादा प्रेफर करते हैं। ग्रीन टी की तरह उलोंग और ब्‍लैक टी में एक जैसे एंटीऑक्‍सीडेंट नहीं होते हैं और इसमें कैफीन भी ज्‍यादा होता है लेकिन फिर भी ये इतनी बुरी भी नहीं होती है।

अगर आप कैफीन को लेकर सेंसिटिव हैं तो आप हर्बल टी पी सकते हैं। इसमें बिलकुल भी कैफीन नहीं होता और कई फ्लेवर भी मिलते हैं। स्‍वाद और सेहत के लिए टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ दालचीनी की चाय भी पी सकते हैं। इसमें कई एंटीऑक्‍सीडेंट मौजूद रहते हैं। दालचीनी टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने में बहुत मददगार साबित होती है।

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