डायबिटीज़ के मरीज़ इस यम्‍मी फूड को खाकर घटा सकते हैं अपना ब्‍लड शुगर

Picture credit : blog.biotopic.si

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बचपन में मधुमेह की बीमारी हो जाए तो उसे टाइप 1 डायबिटीज़ कहते हैं जबकि उम्र के एक पड़ाव के बाद होने वाली मधुमेह की बीमारी को टाइप 2 डायबिटीज़ कहा जाता है। इस बीमारी का कारण इंसुलिन हार्मोन होता है। इसमें शरीर के अंदर रक्‍त में शुगर से ग्‍लूकोज़ बनाने में दिक्‍कत आती है।

आपको हम पहले भी बता चुके हैं कि जीवनशैली और डाइट में बदलाव कर ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित कर सकते हैं। ऐसा करके आप अपनी बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी में मरीज़ का वजन बढ़ने लगता है और उसका रक्‍तचाप भी बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है। अब डायबिटीज़ यूके ने बताया है कि नाश्‍ते में कुछ खास फूड्स को शामिल करने से दिन की बेहतर शुरुआत की जा सकती है। इससे दिन की शुरुआत में ब्‍लड शुगर लेवल को भी लो रखने में मदद मिलती है।

नेशनल चैरिटी का कहना है कि सुबह नाश्‍ते में अनाज की जगह दलिया ओट्स का सेवन करना ज्‍यादा फायदेमंद रहता है। ग्रैनोला और सीरियल क्‍लस्‍टर्स जैसे अनाजों की पैकेजिंग देखकर ये हैल्‍दी लगते हैं लेकिन इनमें शुगर और फैट बहुत ज्‍यादा होता है जोकि डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए खतरनाक हो सकता है।

दलिया ओट्स है फायदेमंद

दलिया ओट्स और इसकी इंस्‍टेंट वैरायटी दोनों ही सेहत के लिए बेहतर होती हैं। इसके अलावा शहद, शुगर, गोल्‍डन सिरप और कोकोआ पाउडर वाले दलिया ओट्स ना खाएं। दलिये में घुलनशील फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है जोकि पाचन को दुरुस्‍त करता है। ये शरीर में जाकर धीरे से टूटता है जिससे ब्‍लड शुगर नहीं बढ़ता है।

दलिये के अलावा डायबिटीज़ यूके ने योगर्ट को भी मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद बताया है। अनाज की योगर्ट का सेवन करना स्‍वाद और सेहत दोनों देता है लेकिन कई लो फैट योगर्ट में शुगर बहुत ज्‍यादा होती है इसलिए आपको फ्लेवर्ड योगर्ट से दूर ही रहना है।

आप लो फैट प्‍लेन, ग्रीक नैचुरल योगर्ट या फोरेज फ्रेल खा सकते हैं। इसमें ताजा फल या कुछ नट्स भी मिला सकते हैं।

सुबह के समय ब्‍लड शुगर सबसे ज्‍यादा बढ़ा हुआ होता है इसलिए इस समय डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपने नाश्‍ते का सबसे ज्‍यादा ध्‍यान रखना चाहिए। अगर इस समय आप अपने लिए सही नाश्‍ता चुनते हैं तो आप अपने शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल कर सकते हैं।

एक रिसर्च में ये बात  भी सामने आई है कि डाइट में बदलाव कर मधुमेह मरीज़ों की हालत को भी सुधारा जा सकता है।

इस रिसर्च के अनुसार अगर आप दस सालों से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो आप अपनी डाइट और जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इस बीमारी से पूरी तरह से छुटकारा पा सकते हैं। वर्तमान समयम में टाइप 2 डायबिटीज़ को ठीक करने के लिए वेट लॉस थेरेपी की मदद भी ली जा सकती है।

Picture credit : thekitchn.com

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मधुमेह में ओटमील खाने के फायदे

  • अपने आहार में ओटमील यानि दलिया ओट्स को शामिल करने पर आपको कई तरह के फायदे मिल सकते हैं जिनमें ये सब शामिल हैं –
  • इसमें फाइबर ज्‍यादा और ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स कम होता है जिस वजह से से ब्‍लड शुगर को नियंत्रित रखता है।
  • ये ह्रदय की सेहत के लिए बेहतर होता है और कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
  • नाश्‍ते में ओटमील खाने से इंसुलिन इंजेक्‍शन की जरूरत को भी कम किया जा सकता है।
  • ये पकाने में भी बहुत आसान होता है।
  • जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि इसमें फाइबर बहुत ज्‍यादा होता है इसलिए इसे खाने पर पेट भरा हुआ महसूस करता है और साथ ही ये वजन को भी नियंत्रित रखता है।
  • ये लंबे समय तक शरीर में एनर्जी को बनाए रखता है।
  • ये पाचन को दुरुस्‍त करता है।
  • ऐसे पकाया गया ओटमील देता है नुकसान
  • मधुमेह में ओटमील खाने से इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन तभी जब इसे ठीक तरह से पकाया जा सके।

डायबिटीज़ डाइट में ओटमील को शामिल करने पर आपको कई बातों का ध्‍यान रखना पड़ता है वरना आप इसके फायदों को नहीं ले पाते हैं।

क्‍या करें :

Picture credit : tasteofhome.com

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  • आप इसे बनाते समय इसमें दालचीनी, नट्स और बैरीज़ डाल सकते हैं।
  • आइरिश या स्‍टील कट ओट्स का इस्‍तेमाल करें।
  • लो फैट दूध या पानी का इस्‍तेमाल करें। इसके अलावा ओटमील को सेहत के लिए और भी ज्‍यादा फायदेमंद बनाने के लिए कुछ बातों का ध्‍यान रखना चाहिए। चलिए जानते हैं कि ओटमील के ज्‍यादा से ज्‍यादा फायदे पाने के लिए क्‍या करना चाहिए :
  • इसे प्रोटीन या हैल्‍दी फैट जैसे अंडे, नट्स या ग्रीक योगर्ट के साथ खाएं। इसमें एक-दो चम्‍मच पेकंस, अखरोट या बादाम भी डाल सकते हैं जिससे इसमें प्रोटीन और हैल्‍दी फैट बढ़ जाए और ये ब्‍लड शुगर को कंट्रोल कर सके।
  • आइरिश और स्‍टील कट ओट्स में घुलनशील फाइबर बहुत ज्‍यादा होता है जोकि ब्‍लड शुगर को नियंत्रित रखता है।
  • दालचीनी का इस्‍तेमाल करें। दालचीनी में एंटीऑक्‍सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं जिनमें एंटी इंफ्लामेट्री यौगिक मौजूद रहते हैं जोकि ह्रदय रोगों का खतरा कम करता है। साथ ही ये इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी ठीक करता है और ब्‍लड शुगर के लेवल को कम करने में मदद करता है।
  • बैरीज़ भी शामिल करें। बैरीज़ में भी एंटीऑक्‍सीडेंट और न्‍यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं जोकि नैचुरल स्‍वीटनर की तरह काम करते हैं।
  • लो फैट मिल्‍क और पानी का इस्‍तेमाल करें। लो फैट मिल्‍क से खाने में फैट बढ़ाए बिना ही न्‍यूट्रिएंट्स की मात्रा बढ़ाई जा सकती ह। अगर आप फैट की मात्रा को कम करना चाहते हैं तो हाई फैट मिल्‍क या क्रीम की जगह पानी का इस्‍तेमाल करें। हालांकि, दूध के इस्‍तेमाल में इस बात का ध्‍यान रखें कि खाने में आपकी कार्ब की मात्रा भी नियंत्रित हो। आठ आउंस रेगुलर मिल्‍क में लगभग 12 ग्राम कार्ब होता है।

कई लोग सुबह जल्‍दबाजी में नाश्‍ता ही नहीं करते हैं लेकिन आपको बता दें कि पूरे दिन के आहार में नाश्‍ता सबसे ज्‍यादा जरूरी होता है और अगर आपको डायबिटीज़ जैसी बीमारी है तो आप अपने खाने को नज़रअंदाज़ कर ही नहीं सकते हैं।

डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपने नाश्‍ते में ओटमील या दलिया ओट्स शामिल करना चाहिए। ये उनके लिए बहुत फायदेमंद होता है।

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