रमदान के महीने में डायबिटीज़ के मरीज़ ऐसे रख सकते हैं रोजा

Picture credit : boldsky.com

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रमदान के महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोज़ा रखते हैं लेकिन लोगों की इस बात को लेकर संशय रहता है कि डायबिटीज़ के मरीज़ों को रमदान के महीने में रोज़ा रखना चाहिए या नहीं। रमदान के महीने में सूर्योदय से पहले और सूर्यास्‍त के बाद ही खा सकते हैं और इसी वजह से रमदान के रोज़ डायबिटीज़ के मरीजों के लिए मुश्किल होते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि अगर आप दिनभर में ब्‍लड शुगर को कंट्रोल रखने के लिए अपने मील प्‍लान का खास ध्‍यान रखें तो आप रोज़ा रख सकते हैं। फ्राइड समोसा और‍ चिली बाइट्स को देखकर हर किसी के मुंह में पानी आ जाता है लेकिन डायबिटीज़ के मरीज़ों को ये सब खाने से पहले दस बार सोचना पड़ता है।

सूर्योदय से पहले के खाने को रमदान में सुहुर और सूर्यास्‍त के बाद के खाने को इफ्तार कहते हैं। आपको अपने इन आहारों में पोषक चीज़ों को शामिल करना चाहिए जिससे आपका ब्‍लड शुगर कंट्रोल में रहे।

ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए इन बातों का रखें ध्‍यान :

सुहुर

बचा हुआ या बासी खाना ना खाएं।

अपने खाने में हमेशा फाइबरयुक्‍त, डेयरी और प्रोटीन युक्‍त चीज़ों को शामिल करें जिससे दिनभर आप एनर्जी से भरे रह सकें।

इफ्तार

रोज़ा तोड़ते समय 2-3 खजूर खाएं और भोजन करने से पहले एक कटोरी योगर्ट खाएं।

मीठा कम खाएं।

इफ्तार में डायबिटीज़ के मरीजों को हैल्‍दी और न्‍यूट्रिएंट्स से भरपूर खाद्यों का सेवन करना चाहिए।

पानी कितना पीएं

रोज़ सुबह और शाम 4 से 8 गिलास पानी जरूर पीएं।

सॉफ्ट ड्रिंक्‍स की जगह हैल्‍दी ड्रिंक्‍स का सेवन करें।

मुख्‍य आहार

  • एक कटोरी सूप से शुरुआत करें। इसमें न्‍यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं और ये आपको ओवरईटिंग से भी बचाता है।
  • होलग्रेन फाइबर, कार्बोहाइड्रेटस जैसे ब्राउन राइस, क्‍यूनोआ और ज्‍वार खाएं। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स से दूर रहें।
  • एक स्‍टार्चयुक्‍त आहार लें जैसे कि गेहूं की रोटी, फ्राइड रोटी या चावल
  • सप्‍ताह में सिर्फ एक या दो बार ही मांस का सेवन करें।
  • सभी तरह के फैटी और प्रोसेस्‍ड फूड्स जैसे सॉसेज और हॉट चिप्‍स से दूर रहें।
  • ओमेगा 3 युक्‍त आहार जैसे ताजा मछली – सारदिंस, हेक, पिल्‍चर्ड खाएं।
  • ताजी सब्जियां और दालें सप्‍ताह में एक या दो बार जरूर खाएं। बींस को अपनी डाइट में शामिल करने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप उसे सूप में डालकर पीएं।
  • फुल क्रीम डेयरी प्रॉडक्‍ट्स की जगह लो फैट उत्‍पादों का सेवन करें।
  • सैचुरेटेड फैट जैसे मक्‍खन, घी, नारियल तेल की जगह ऑलिव ऑयल या कैनोला ऑयल का इस्‍तेमाल करें।
  • मिठाई का क्‍या करें
  • मसाला चाय के साथ डाइजेस्टिव बिस्‍किट खाएं। दो से ज्‍यादा बिस्‍किट ना खाएं।
  • ताजी सलाद भी खा सकते हैं।
  • सूर्योदय और सूर्यास्‍त के बाद ज्‍यादा खाना या ओवरईटिंग आपके ब्‍लड शुगर को बढ़ा सकता है इसलिए ऐसा करने से बचें।
  • क्‍या डायबिटीज़ मरीज़ों के लिए रोज़ा रखना खतरनाक है
  • अगर आप ब्‍लड ग्‍लूकोज़ की दवाएं ले रहे हैं तो अपने डॉक्‍टर से जरूर सलाह लें और उनसे पूछें कि क्‍या आप रोज़ा रख सकते हैं और अपने ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को लो या हाई होने से बचाने के लिए आपको किन बातों का ध्‍यान रखना है।
  • दिन में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ की दवा लेते हैं तो आपमें लो ब्‍लड ग्‍लूकोज़ यानि हाइपोग्‍लाइसेमिया का खतरा रहता है। वहीं रात के समय जब रोज़ा तोड़ा जाता है तब शरीर को सामन्‍य तौर पर ज्‍यादा भोजन की जरूरत होती है और इस वजह से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल रात के समय बढ़ जाता है।

इन बातों का रखें ध्‍यान

  1. टाइप 1 डायबिटीज़ के मरीज़ों को रमदान में इंसुलिन लेना नहीं छोड़ना चाहिए क्‍योंकि इसकी वजह से उनमें डायबिटीक कीटोएसिडोसिस का खतरा रहता है।
  2. टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट लेना फायदेमंद रहेगा क्‍योंकि इससे एनर्जी भरी रहती है लेकिन कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन ब्‍लड शुगर लेवल के लिए अच्‍छा रहता है।
  3. अगर खाने के दौरान आपका ब्‍लड शुगर लेवल लगातार बढ़ता रहता है तो आपको रमदान में रोज़े नहीं रखने चाहिए।
  4. प्रोटीन एनर्जी को बेहतरीन स्रोत है और ये शरीर में कार्बोहाइड्रेट से धीरे अवशोषित होता है।
  5. रमदान में इस तरह रखें ब्‍लड शुगर कंट्रोल
  6. रमदान में सामान्‍य से ज्‍यादा बार अपना ब्‍लड शुगर लेवल चैक करें।
  7. हाई और लो ब्‍लड शुगर के लक्षणों के बारे में जान लें।
  8. हाई या लो शुगर की अवस्‍था में अपने टेस्टिंग किट तैयार रखें।
  9. अगर आप ब्‍लड ग्‍लूकोज़ की दवा ले रहे हैं तो शुगर की ऐसी चीज़ों को तैयार रखें तो जल्‍दी से अवशोषित हो जाती हैं।

अगर आप भी रमदान में रोज़ा रखने की सोच रहे हैं या आपने रोज़ा रख लिया है तो इन बातों का खास ध्‍यान रखना वरना आपका ब्‍लड शुगर लेवल बिगड़ सकता है जो आपके लिए जानलेवा तक साबित हो सकता है।

आम लोगों की तरह डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए कुछ भी सामान्‍य नहीं होता है। अगर आपको मधुमेह है तो आपको व्रत के दौरान बहुत सावधानी बरतनी चाहिए वरना आपकी सेहत बिगड़ सकती है और डायबिटीज़ के मरीज़ों में एमेरजेंसी की नौबत आने में भी देर नहीं लगती है इसलिए जितना हो सके किसी भी तरह की लापरवाही ना बरतें वरना भुगतान आपको ही करना पड़ेगा।

रमदान के दौरान रोज़े में सिर्फ दो ही बार भोजन करना होता है और ये डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत मुश्किल होता है क्‍योंकि उन्‍हें तो अपने ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के लिए थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में कुछ ना कुछ खाने की जरूरत पड़ती रहती है और ऐसे में दिन में सिर्फ दो बार भोजन करना इनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

अगर बहुत ज्‍यादा जरूरी नहीं है तो रमदान में डायबिटीज़ के मरीज़ रोज़े ना रखें। ये आपकी सेहत को बहुत हद तक नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आपकी अल्‍लाह में आस्‍था सच्‍ची है तो आपको रोज़ा रखने की जरूरत नहीं है। अपनी सेहत बिगाड़कर आपको कुछ नहीं मिलेगा इसलिए लापरवाही बिलकुल ना बरतें।

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