डायबिटीज़ के मरीज़ों का खाना इन ऑयल्‍स में बनाना चाहिए

Picture credit : healthline.com

Picture credit : healthline.com

रोज़ाना खाने में इस्‍तेमाल होने वाले तेल को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां रहती हैं। अगर आप मधुमेह या ह्रदय रोगी हैं तो खाने में तेल के इस्‍तेमाल को लेकर मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

इन रोगों में डाइट प्‍लान अहम भूमिका निभाता है और ऐसे में खाने में इस्‍तेमाल होने वाले तेल को चुनना बहुत बड़ी बात हो जाती है। सुपरमार्केट में तेलों की कई वैरायटी उपलब्‍ध हैं लेकिन इतनी सारी वैरायटी के बीच अपनी सेहत और शरीर की जरूरत के हिसाब से तेल चुन पाना मुश्किल हो जाता है।

सेहत विशेषज्ञों की मानें तो अलग-अलग खाने में मक्‍खन, घी, ऑलिव ऑयल, सरसों का तेल, सोयाबीन, सीसम और मूंगफली के तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपन ब्‍लड शुगर लेवल को संतुलित रखने के लिए डाइट का बहुत ख्‍याल रखना पड़ता है। मधुमेह रोगियों को जो भी खाना है या कितनी मात्रा में खाना है, इन सब बातों का ध्‍यान रखना जरूरी होता है। ऐसे में आपको पता होना चाहिए कि आपके लिए कौन-सा कुकिंग ऑयल बेहतर रहेगा।

आज हम आपको डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए कुछ फायदेमंद कुकिंग ऑयल के बारे में बताने जा रहे हैं। मधुमेह रोगियों को अपना खाना इन कुकिंग ऑयल्‍स में बनाना चाहिए। इससे उनकी सेहत को कोई नुकसान नहीं होगा।

कैनोला ऑयल

Picture credit : jagran.com

Picture credit : jagran.com

कैनोला प्‍लांट बेस्‍ड ऑयल है जो रेपसीड पौधे से निकलता है। इसमें अल्‍फा लिनोलेनिक एसिड मौजूद होता है जोकि ओमेगा 3 फैटी एसिड का ही एक प्रकार है। आपको ये अखरोट में भी मिल जाएगा। साथ ही इसमें हैल्‍दी मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड भी  होते हैं जो एवेकैडो और ऑलिव में पाए जाते हैं। टोरंटो की यूनिवर्सिटी के डॉ. डेविड जेंकिंस द्वारा की गई एक स्‍टडी में पाया गया है कि कैनोला ऑयल ब्‍लड शुगर को कम करने में मदद करता है और टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ये बैड कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को भी कम करने में मददगार होता है।

ऑलिव ऑयल

Picture credit : lifestylehindi.com

Picture credit : lifestylehindi.com

दिल की सेहत के लिए ऑलिव ऑयल बहुत फायदेमंद होता है। मधुमेह के मरीज़ों को भी ऑलिव ऑयल का सेवन करना फायदा पहुंचाता है। इसमें टायरोसॉल नामक एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जोकि इंसुलिन रेसिस्‍टेंस और डायबिटीज़ के ईलाज में थेरेपी यौगिक के रूप में काम करता है।

फ्लैक्‍स सीड ऑयल

Picture credit : youtube.com

Picture credit : youtube.com

फ्लैक्‍स सीड में मुसिलेज नामक फाइबर होता है जोकि पाचन को धीमा कर देता है। इससे खाने में मौजूद ग्‍लूकोज़ पच जाता है और रक्‍त में ये ग्‍लूकोज़ धीमी गति से पहुंचाता है जिससे ब्‍जड शुगर लेवल नहीं बढ़ता है। इस वजह से फ्लैक्‍स सीड ऑयल डा‍यबिटीज़ के मरीज़ों में इंसुलिन रेसिस्‍टेंस को कम करता है।

राइस ब्रान ऑयल 

Picture credit : thehealthsite.com

Picture credit : thehealthsite.com

ह्रदय के लिए सबसे फायदेमंद तेलों में राइस ब्रान ऑयल का नाम भी आता है। ये एंटीऑक्‍सीडेंट्स और मोनो और पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर होता है जोकि डायबिटीज़ के मरीज़ों को भी फायदा पहुंचाता है। न्‍यूट्रिशनल बायोकेमिस्‍ट्री के जर्नल में प्रकाशित हुई एक स्‍टडी के मुताबिक राइस ब्रान ऑयल के सेवन से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

अखरोट का तेल

Picture credit : myupchar.com

Picture credit : myupchar.com

अखरोट के तेल में ट्राइग्‍लिसराइड की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती है जोकि दिल की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड और पॉली अनसैचुरेटेड फैट भी होता है। ये मधुमेह के मरीज़ों में इंसुलिन सेंसिटिविटी को ठीक करने में मदद करता है। हार्वर्ड स्‍कूल ऑफ पब्लिक हैल्‍थ द्वारा की गई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि रोज़ाना अखरोट के तेल के सेवन से महिलाओं में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा कम रहता है।

तिल का तेल

best oil for diabetes 7

Picture credit : abpnews.abplive.in

Picture credit : abpnews.abplive.in

तिल के बीजों से निकलने वाले तिल के तेल में विटामिन ई और अन्‍य एंटीऑक्‍सीडेंट्स जैसे लिग्‍नंस मौजूद होते हैं। ये दोनों ही मधुमेह के मरीज़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। साल 2016 में अमेरिकन जर्नल ऑफ मेडिसन में प्रकाशित हुई एक स्‍टडी के अनुसार राइस ब्रान ऑयल और तिल के तेल का एकसाथ सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है।

सेहत विशेषज्ञों की मानें तो डायबिटीज़ के मरीज़ सलाद पर ड्रेसिंग और बेक्‍ड स्‍नैक्‍स के लिए बादाम तेल और एवोकैडो ऑयल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इनका इस्‍तेमाल आप रोज़ाना कुकिंग में नहीं कर सकते हैं लेकिन इनमें कुछ ऐसे हैल्‍दी फैट्स होते हैं जो मधुमेह, ओबेसिटी, हाई कोलेस्‍ट्रॉल और हाई ट्राईग्‍लिसराइड लेवल से बचाते हैं।

तेल से जुड़ी कुछ खास बातें

  • ऑलिव ऑयल में ओमेगा 3 मुकाबले 12 गुना ज्‍यादा ओमेगा 6 होता है लेकिन कुछ स्‍टडी में बताया गया है कि ह्रदय की सेहत के लिए ऑलिव ऑयल में ओमेगा 6 और ओमेगा 3 2:1 के अनुपात में होता है। इटैलियन ऑलिव ऑयल का प्रयोग ना करें। इसकी जगह एक्‍स्‍ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का इस्‍तेमाल करें क्‍योंकि इसमें केमिकल्‍स नहीं होते हैं।
  • ऐसा नहीं है कि मक्‍खन सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। जून 2016 को एक स्‍टडी में सामने आया है कि मक्‍खन खाने से ह्रदय रोगों का खतरा नहीं बढ़ता है और ये मधुमेह से भी बचाता है। इसमें ओमेगा 6 और ओमेगा 3 9:1 के अनुपात में होता है और इसका स्‍वाद भी सभी को पसंद आता है।
  • नारियल तेल में छोटे और आसानी से अवशोषित हो जाने वाले मध्‍यम श्रृंख्‍ला के अणु होते हैं जो ग्‍लूकोज़ के बिना कोशिकाओं को जरूरी फैटी एसिड प्रदान करते हैं और इससे इंसुलिन में भी कोई दिक्‍कत नहीं आती है।

यह शरीर को इंसुलिन प्रतिरोध से निपटने में मदद करता है। वर्जिन कोकोनट ऑयल एक विशेष प्रकार का फूड है जोकि शरीर में रक्‍त शर्करा के स्‍तर में ग्‍लूकोज़ के लेवल को बढ़ाए बिना एनर्जी प्रदान करता है। इसका मतलब है कि नारियल तेल का सेवन करने से आपके ब्‍लड शुगर लेवल को प्रभावित किए बिना ही शरीर को एनर्जी मिल सकती है।

डायबिटीज़ के मरीज़ो को लो फैट और हाई कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट पर रखा जाता है जिससे रक्‍त शर्करा का स्‍तर नियंत्रित रह सके और मधुमेह से संबंधित अन्‍य परेशानियों से बचा जा सके। मधुमेह रोगियों के लिए डाइट में केवल पॉलीअनसेचुरेटेड वनस्पति तेलों जैसे खसरा, जैतून या सूरजमुखी तेलों का प्रयोग किया जाता है।

अध्‍ययनों में यह बात सामने आई है कि पॉलीअनसैचुरेटेड फैट से को‍शिकाओं की कार्यक्षमता कमज़ोर हो जाती है और इसका असर इंसुलिन पर भी पड़ता है। इससे कोशिकाएं ग्‍लूकोज़ को अवशोषित कर एनर्जी का उत्‍पादन कर पाने में असमर्थ हो जाती हैं।

Read source

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *