क्‍या डायबिटीज़ संक्रमित बीमारी है और एक से दूसरे में फैलती है ?

Picture credit : diabetesbienestarysalud.com

Picture credit : diabetesbienestarysalud.com

आज डायबिटीज़ की बीमारी बड़ी तेज रफ्तार से बढ़ रही है। शरीर के सही तरह से काम ना करने पर इंसुलिन बनने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है और कई बार ये समस्‍या बहुत खतरनाक रूप ले लेती है।

टाइप 1 डायबिटीज़ में शरीर में पर्याप्‍त इंसुलिन नहीं बन पाता है जबकि टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर इंसुलिन का प्रयोग ठीक तरह से नहीं कर पाता है या फिर शरीर में पर्याप्‍त इंसुलिन नहीं बन पाता है। इंसुलिन का ईलाज ना कर पाने की स्थिति में मधुमेह की बीमारी हो जाती है।

जब शरीर में कोई अंग धीरे-धीरे काम करने लगता है या रक्‍त कोशिकाओं के क्षतिग्रस्‍त होने की वजह प्रतिक्रिया करना बंद कर देता है तो मधुमेह की बीमारी उत्‍पन्‍न होती है। इस वजह से धमनियां सिकुड़ जाती हैं और ऐसे में हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इससे दिमाग और ह्रदय में रक्‍त संचार बाधित होने लगता है।

हाई ब्‍लड शुगर का असर

रक्‍त में शुगर को इंसुलिन द्वारा प्रयोग किया जाता है। पाचन की इस प्रक्रिया में इंसुलिन कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ के रूप में जाता है जहां पर ये टूटकर एनर्जी बनाता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों में शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया करना बंद कर देता है और ग्‍लूकोज़ का इस्‍तेमाल नहीं कर पाता है। इस वजह से रक्‍त में शुगर की मात्रा बहुत बढ़ जाती है और खाने को एनर्जी में बदलने में दिक्‍कत आती है। रक्‍त में शुगर बढ़ने पर कोशिकाओं में एनर्जी की कमी होने लगती है।

रक्‍त कोशिकाओं में रक्‍त प्रवाह ठीक तरह से ना होने पर आंखों और किडनी में दिक्‍कत बढ़ सकती है और इन्‍हें कोई गंभीर रोग भी हो सकता है। वहीं हाई ब्‍लड शुगर की वजह से कमज़ोर हुई धमनियों का असर नसों पर भी पड़ता है। मधुमेह के अनियंत्रित होने पर हाई ब्‍लड शुगर हो जाता है जोकि पूरे शरीर की क्रिया को प्रभावित करता है। रक्‍त में शुगर पूरे शरीर की प्रोटीन से जुड़ी रक्‍त कोशिकाओं को क्षतिग्रस्‍त करता है। इस वजह से रक्‍त कोशिकाओं की संरचना कमजोर होती है क्‍योंकि वो मोटी और सख्‍त हो जाती हैं।

Picture credit : cdn.diabetesselfmanagement.com

Picture credit : cdn.diabetesselfmanagement.com

क्‍या हैं खतरे

हर साल डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्‍या बढ़ती जा रही है और साथ ही इसके खतरे और नुकसान भी बढ़ रहे हैं। हमारी जीवनशैली और जीवन से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं तो हमें मधुमेह का मरीज़ बना रही हैं। डायबिटीज़ के प्रमुख कारकों में ओबेसिटी, आधुनिक जीवनशैली और जींस जिम्‍मेदार हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ स्‍टडी में मॉडर्न लाइफस्‍टाइल को मधुमेह के बढ़ते मरीज़ों की संख्‍या को जिम्‍मेदार बताया गया है। इसमें एक्‍सरसाइज़ और शारीरिक क्रिया के बिना लोग बस खाते रहते हैं।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का कारण

गर्भावस्‍था के दौरान गर्भवती महिला में हाई ब्‍लड शुगर की वजह से जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा रहता है। प्‍लेसैंटा में हार्मोनल असंतुलन के कारण जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ हो सकती है जिसमें गर्भवती महिला के शरीर में जब इंसुलिन की ससबे ज्‍यादा जरूरत होती है वो तब नहीं बन पाता है। ग्‍लूकोज़ रक्‍त में बनता रहता है और इस वजह से ब्‍लड शुगर लेवल बहुत बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपरग्‍लाइसेमिया कहा जाता है।

टाइप 2 डायबिटीज़ है संक्रमित

एक नई रिसर्च में सामने आया है कि टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी संक्रमित होती है और ये एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलती है। ये बीमारी इंसानों से ज्‍यादा गायों में संक्रमित हो रही है।

अगर आप अपने ब्‍लड में शुगर की मात्रा को संतुलित रखना चाहते हैं तो ये टिप्‍स करें :

Picture credit : everydayhealth.com

Picture credit : everydayhealth.com

  • एवोकैडो में अनसैचुरेटेड फैट प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जोकि ह्रदय रोगों और स्‍ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करता है। मधुमेह की वजह से ह्रदय रोग, हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है इसलिए आपको एवोकैडो का सेवन करना चाहिए जो आपको ह्रदय रोगों और स्‍ट्रोक के साथ-साथ मधुमेह से भी सुरक्षा प्रदान करे। लगभग 30 ग्राम एवोकैडो में केवल 3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है।
  • आधा कप लो फैट कॉटेज चीज़ में बस चार ग्राम कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होती है। लो फैट कॉटेज चीज़ का आपके ब्‍लड शुगर के लेवल पर कुछ ज्‍यादा असर नहीं पड़ता है। आप ग्रीक योगर्ट या लो फैट स्ट्रिंग चीज़ की जगह लो फैट कॉटेज चीज़ का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा अपनी डाइट में ऐसी चीज़ों को शामिल करें जिनमें फाइबर की मात्रा ज्‍यादा हो।
  • मधुमेह से बचने और ब्‍लड शुगर लेवल को सामान्‍य स्‍तर पर रखने के लिए आपको प्रोटीन की जरूरत होती है और शरीर में प्रोटीन की पूर्ति करने का सबसे बेहतर स्रोत है साल्‍मन। साल्‍मन में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है और यह ओमेगा 3 फैटी एसिड का भी उत्तम स्रोत माना जाता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड रक्‍त को कम चिपचिपा बनाता है जिससे ब्‍लड क्‍लॉट्स बनने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा मदली में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी शून्‍य होती है।
  • कुछ समय पहले हुए एक अध्‍ययन में यह बात सामने आई थी कि रोज़ बादाम का सेवन करने से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसी तरह अपनी डाइट में अखरोट को भी शामिल करने से ब्‍लड शुगर लेवल का स्‍तर सामान्‍य रखने में मदद मिलती है। एक अखरोट में लगभग 4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है और इसमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड भी मौजूद होता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए ये बेहतर स्‍नैक माना जाता है क्‍योंकि ये लो कार्ब स्‍नैक है।
  • अपनी डाइट में फलों और सब्जियों को शामिल कर आप किसी भी बीमारी से बच सकते हैं। सब्जियों में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है जिसकी वजह से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। मशरूम, बंदगोभी, पालक और केल में पांच ग्राम कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होती है। अपने लंच या डिनर में इन सब्जियों को जरूर शामिल करें।

अगर आप ब्‍लड शुगर को हाई लेवल तक पहुंचने से बचाना चाहते हैं तो आपको अपने आहार में इन चीज़ों को शामिल करना चाहिए। ये ना केवल आपको डायबिटीज़ से बचाने में मदद करेंगी बल्कि इनसे आपको जरूरी पोषक तत्‍व भी मिलेंगें। इन्‍हें बड़ी आसानी से आप अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

Read source

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *