इस तरह हिबिस्‍कस कर सकती है डायबिटीज़ के मरीज़ों की मदद

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डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो पूरी जिंदगी के लिए साथ रहती है। मधुमेह के मरीज़ों को अपने लाइफस्‍टाइल और खानपान का बहुत ध्‍यान रखना पड़ता है क्‍योंकि कहा जाता है कि इसी से मधुमेह को कंट्रोल किया जा सकता है। इकसे अलावा कई प्राकृतिक जड़ी बूटियां भी मधुमेह के ईलाज में फायदेमंद होती हैं।

असम तेजपुर यूनिवर्सिटी और पश्चिम बंगाल की विश्‍व भारती यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि हिबिस्‍कस की एक खास प्रजाति में ऐसे प्राकृतिक रसायन हैं जो डायबिटीज़ के ईलाज में मदद करने में सक्षम है।

इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन के अनुसार डायबिटीज़ आज दुनियाभर में बड़ी तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक बन गई है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का दावा है कि साल 2030 तक मधुमेह मृत्‍यु का 7वां सबसे बड़ा कारण बन जाएगी। दुनियाभर के विशेषज्ञ इसे साइलेंट किलर कहते हैं। डायबिटीज़ मेलिटस या मधुमेह भारत की चार गैर संचारित बीमारियों में से एक है। इसमें बाकी कार्डियोवस्‍कुलर रोग, कैंसर और ओब्‍सट्रक्टिव पल्‍मोनरी डिसीज़ शामिल है।

इस बीमारी के दो रूप हैं। टाइप 1 डायबिटीज़ में शरीर के अंदर अग्‍नाश्‍य में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है जो शरीर के अंदर ग्‍लूकोज़ को तोड़कर उसका एनर्जी के रूप में प्रयोग करता है। वहीं टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना या इंसुलिन का उत्‍पादन करना कम कर देता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि स्‍थलपदमा की पत्तियों और हिबिस्‍कस में फाइटोकेमिकल होता है जो कि कोशिकाओं की इंसुलिन सेंसिटिविटी को रिस्‍टोर कर मधुमेह के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर के लेवल को कम करता है।

Picture credit : speedyremedies.com

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शोधकर्ताओं का कहना है कि पॉलीफेनॉल्‍स से संबंधित फेरूलिक एसिड हिबिस्‍कस के पौधे से मिलता है और इसमें मधुमेह का ईलाज करने की क्षमता है। इस रिसर्च के परिणाम जर्नल बायोकेमिकल और बायोफिजिकल रिसर्च कम्‍युनिकेशन में प्रकाशित हो चुकी है। इस रिसर्च के मुताबिक फेरुलिक एसिड डायबिटीज़ के मरीज़ों में ग्‍लूकोज़ लेवल को बेहतर करने में मदद करता है।

भारत में पाया जाने वाला हिबिस्‍कस एक फूलों का पौधा है और ये अपनी खुशबू और औषधीय गुणों के कारण जाना जाता है। आयुर्वेद में श्रबी हिबिस्‍कस मुटाबिलिस का प्रयोग सूजन, त्‍वचा के संक्रमण, बालों का झड़ना और बालों के सफेद होने में किया जाता है।

बालों के झड़ने के उपचार में हिबिस्‍कस की पत्तियां और इसके फूल औषधीय गुण रखते हैं। सदियों से आयुर्वेद में इसका प्रयोग किया जाता रहा है। बालों की ग्रोथ को बढ़ाने और स्‍कैल्‍प इंफेक्‍शन और एलोपेशिया से बचाव में ये मदद करता है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र से हिबिस्‍कस की पत्तियों को लेकर उन पर तेजपुर यूनिवर्सिटी के मॉलेक्‍यूलर बायोलॉजी एंड बायोटेक्‍नोलॉजी विभाग में शोधकर्ताओं ने रिसर्च की। उनका कहना है कि इस पौधे में पॉलीफेनॉल पाया जाता है जोकि रक्‍त कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ बनाने के लिए इंसुलिन को मदद करता है।

डायबिटीज़ की बीमारी में इंसुलिन सेंसिटिविटी भी सामने आती है। इस यौगिक से इंसुलिन सेंसिटिविटी को भी ठीक किया जा सका है।

हिबिस्‍कस की चाय के फायदे

अगर आपको उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या है तो आपको हिबिस्‍कस की चाय पीनी चाहिए। हिबिस्‍कस से सिस्‍टोलिक ब्‍लडप्रेशर और डिएस्‍टोलिक ब्‍लड प्रेशर दोनों को ही निंयंत्रित किया जा सकता है।

इसकी चाय से कई तरह के रोगों में भी फायदा मिलता है जिसमें टाइप 2 डायबिटीज़ भी शामिल है। 2009 में हुई एक स्‍टडी के दौरान डायबिटीज़ के 60 मरीज़ों को हिबिस्‍कस टी और ब्‍लैक टी का सेवन एक महीने तक दिन में दो बार करने के लिए कहा गया।

इसमें हिबिस्‍कस टी पीने वाले प्रतिभागियों के एचडीएल यालि गुड कोलेस्‍ट्रॉल में बढ़ोत्तरी हुई और एलडीएल यानि बैड कोलेस्‍ट्रॉल घटा। हिबिस्‍कस से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लडप्रेशर को कम किया जा सकता है।

हिबिस्‍कस से हाई कोलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या से भी निजात पाई जा सकती है।

अन्‍य जड़ी बूटियां भी हैं फायदेमंद

Picture credit : thehealthsite.com

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  1. दालचीनी में एंटीडायबिटीक यौगिक होते हैं जोकि हमारे शरीर में ग्‍लूकोज़ प्रवेश के रेट को कम कर देते हैं। इससे कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ का प्रवाह संतुलित होता है और ब्‍लड शुगर भी नहीं बढ़ता। रोज़ना दालचीनी का सेवन करने से ब्‍लड शुगर के साथ-साथ शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर भी बेहतर होता है।
  2. दारुहल्‍दी की जड़ को पाउडर बनाकर आप दो दिन तक स्‍टोर करके रख सकते हैं। इससे पैंक्रियाज़ को शरीर में इंसुलिन रिलीज़ करने में मदद मिलती है और ये कोशिकाओं में इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में भी मदद करता है। इस तरह ग्‍लूकोज़ कोशिकाओं में प्रवेश कर एनर्जी प्रदान करता है और रक्‍त को साफ करता है।
  3. प्राकृतिक एंटी डायबिटीक, एंटी कैंसर, एंटी इंफ्लामेट्री और एंटी एलर्जिक हल्‍दी इंसुलिन रेसिस्‍टेंस में मदद करती है और ये ग्‍लूकोज़ को कोशिकाओं में प्रवेश करने में मदद करती है। डायबिटीज़ के मरीज़ों को प्रतिदिन एक कप हल्‍दी की चाय पीने से फायदा होता है। एक गिलास पानी में एक चुटकी हल्‍दी डालकर इसे उबालकर पी लें। शरीर में किसी तरह की सूजन के लिए भी से नुस्‍खा फायदेमंद साबित होगा।
  4. डायबिटीज़ को कंट्रोल करने का प्राकृतिक और प्रभावकारी तरीका है नारियल तेल। नारियल तेल में लौरिक एसिड और मीडियम चेन फैटी एसिड होता है जोकि ग्‍लूकोज़ से हल्‍के होते हैं इसलिए ये आसानी से कोशिकाओं में घुसकर उन्‍हें बिना इंसुलिन के एनर्जी प्रदान करते हैं। मानव शरीर में कोकोनट फैट नहीं जमता है और ये उसे एनर्जी की तरह प्रयोग करता है।
  5. जामुन ही नहीं बल्कि इसके बीज भी ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करने में फायदेमंद होता है। सूखा और पाउडर के रूप में भी इसके बीज शुगर के स्‍तर को कंट्रोल करने में कारगर साबित होता है। स्‍वाद में कसैला ये फल शरीर में मौजूद अत्‍यधिक शुगर को कम करता है।

अगर आप मधुमेह है मरीज़ हैं और नैचुरल तरीके से इसे कंट्रोल करना चाहते हैं तो इन जड़ी बूटियों के साथ-साथ हिबिस्‍कस को भी अपने आहार में शामिल करें। ये आपका ब्‍लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार साबित होंगीं।

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