स्टडी में हुआ खुलासा ‘गुड फैट’ कर सकता है मधुमेह से रक्षा

Picture credit : boldsky.com

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शोधकर्ताओं की टीम ने शरीर में एक नए तरह के ‘गुड फैट’ पाये जाने का खुलासा किया है जो डायबिटीज़ से बचने में मदद करता है। आज दुनियाभर में मधुमेह की बीमारी बड़ी तेजी से बढ रही है और ऐसे में ये रिसर्च बहुत कारगर साबित हो सकती है।

ये स्‍टडी ऑनलाइन जर्नर सेल में प्रकाशित हुई थी और इसमें पाया गया कि फैटी एसिड हाइड्रॉक्स्लि फैटी एसिड्स नामक गुड फैट वसा कोशिकाओं से लेकर पूरे शरीर में पाया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस नए लिपिड का कम स्‍तर व्‍यक्‍ति में डायबिटीज़ का खतरा बढ़ा देता है। इस लिपिड का प्रयोग मेटाबॉलिक विकार के ईलाज में थेरेपी के रूप में किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये लिपिड सेहत के लिए फायदेमंद होता है और इससे जलन को भी कम किया जा सकता है। क्रोह्न रोग, रह्यूमेटायड अर्थराइटिस जैसे रोगों में इस लिपिड से जलन को कम किया जा सकता है। ये डायबिटीज़ में भी फायदेमंद होता है।

कोशिकाओं और टिश्‍यूज़ में इस गुड फैट को पहले नहीं पाया गया था क्‍योंकि ये कम प्रभावी होते हैं और इनका पता लगा पाना मुश्किल होता है। शोधकर्ताओं की मानें तो ये गुड फैट मानव शरीर के अंदर ही पैदा होता और टूट जाता है और इस वजह से इसका प्रयोग थेरेपी में किया जा सकता है क्योंकि हम पूरे शरीर में उत्पादन और टूटने की दर को संभावित रूप से संशोधित कर सकते हैं।

ये रिसर्च भी तक चूहों पर की गई है और मावन शरीर पर इसके प्रभाव के बारे में जानना अभी बाकी है।

आमतौर पर फैट को शरीर के लिए नुकसानदायक बताया जाता है लेकिन आपको बता दें कि डायबिटीज़ के मरीज़ों की डाइट में कुछ ऐसे भी फैट्स शामिल हो सकते हैं जिनसे उन्‍हें कोई नुकसान ना हो।

ओमेगा 3 फैट

Picture credit : oregonsportsnews.com

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यूएस में 80 प्रतिशत लोग जिसे फैट का सेवन करते हैं वो है ओमेगा 6 फैट और खतरनाक बात ये है कि वेजिटेबल ऑयल जैसे कॉर्न और सोयाबीन ऑयल आदि में मौजूद ओमेगा 6 फैट मधुमेह से संबंधित समस्‍याओं जैसे जलन आदि को बढ़ा देता है।

इसकी बजाय ओमेगा 3 सेहत के लिए फायदेमंद होता है और खासतौर पर मधुमेह के मरीज़ों के लिए। जंगली मछली, मैकरेल और सारदिंस आदि चीज़ों में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड एंटी इंफ्लामेट्री असर दिखाता है और ये ब्‍लड शुगर को भी कंट्रोल कर उसे बेहतर करता है। ये ट्राइग्लिसराइड को कम करता है और कार्डियोवस्‍कुलर रोगों का खतरा घटाता है जोकि मधुमेह के मरीज़ों में मृत्‍यु का सबसे बड़ा कारण है।

मोनोअनसैचुरेटेड फैट

Picture credit : healthline.com

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डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए ये फैट भी फायदेमंद होता है। एवोकैडो, एवोकैडो ऑयल, मकादामिया नट्स और मकादामिया नट ऑयल में पाया जाने वाला मोनोअनसैचुरेटेड फैट ब्‍लड शुगर को संतुलित करता है और पेट की चर्बी को घटाता है और ह्रदय रोगों से भी बचाता है।

अपने खाने में एक्‍स्‍ट्रा वर्जिन ऑयल का इस्‍तेमाल करें और मुट्ठीभर नट्स खाएं। ऐसी मेडिटेरियन डाइट मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। मेडिटेरियन डाइट मोनोअनसैचुरेटेड फैट और मूफा पर निर्भर होती है जिसमें प्रमुख रूप से ऑलिव ऑयल, नट्स्‍ और एवोकैडो आदि शामिल है। ये ब्‍लड शुगर को संतुलित कर कार्डियोवस्‍कुलर रोगों से बचाता है।

सीएलए – रिच ग्रास – फेड बीफ, बिसोन और वाइल्‍ड गेम

Picture credit : builtlean.com

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ग्रास फेड बीफ में सीएलए होता है, ये एक ऐसा यौगिक है जो ब्‍लड शुगर के स्‍तर को फायदा पहुंचाता है और लेप्टिन नामक हार्मोन को कम कर देता है। ये हार्मोन बॉडी फैट लेवल को नियंत्रित करता है।

अगर आप अपने ब्‍लड शुगर को संतुलित रखना चाहते हैं तो आपको अपनी डाइट में लोग ग्‍लाइसेमिक, लो कार्बोहाइड्रेट, साबुत अनाज जिनमें हैल्‍दी फैट शामिल हो आदि का सेवन करना चाहिए।

डायबिटीज़ से बचने के टिप्‍स

  • ओवरवेट होने पर मधुमेह का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। वहीं प्रत्‍येक किलो वजन घटाने से मधुमेह का खतरा भी 16 प्रतिशत तक कम हो जाता है। स्‍वस्‍थ जीवनशैली और डाइट के ज़रिए वजन आसानी से घटाया जा सकता है। छोटी-छोटी बातों का ध्‍यान रखकर आप लंबे समय तक स्‍वस्‍थ रह सकते हैं।
  • कई तरह के फल-सब्जियां खाएं, प्रोटीन लें और फैट के बेहतर स्रोतों का सेवन करें। जिन फूड्स में ट्रांस फैट यानि की हाइड्रोजेनरेटेड फैट, प्रोसेस्‍ड फूड और शुगर ज्‍यादा होता है उनसे दूर रहें। कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेट्स में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। इन्‍हें पचने में थोड़ा समय लगता है और इस वजह से ये लंबे समय तक ऊर्जा का बेहतर स्रोत बन सकते हैं।
  • ओबेसिटी और डायबिटीज़ से संबंधित अध्‍ययनों में शुगरयुक्‍त बेवरेज़ेज़ के संबंध के बारे में बताया गया है। इन्‍हें अपनी डाइट से हटाकर आप कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं। रोज़ाना कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं। खूब सारे फल खाएं और शरीर को डिहाइड्रेट रखने के लिए हर्बल टी पीएं।
  • ना के बराबर शारीरिक क्रिया करने वाले लोगों में सबसे ज्‍यादा मधुमेह का खतरा रहता है। एक्‍सरसाइज़ से कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ज्‍यादा संवेदनशील हो जाती है। इसके लिए आप ब्रिस्‍क वॉक कर सकते हैं। 35-40 मिनट तक रोज़ हल्‍के व्‍यायाम से भी फायदा हो सकता है।
  • आज शायद ही ऐसा कोई व्‍यक्‍ति होगा जिसे कोई तनाव या परेशानी ना हो। तनाव की वजह से कई तरह के हार्मोन रिलीज़ होते हैं जिससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। कई अध्‍ययनों में भी ये बात साबित हुई है कि मेडिटेशन करने से तनाव को कम किया जा सकता है। शारीरिक व्‍यायाम और सोशल सपोर्ट से तनाव को कम किया जा सकता है।
  • अनिद्रा या बेहतर नींद ना ले पाने की स्थिति में डायबिटीज़ और ओबेसिटी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सोने के लिए एक तय वक्‍त रखें और पर्याप्‍त नींद लें। रोज़ाना 7 से 8 घंटे की नींद बहुत जरूरी होती है। पर्याप्‍त नींद ना लेने से ना केवल इसका असर शरीर पर पड़ता है बल्कि इससे आपका काम और जीवन भी प्रभावित होने लगता है।
  • किसी भी बीमारी से बचने के लिए समय-समय पर जरूरी जांच करवाना भी जरूरी होता है। डायबिटीज़ को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है वो भी तब जब आप पूरी तरह से सावधानी बरतें। नियमित चेकअप करवाते रहें और खुद भी अपने अंदर दिखने वाले लक्षणों पर गौर फरमाएं। किसी भी तरह का लक्षण दिखने पर तुरंत उसका उपाय करें। जीवनशैली में कुछ चंद बदलाव करने से आप लंबे समय तक स्‍वस्‍थ रह सकते हैं।

अगर आपको डायबिटीज़ की बीमारी है तो अपनी जीवनशैली में कुछ कारगर बदलाव जरूर लाएं। ये आपको मधुमेह को और ज्‍यादा गंभीर होने से बचा सकता है।

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