डायबिटीज़ के मरीज़ों को नहीं खाने चाहिए ये – हाई ग्‍लाइसेमिक फूड्स

डायबिटीज़ की बीमारी में मरीज़ों को लो ग्‍लाइसेमिक फूड खाने की सलाह दी जाती है क्‍योंकि हाई ग्‍लाइसेमिक फूड्स से ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है और ये कई सेहत संबंधित समस्‍याओं का कारण भी बन सकता है। अगर आपको मधुमेह की बीमारी है तो आपको अपने खाने में इस बात का ध्‍यान जरूर रखना चाहिए कि आप जो कुछ भी खा रहे हैं वो लो ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स वाला फूड हो। तो चलिए जान लेते हैं कि वो कौन सी चीज़ें हैं जो हाई ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स में आती हैं और मधुमेह के मरीज़ों को इनसे दूर रहना चाहिए।

न्‍यूट्रिशनिस्‍ट, डायटीशियन और डॉक्‍टरों का कहना है कि ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स में खाद्य पदार्थों को उनमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा के आधार पर बांटा गया है। ये कितनी तेजी से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल को प्रभावित करते हैं, इसी के आधार पर इन्‍हें लो और हाई ग्‍लाइसेमिक फूड की कैटेगरी में रखा गया है। जिन खाद्य पदार्थों में कार्बोहाइड्रेट के साथ लो जीआई वैल्‍यू यानि की 55 या इससे कम होती है वो धीरे से पचते हैं और अवशोषित और मेटाबोलाइज्‍ड धीमी गति से होते हैं।

इनका ब्‍लड ग्‍लूकोज़ पर धीरे से असर पड़ता है। वहीं हाई ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स वाले फूड्स ब्‍लड शुगर लेवल के साथ इंसुलिन लेवल को भी बढ़ा देता है और इस वजह से तेज भूख लगती है। इसके अलावा जीआई फूड को अकेले या किसी अन्‍य खाद्य पदार्थ के साथ खाने पर भी निर्भर करता है। अगर आप कोई लो जीआई वाला फूड प्रोटीन, फैट या किसी अन्‍य सीएचओ के साथ खाते हैं तो उसकी जीआई वैल्‍यू और कम हो जाती है।

अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन के अनुसार फूड्स को हाई और लो में विभाजित करने के लिए 55 से कम जीआई वाले फूड्स लो और 56 से 59 वाले मीडियम जीआई फूड और 70 या इससे ज्‍यादा जीआई वाले हाई ग्‍लाइसेमिक फूड्स बताए गए हैं।

हाई ग्‍लाइसेमिक फूड का ब्‍लड शुगर पर क्‍या पड़ता है असर

हाई ग्‍लाइसेमिक फूड की वजह से ब्‍लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है जोकि टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ा देता है। इसके साथ ही ऐसे खाद्य पदार्थों को खाने से ह्रदय रोग, वजन बढ़ना जैसी समस्‍याएं भी हो सकती हैं। कुछ मामलों में ये ब्रेस्‍ट, प्रोस्‍टेट, कोरेक्‍टल और अग्‍नाशय कैंसर का कारण भी बन सकता है।

सेहत विशेषज्ञों की मानें तो हाई ग्‍लाइसेमिक फूड्स को पूरी तरह से अपने आहार से हटाना सही नहीं है लेकिन आप अपने खाने में लो या मीडियम फूड्स को शामिल कर सकते हैं। कई हाई ग्‍लाइसेमिक फूड्स में कैलोरी कम होती है और इनमें पोषक तत्‍व भी ज्‍यादा होते हैं। जैसे कि तरबूज हाई ग्‍लाइसेमिक फूड में आता है लेकिन सेहत के लिए ये किसी खजाने से कम नहीं है। ऐसे ही कई और भी हाई ग्‍लाइसेमिक फूड्स हैं जिनमें न्‍यूट्रीशिन बहुत ज्‍यादा होता है।

इन चीज़ों में जीआई वैल्‍यू ज्‍यादा होती है :

1. White bread 8. cereals 15. Potato chips 22. Muesli
2. Watermelon 9. Pasta 16. Popcorn 23. Whole wheat bread
3. Honey 10. Millet 17. Beer 24. Juices with added sugar
4. Doughnuts 11. White flour 18. Liqueurs 25. Baked potato
5. French fries 12. Raisins 19. Sugary foods 26. Onions
6. Bananas 13. Pineapple 20. Grapes 27. Soda
7. Rice 14. Corn syrup 21. cherries 28. Puffed rice

Image source : food.ndtv.com

हाई ग्‍लासइसेमिक वैल्‍यू उस खाद्य पदार्थ को पकाने के तरीके, प्रोसेसिंग और राइपनेस पर भी निर्भर करती है। इसलिए अगर आप मधुमेह रोगी हैं तो बेहतर होगा कि आप किसी भी फूड को अपने आहार में शामिल करने या बिलकुल हटाने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह जरूर कर लें।

जीआई से जुड़ी खास बात

जीआई वैल्‍यू खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट के टाइप को दर्शाता है लेकिन इसमें खाए गए कार्बोहाइड्रेट के बारे में कुछ नहीं होता है। ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को नियंत्रित करने के लिए पोर्शन साइज़ भी जरूरी होता है और वजन को संतुलित या घटाने में भी ये अहम भूमिका निभाता है।

किसी भी फूड का जीआई रेट अकेले खाने या किसी अन्‍य फूड के साथ खाने पर बदल जाता है। अगर आप कोई हाई जीआई वाला फूड खा रहे हैं तो आप इसे लो जीआई फूड के साथ खा सकते हैं। इससे ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल संतुलित रहता है।

कई पोषक खाद्यों में कम पोषक खाद्यों की तुलना में जीआई ज्‍यादा होता है। जैसे कि ओटमील में चॉकलेट से ज्‍यादा जीआई होता है।

जीआई का डायबिटीज़ पर असर

कम जीआई वाले फूड डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फायदेमंद होते हैं। उच्‍च कार्बोहाइड्रेट युक्‍त खाद्यों के नियंत्रित सेवन पर भी ये बात लागू होती है।

लो जीआई डाइट वाले फूड शरीर में धीमी गति से एनर्जी में परिवर्तित होते हैं। लो जीआई डाइट डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बेहतर होती है क्‍योंकि ये हाई जीआई वाले फूड्स की तुलना में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल को प्रभावित तरीके से नियंत्रित और संतुलित कर पाते हैं।

हाई जीआई वाले फूड जल्‍दी टूट जाते हैं और इससे तेजी से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर बढ़ता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों को हाई जीआई वाले फूड्स का सेवन नहीं करना चाहिए।

जीआई एक पैमौन का उपायोग कर उन फूड्स के बारे में बताता है जिसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्‍यादा होती है। जितना ज्‍यादा जीआई होगा रक्‍त शर्करा में उतनी ही तेज वृद्धि होगी।

अगर मधुमेह के मरीज़ हैं तो अपना डाइट चार्ट बहुत संभलकर बनाएं। जैसा कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि संतुलित आहार और एक्‍सरसाइज़ से आप इस बीमारी को पूरी तरह से कंट्रोल कर सकते हैं इसलिए आपको अपने सेहत विशेषज्ञ या डॉक्‍टर की सहायता से अपने लिए एक डाइट चार्ट तैयार कर लेना चाहिए। साथ ही उनसे ये भी पूछें कि आपको कौन-कौन सी एक्‍सरसाइज और व्‍यायाम करने से फायदा होगा। हर मरीज़ में डायबिटीज़ की बीमारी अलग होती है इसलिए आपको किसी दूसरे मरीज़ के कहने या सलाह पर अपने लाइफस्‍टाइल में कोई बदलाव नहीं करना चाहिए। ऐसा करना आपके लिए खतरनाक हो सकता है।

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