डायबिटीक मरीज़ों को इस तरह रखना चाहिए आंखों का ख्‍याल

डायबिटीज़ की बीमारी में कई तरह की मु‍श्किलें सामने आती हैं जिनमें आंखों की समस्‍या भी शामिल है। ब्‍लड शुगर के बहुत ज्‍यादा बढ़ने पर आंखों में समस्‍या का खतरा भी बढ़ जाता है। मधुमेह में आंखों में सूजन हो सकती है जिस वजह से मरीज़ को देखने में दिक्‍कत आती है। रक्‍त कोशिकाओं पर नकारात्‍मक असर पड़ने से आंखों की रोशनी कम होने या नेत्रहीन होने का खतरा रहता है। मधुमेह के मरीज़ों में इस बात का खतरा हमेशा बना रहता है इसलिए उन्‍हें हर साल अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए।

आंखों को नुकसान के लक्षण

मधुमेह, आंखों को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। ब्‍लड शुगर के हाई होने पर या इंसुलिन का उपचार करने पर आंखों की रोशनी कम हो जाती है। कोई लक्षण नज़र नहीं आने पर भी आंखों को नुकसान हो जाता है इसलिए इसके लक्षणों के दिखने का इंतज़ार ना करें और आंखों का चेकअप करवाते रहें।

अगर आपको मधुमेह है और इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो सीधा नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें :

  • कम दिखना
  • धब्‍बा या परछाई आना
  • आंखों में दर्द या दबाव महसूस होना
  • एक या दोनों आंखों की अचानक रोशनी कम होना
  • आंखों पर पर्दा दिखाई देना
  • मधुमेह में आंखों को स्‍वस्‍थ रखने के लिए करें ये काम :
  • अपने डॉक्‍टर एवं डायटीशियन द्वारा बताई गई डाइट को फॉलो करें।
  • रोज़ दिनभर में कम से कम 30 मिनट एक्‍सरसाइज़ जरूर करें। अपने डॉक्‍टर से पूछ सकते हैं कि आपके लिए कौन-सी एक्‍सरसाइज़ सबसे बेहतर रहेगी।
  • निर्देशित दवाओं का सेवन जरूर करें।
  • रोज़ अपना ब्‍लड ग्‍लूकोज़ चैक करें। जब भी ब्‍लड ग्‍लूकोज़ चैक करें तो उसे नोट भी कर लें।
  • रोज़ पैरों को चैक करें कि कहीं उन पर कोई घाव, छाले, सूजन या लालपन तो नहीं है।
  • रोज़ दांतों को दो बार ब्रश और फ्लॉस करें।
  • ब्‍लडप्रेशर और कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल करें।
  • धूम्रपान से दूर रहें।

डॉक्‍टर से करते रहें बात

किसी नेत्र विशेषज्ञ से अपनी डायबिटीज़ और आंखों को लेकर सलाह जरूर लें। नियमित आई चैकअप से आंखो की रोशनी कम होने से रोकी जा सकती है। अगर आपको आंखों में कोई भी बदलाव नज़र आता है या अचानक से कम दिखना शुरु हो जाता है तो तुरंत अपने डॉक्‍टर से संपर्क करें।

रेगुलर डाइलेटिड आई एग्‍जाम

अपने डॉक्‍टर से पूछें कि आपको कितनी जल्‍दी या कितने समय में डाइलेटिड आई एग्‍जाम करवाने की जरूरत है। इस एग्‍जाम में रेटिना की दृष्टि को चैक करने के लिए आंखों की पुतलियों को फैलाया जाता है। इससे आंखों से संबंधित समस्‍याओं का पता चलता है। डायबिटीज़ के मरीज़ों को साल में एक बार डाइलेशन करवाना चाहिए लेकिन डायबिटीक रेटिनोपैथी के मरीज़ों को जल्‍दी-जल्‍दी आंखों का चैकअप करवाना चाहिए। अपने डॉक्‍टर से बात करके चैकअप के लिए नियमित शेड्यूल तैयार कर लें। जितनी जल्‍दी किसी बीमारी का पता चल जाता है उतनी ही जल्‍दी उसका ईलाज संभव हो पाता है।

ब्‍लड शुगर करें चैक

ब्‍लड शुगर के बढ़ने पर रेटिना की रक्‍त कोशिकाएं क्षतिग्रस्‍त होने लगती हैं। अगर आप ब्‍लड शुगर को कंट्रोल कर लें तो रेटिना और आंखों की रोशनी को बचाया जा सकता है। ब्‍लड शुगर के अनियंत्रित रहने पर डायबिटीक मरीज़ों में रेटिनोपैथी का खतरा चार गुना ज्‍यादा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि आप रोज़ अपना ब्‍लड शुगर मॉनिटर करें, हैल्‍दी डाइट लें और एक्‍सरसाइज़ करें। साथ ही डॉक्‍टर द्वारा बताई गई दवाओं का सेवन भी जरूरी है।

ब्‍लडप्रेशर और कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल रखें

ब्‍लड प्रेशर के बढ़ने पर आंखों की क्षतिग्रस्‍त रक्‍त कोशिकाओं से लीकेज होना शुरु हो जाता है। जब रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल लेवल बहुत ज्‍यादा हो जाता है जो क्षतिग्रस्‍त रक्‍त कोशिकाओं से फैटी डिपॉजिट लीक होने लगता है। अगर आपके डॉक्‍टर ने कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने की दवा लिखी है तो उसे जरूर खाएं। अपनी डाइट में कम नमक और फैट वाली चीज़ों को रखें और साबुत अनाज, फल और सब्जियां शामिल करें।

डाइट से आंखों को रखें सेहतमंद

संतुलित, पोषणयुक्‍त डाइट से आंखों के साथ-साथ पूरे शरीर को सेहतमंद रखा जा सकता है। हरी सब्जियां और ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्‍त चीज़ें आंखों के लिए फायदेमंद होती हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट्स जैसे फ्लेवेनॉएड्स भी आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखते हैं। अपने आहार में फ्लेवेनॉएड युक्‍त फल और सब्जियों को शामिल करें, इससे डायबिटीक रेटिनोपैथी का खतरा 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है।

धूम्रपान से रहें दूर

अगर आपको डायबिटीज़ है और आप अंधे होने से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले धूम्रपान छोड़ दें। धूम्रपान से डायबिटीक रेटिनोपैथी का खतरा बढ़ जाता है और इसकी वजह से ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने में भी दिक्‍कत आती है। इस वजह से हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का खतरा भी मधुमेह के मरीज़ों में 1.8 बार ज्‍यादा रहता है।

पैदल चलें

आपका शरीर जितना ज्‍यादा क्रियाशील रहेगा आप उतना ही ज्‍यादा स्‍वस्‍थ रह पाएंगें। इसलिए एक्‍सरसाइज़ करना जरूरी है। एक्‍सरसाइज़ करने से शरीर इंसुलिन का प्रयोग कर पाता है जोकि ब्‍लड शुगर को कंट्रोल कर, अतिरिक्‍त वसा को खत्‍म करता है और मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करता है, ब्‍लडप्रेशर और कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है, रक्‍त प्रवाह को बेहतर करता है और स्‍ट्रेस को कम कर एनर्जी बढ़ाता है और मूड को बेहतर करता है। ज्‍यादा कड़ा व्‍यायाम या हैवी वेट लिफ्टिंग करने से बचें वरना इससे ब्‍लडप्रेशर बढ़ सकता है।

चश्‍मा लगाएं

सनग्‍लासेज़ यानि चश्‍मा लगाने से आंखों को सूर्य की अल्‍ट्रावायलेट किरणों से बचाव मिलता है। ये किरणें आंखों को नुकसान पहुंचाकर कैटरेक्‍ट का खतरा बढ़ा सकती हैं। मधुमेह के मरीज़ों में पहले से ही नेत्र रोगों का खतरा 30 प्रतिशत ज्‍यादा होता है। यूवी प्रोटेक्‍टेड सनग्‍लासेज़ पहनने से नेत्र रोगों का खतरा कम हो जाता है। बाहर निकलते समय चश्‍मा जरूर लगाएं और अगर धूप नहीं है तो भी चश्‍मा लगाएं। किसी ऊंची जगह पर जाते समय भी सनग्‍लासेज़ का इस्‍तेमाल जरूर करें क्‍योंकि इस दौरान यूवी किरणें बहुत तेज पड़ती हैं।

डायबिटीज़ का असर शरीर के कई अंगों पर पड़ता है जिनमें से आंखें भी एक हैं। अगर आप मधुमेह के मरीज़ हैं तो आपको ऊपर बताई गई सभी बातों का खास ध्‍यान रखना चाहिए वरना आप अंधे भी हो सकते हैं।

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