इन वजहों से प्राकृतिक तरीके भी मधुमेह को कंट्रोल करने में हो जाते हैं फेल

Picture credit : onlymyhealth.com

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विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार दुनियाभर में 347 मिलियन डायबिटीज़ के मरीज़ हैं। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का कहना है कि साल 2030 तक डायबिटीज़ मृत्‍यु का सातवां सबसे बड़ा कारण होगा। मधुमेह को नियंत्रित करने में जीवनशैली में कुछ बदलाव करना फायदेमंद रहता है। मधुमेह के मरीज़ों को इस बीमारी की वजह से कई बातों का ध्‍यान रखना पड़ता है और उन्‍हें कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।

प्राकृतिक तरीके से डायबिटीज़ को कंट्रोल करने के तरीकों में एक्‍सरसाइज़, रोज़ ब्‍लड ग्‍लूकोज़ मॉनिटर करना, खाने का रिकॉर्ड रखना, धूम्रपान और शराब से दूर रहना और ओरल हैल्‍थ का ध्‍यान रखना शामिल है। इन प्राकृतिक तरीकों से आप अपना ब्‍लड शुगर कंट्रोल में रख सकते हैं और स्‍वस्‍थ जीवन जी सकते हैं। कई बार खानपान की आदतों में बदलाव, एक्‍सरसाइज़ और कई जरूरी चीज़ें करने के बावजूद मधुमेह को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

डायबिटीज़ के प्राकृतिक तरीकों से कंट्रोल ना होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ही कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो मधुमेह पर प्राकृतिक तरीकों को बेअसर कर देते हैं।

तुरंत असर की ना करें उम्‍मीद  

मधुमेह को प्राकृतिक तरीकों से कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है और इसका पता आपको कुछ समय बाद चलता है। डाइट में कुछ बदलाव करने और शारीरिक व्‍यायाम शुरु करने के कुछ ही दिनों या हफ्तों में किसी चमत्‍कार की उम्‍मीद ना करें। मधुमेह को नियंत्रित करने की राह में बहुत धैर्य की जरूरत पड़ती है। अगर आप सच में इस बीमारी को कंट्रोल करना चाहते हैं तो इससे जुड़ी सभी चीज़ों को गंभीरता से लें और धैर्य रखें।

एडवांस स्‍टेज पर डायबिटीज़ को कंट्रोल करना थोड़ा मुश्किल होता है। डाइट और एक्‍सरसाइज़ से ब्‍लड शुगर लेवल को सामान्‍य रखने में मदद नहीं मिल पाती है। इसे मैनेज करने के लिए लाइफस्‍टाइल में किए गए बदलाव कभी-कभी असफल हो जाते हैं। एडवांस डायबिटीज़ में मुश्किलें बढ़ती रहती हैं और किडनी रोग या ह्रदय रोग का खतरा भी रहता है।

Picture credit : mannaplus.co.za

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डॉक्‍टर की सलाह को नज़रअंदाज़ करना

भले ही आप इंटरनेट से डायबिटीज़ से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं लेकिन डॉक्‍टर की सलाह सबसे जरूरी है। इसे आप नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं। अपने आसपास के लोगों से सलाह लेना और कुछ नया सीखना अच्‍छी बात है लेकिन ये डॉक्‍टर की सलाह की जगह नहीं ले सकता है। अपने डॉक्‍टर की सलाह और परामर्श को बिलकुल भी नज़रअंदाज़ ना करें। डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो हर इंसान में अलग-अलग होती है। इसलिए मधुमेह को कंट्रोल करने के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत जरूरी है।

डायबिटीज़ के कई मरीज़ों को प्राकृतिक तरीकों से ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में दिक्‍कत आती है।

डायबिटीज़ के अनियंत्रित होने के प्रभाव

  • जब डा‍यबिटीज़ नियं‍त्रण से बाहर हो जाती है तो कई तरह के प्रभाव शरीर पर देखने को मिलते हैं जो इस प्रकार हैं :
  • लैग क्रैंप, त्‍वचा के रंग में बदलाव, सनसनाहट कम होना।
  • आंखों की समस्‍या, रोशनी कम होना और आंखों में दर्द रहना। आगे चलकर ये कैटरैक्‍ट या ग्‍लूकोमा और डायबिटीक रेटिनोपैथी का रूप भी ले सकती है।
  • किडनी का फेल होना।
  • अगर मधुमेह की वजह से नसों पर प्रभाव पड़ता है तो पैरों, हाथों और शरीर के अन्‍य हिस्‍सों में सनसनाहट, सुन्‍नपन, जलन या दर्द आदि महसूस होता है।
  • अगर किसी आंतरिक अंग को नियंत्रित करने वाली नस पर प्रभाव पड़ता है तो उस मरीज़ को यौन या पाचन संबंधित विकार भी हो सकता है।
  • चक्‍कर आना या बेहोश होने जैसी स्थिति भी मधुमेह के अनियंत्रित होने पर आ सकती है। किसी जानकार को पहचानने में भी दिक्‍कत आ सकती है।
  • इस वजह से ह्रदय रोग, हार्ट अटैक या स्‍ट्रोक आदि का खतरा भी हो सकता है।

अनियंत्रित मधुमेह का ईलाज

Picture credit : healthfulnessguide.com

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डायबिटीज़ के नियंत्रण में ना होने का कारण हाई ब्‍लड कोलेस्‍ट्रॉल, हाई ग्‍लूकोज़ लेवल और हाई ब्‍लडप्रेशर भी हो सकता है। दवाओं और जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव कर इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। मधुमेह के ईलाज में इससे शरीर को होने वाली क्षति की रफ्तार को धीमा करना होता है। इसमें दवा, सर्जरी या अन्‍य कोई ईलाज भी शामिल हो सकता है। एक ट्रीटमेंट डाइट द्वारा शरीर में ग्‍लूकोज़ की मात्रा को नियंत्रित करना भी होता है। अगर मधुमेह अनियंत्रित है और मरीज़ कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं लेता है तो उसे कोई गंभीर समस्‍या हो सकती है।

मधुमेह के शुरुआती स्‍तर पर ध्‍यान ना देने पर ये कंट्रोल से बाहर हो जाती है। शुरुआत में ही ईलाज कर लेना या ब्‍लड शुगर लेवल को सामन्‍य रखने से आप किसी गंभीर नुकसान से बच सकते हैं। लाइफस्‍टाइल में बहुत थोड़े से बदलाव करके भी आप इस बीमारी पर जीत हासिल कर सकते हैं।

अनियंत्रित डायबिटीज़ के लक्षण

  • जब शरीर में ब्‍लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है तो इसका मतलब है कि आपकी डायबिटीज़ से कंट्रोल से बाहर जा चुकी है। ऐसे में मरीज़ को सामान्‍य से ज्‍यादा प्‍यास लगने लगती है और उसे बार-बार पेशाब भी आता है।
  • भूख बढ़ जाती है लेकिन ज्‍यादा खाने के बावजूद वजन कम होता रहता है। ये भी डायबिटीज़ के अनियंत्रित होने का एक संकेत है।
  • हमेशा थकान महसूस करना या थोड़ा सा काम करके भी बहुत थक जाना मधुमेह के अनियंत्रित होने का संकेत है। इसकी वजह से आपको चक्‍कर भी आ सकते हैं।
  • अगर अचानक से आपकी आंखों की रोशनी कम होने लगी है या आपको कम दिखने लगा है तो ये भी शरीर में ब्‍लड शुगर के बढ़ने का संकेत हो सकता है।
  • ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ने पर शरीर पर अपने आप ही घाव होने लगते हैं और धीरे-धीरे ये घाव खुद ही भर जाते हैं। किसी चोट या घाव का निशान अचानक दिखाई दे तो ये भी मधुमेह के अनियंत्रित होने का कारण हो सकता है।

हाथों और पैरौं में सनसनाहट

जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि ब्‍लड शुगर के बढ़ने पर मधुमेह कंट्रोल से बाहर हो जाता है और ऐसे में हाथों और पैरों में सनसनाहट या सुन्‍नपन महसूस होता है।

अगर आप स्‍वस्‍थ जीवन चाहते हैं तो बेहतर होगा कि अभी से अपने लाइफस्‍टाइल को ठीक कर लें वरना एक बार अगर मधुमेह ने अपना शिकंजा बना लिया तो आप इसके जाल से निकल नहीं पाएंगें।

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