डायबिटीक बच्‍चों के पैरेंट्स को ऐसे रखना चाहिए उनके बचपन का ख्‍याल

Picture credit : youtube.com

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ओबेसिटी यानि मोटापे की वजह से बच्‍चे अपने बचपन का पूरा मज़ा नहीं ले पाते हैं। वजन बढ़ने का असर उनके दिल की धड़कन पर भी पड़ता है और इस वजह से वो घर से बाहर जाकर नहीं खेल पाते हैं। इस मोटापे की वजह से कई खतरनाक बीमारियां जैसे डायबिटीज़, रक्‍तचाप और ह्रदय रोग आदि बच्‍चों को कम उम्र में ही घेर लेते हैं। सालों तक चली कई स्‍टडी में ये बात सामने आ चुकी है कि एशियाई लोगों को ह्रदय रोग आनुवांशिक मिले हैं।

नेशनल हैल्‍थ सर्वे ने 15 से 49 उम्र के लोगों पर सर्वे किया जिनमें से 8.9 से लेकर 29 प्रतिशत तक 6 से 18 साल की उम्र के बच्‍चे मोटापे से ग्रस्‍त थे, 1.5 से 7 प्रतिशत शहरों में रहने वाले ज्‍यादा मोटे लोग थे। ज्‍यादा अमीर बच्‍चों में मोटापा सबसे ज्‍यादा था जोकि 22 प्रतिशत था। वहीं कई बच्‍चे खाने के विकार जैसे एनोरैक्‍सिया और बुलिमिआ की वजह से भी मोटापे से ग्रस्‍त हो गए।

टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी अधिकतर 40 उम्र के लोगों में होती है और 12 उम्र से ज्‍यादा आयु वाले बच्‍चों में भी इसका खतरा रहता है। इस सबका कारण बच्‍चों में खानपान की गलत आदतें और शारीरिक व्‍यायाम की कमी है। बचपन में  मोटापे से ग्रस्‍त होना एक बड़ी सेहत समस्‍या है। बच्‍चों में बढ़ते मोटापे की वजह से उनमें डायबिटीज़ की बीमारी भी पनप रही है। पिछले दो दशकों में बच्‍चों और युवाओं में ओबेसिटी के मामलों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हुई है। आज 30 प्रतिशत युवा और 25 प्रतिशत बच्‍चे मोटापे से ग्रस्‍त हैं। ऐसे में बच्‍चों को बड़ा करना और स्‍वस्‍थ रखना बहुत मुश्किल काम है।

अगर किसी बच्‍चे को डायबिटीज़ जैसी घातक बीमारी है तो बच्‍चे के साथ-साथ माता-पिता की जिम्‍मेदारी और मुश्किल बढ़ जाती है। आजकल बेहतर ट्रीटमेंट और ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल को मॉनिटर करने की वजह से मधुमेह को मैनेज करना आसान हो गा है लेकिन फिर भी इस रोग से जुड़ी मुश्किलें कम नही हुई हैं।

एक बार ये बीमारी हो जाए तो पूरी जिंदगी के लिए ईलाज और दवा का साथ हो जाता है। एक्‍सरसाइज़ से ब्‍लड शुगर को कम किया जा सकता है इसलिए डायबिटीज़ से ग्रस्‍त बच्‍चों को रोज़ शारीरिक क्रियाएं करनी चाहिए। इंसुलिन को संतुलित रखने के लिए बच्‍चों को समय-समय पर स्‍नैक खाने को दें और उसके पास ग्‍लूकोज़ टैबलेट, शुगर क्‍यूब्‍स और कैंडी आ‍दि रखें।

Picture credit : viva.co.id

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ये टिप्‍स आएंगें काम

  • अपने बच्‍चे की खानपान की आदतों को सुधारें।
  • उसके खाने और स्‍नैक का रोज़ शेड्यूल तैयार करें।
  • रोज़ दिन में चार बार ब्‍लड ग्‍लूकोज़ टेस्‍ट करें।
  • इस बात का जरूर ध्‍यान रखें कि आपके बच्‍चे के हाथ में हमेशा अपने ब्‍लड शुगर लेवल को लो रखने के लिए कुछ ना कुछ स्‍नैक जरूर होना चाहिए। उसे ग्‍लूकोज़ टैबलेट्स दे सकते हैं।
  • रोज़ एक्‍सरसाइज़ करने की आदत डालें।
  • मधुमेह का बहाना लेकर अपने बच्‍चे को किसी अच्‍छे काम से बचने की आदत ना डालें
  • एकेडमिक, सोशल और स्‍पोर्ट्स एक्टिविटीज़ में हिस्‍सा लेने के लिए उसे प्रेरित करते रहें।
  • डायबिटीज़ से जुड़े पैरेंट्स ग्रुप और सपोर्ट ग्रुप का हिस्‍सा बनते रहें।

डायबिटीक बच्‍चों को इन चीज़ों से रखें दूर

सभी फलों थोड़ा-बहुत तो शुगर होता है और इससे वजन बढ़ सकता है और वजन बढ़ने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। इसकी जगह आप घर पर ही ताजा फलों का रस बना सकते हैं।

सफेद चावल खाने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा दोगुना हो जाता है। सफेद चावलों का नकारात्‍मक प्रभाव ब्‍लड शुगर के स्‍तर पर पड़ता है और इनमें मौजूद स्‍टार्च बच्‍चों में ब्‍लड शुगर के स्‍तर को बढ़ा सकता है। इसकी जगह ब्राउन राइस खाएं।

स्‍वाद के लिए कॉफी में सिरप, व्‍हिप्‍ड क्रीम, शुगर, आर्टिफिशियल स्‍वीटनर और कई अन्‍य चीज़ें डाली जाती हैं। इन चीज़ों से बच्‍चों का वजन बढ़ सकता है और फिर इससे अपने आप ही ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी बढ़ जाता है।

सोडा और स्‍वीटेंड ब्रेवरेज़ज भी बच्‍चों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। बच्‍चों को बाज़ार में मिलने वाले कोल्‍ड ड्रिंक्‍स और कोला आदि बहुत पसंद होते हैं लेकिन उन्‍हें इसके नुकसान के बारे में पता नहीं होता है। इनसे ना केवल वजन बढ़ता है बल्कि रक्‍त में शुगर का स्‍तर भी बढ़ जाता है और फिर अपने आप ही ये टाइप 2 डायबिटीज़ का कारण बनता है।

फ्रेंच फ्राइज़ और बर्गर आदि से वजन बढ़ जाता है। ओवरवेट होने पर रक्‍त में शुगर का स्‍तर बढ़ सकता है। बच्‍चों में मधुमेह का सबसे बड़ा कारण फास्‍ट फूड पर अधिक निर्भरता और व्‍यायाम से बढ़ती दूरी है। जितना हो सके इससे भी बच्‍चों को दूर रखें।

Picture credit : pritikin.com

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बच्‍चों में डायबिटीज़ के लक्षण

बॉडी के टिश्‍यूज़ से फ्लूइड निकल जाता है जिससे ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर में असंतुलन पैदा होता है। आपके बच्‍चे को ऐसे में सामान्‍य से ज्‍यादा कोल्‍ड ड्रिंक या मीठा खाने का मन कर सकता है।

अगर आपका बच्‍चा बार-बार वॉशरूम जाता है और आपको इसमें कुछ अजीब लग रहा है तो इस बात को नज़रअंदाज़ बिलकुल ना करें। ये हाई शुगर लेवल का लक्षण हो सकता है।

अगर बच्‍चे को ज्‍यादा थकान होती है तो इसका मतलब है कि उसके शरीर में एनर्जी के लिए रक्‍तकोशिकाओं में शुगर ग्‍लूकोज़ में तब्‍दील नहीं हो पा रही है।

लो इंसुलिन लेवल के कारण एनर्जी की कमी होती है और ऐसे में भूख लगना सामान्‍य बात है। बच्‍चे को बहुत ज्‍यादा भूख लगना भी डायबिटीक कीटोएसिडोसिस का सामान्‍य लक्षण है। ये एक स्थिति है जिसमें बच्‍चे में मधुमेह का पता नहीं चलता है। इसमें शरीर ग्‍लूकोज़ बनाने के लिए इंसुलिन का उत्‍पादन बंद कर देता है और इससे फैट घटने लगता है।

टाइप 1 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त लड़कियों में यीस्‍ट इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा रहता है। इसकी वजह से ज्‍यादा छोटे बच्‍चों में डायपर रैश हो सकते हैं।

अगर आपके बच्‍चे में ये सब या इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे रहा है तो इसे नज़रअंदाज़ बिलकुल ना करें। बच्‍चों की सेहत से ज्‍यादा जरूरी पैरेंट्स के लिए और कुछ नहीं होता है। आपकी थोड़ी सी सतर्कता भी आपके बच्‍चे को किसी मुश्किल खतरे से बचा सकती है।

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