डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए वरदान है रागी, जानिए इसके फायदे

Picture credit : dreamstime.com

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आज वापिस साबुत अनाज का दौर आ गया है। सेहत को साबुत अनाज चमत्‍कारिक फायदे पहुंचाते हैं। डायबिटीज़ के मरीज़ों को रागी का बहुत लाभ होता है। हैल्‍थ विशेषज्ञों का भी कहना है कि रागी ना केवल स्‍वस्‍थ बल्कि डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।

सेहत को फायदा पहुंचाने वाले इस अनाज में कर्नेल के सभी तीन हिस्से – फाइबर-घने ब्रान, रोगाणु और एंडोस्पर्म शामिल हैं एवं इसके प्रसंस्‍करण के दौरान कोई भी आवश्यक पोषक तत्व नष्‍ट नहीं होता है। वहीं दूसरी ओर रिफाइंड अनाज में प्रोसेसिंग के दौरान एंडोस्‍पर्म हो जाता है। पोषण से युक्‍त और रोगों को दूर करने वाला रागी साबुत अनाजों में महत्‍वपूर्ण माना जाता है। ये अनाज कडे तापमान और उच्‍च जलवायु में उगता है। दक्षिण भारत में इसे नाचनी के नाम से जाना जाता है और यहां पर भारत की कुल उत्‍पादकता में से 58 प्रतिशम रागी की खेती होती है। अफ्रीका में मुख्‍य रूप से रागी की खेती की जाती है।

हालांकि, ये आश्‍चर्य की बात है कि भारत में रागी के फायदों और न्‍यूट्रिशनल वैल्‍यू को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। 1950 तक भारत में रागी का सेवन प्रचलित था लेकिन चावल और अन्‍य अनाजों के आ जाने के बाद रागी की लोकप्रियता में कमी आ गई। दक्षिण भारत के लोग रागी को अपने भोजन में जरूर शामिल करते हैं।

रागी में मौजूद पोषक तत्‍व

रागी में कैल्‍शियम की प्रचुरता होती है जिससे वजन कम रहता है। इसमें फाइबर भी उच्‍च मात्रा में होता है जोकि अनीमिया की दिक्‍कत को दूर करता है। ये स्‍ट्रोक के खतरे को भी कम करता है। ये ग्‍लूटन फ्री होता है और बच्‍चों के लिए भी इसे उत्तम खाद्य माना जाता है। बढ़ती उम्र के निशान, शरीर को ठंडक देना, ताकत देना, कब्‍ज दूर करना, थायराएड में आराम, ब्‍लड कोलेस्‍ट्रॉल कम करना आदि जैसी समस्‍याओं से रागी छुटकारा दिलाती है। रागी अमीनो एसिड का स्रोत है जोकि ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित करता है।

डायबिटीज़ में फायदेमंद

Picture credit : thehealthsite.com

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इस अनाज में प्रचुर मात्रा में पॉलीफेनॉल्‍स होते हैं और इसमें चावल, गेहूं और मक्‍का से ज्‍यादा डायटरी फाबइर्स मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स भी कम होता है इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए रागी फायदेमंद होती है। ये भूख कम करती है और स्‍टार्च के अवशोषण को कम कर ब्‍लड शुगर को सामान्‍य रखती है।

100 ग्राम रागी में 378 कैलोरी, 11 ग्राम प्रोटीन, फैट 0.4 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 72.9 ग्राम होता है।

मधुमेह के रोगियों के लिए रागी के लाभ इसकी रसायनिक प्रकृति में निहित हैं। रागी में अमीनो एसिड होता है एवं अमीनो उसिड को आइसोल्‍यूसाइन एक महत्‍वपूर्ण घटक है जोकि डायबिटीज़ के मरीज़ों में रक्‍तप्रवाह और ब्‍लड शुगर के लेवल को नियंत्रित रखती है। साथ ही ये मांसपेशियों, हड्डियों और त्‍वचा के टिश्‍यूज़ की भी मरम्‍मत करती है। इससे शरीर में नाइट्रोजन का स्‍तर बनाए रखने में मदद मिलती है और ये दिमाग को शांत रखकर मानसिक संतुलन बढ़ाने में मदद करती है।

वहीं मेथिओनाइन जैसा अमीनो एसिड कई वेजिटेरियन डाइट में कम रहता है और इसलिए रागी अमीनो एसिड पाने का सबसे आसान तरीका है। इसमें ये अमीना एसिड पर्याप्‍त मात्रा में होता है जिससे त्‍वचा और बाल स्‍वस्‍थ रहते हैं। मेथिओनाइन सल्‍फर लेसिथिन नामक तत्‍व का उत्‍पादन करता है जोकि कोलेस्‍ट्रॉल घटाने, किडनी को सुरक्षा देने और लिवर फैट को कम करने में मदद करता है। ट्रिप्‍टोफैंस एक प्राकृतिक रिलैक्‍सेंट है जोकि बेचैनी, इनसोमनिया और डिप्रेशन एवं माइग्रेन से निजात दिलाता है। इससे भूख भी कम लगती है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। इसमें ग्रोथ हार्मोंस भी होते हैं इसलिए ये शरीर के विकास के लिए भी फायदेमंद होती है। थ्रेओनाइन शरीर में प्रोटीन के स्‍तर को बनाए रखता है और लिवर फैट बनने से रोकता है और दांतों के एनेमल को भी सुरक्षित रखता है।

रक्‍त में शुगर की मात्रा बहुत ज्‍यादा होने पर डायबिटीज़ की बीमारी होती है। डाइट से ही हमें शुगर यानि ग्‍लूकोज़ मिलता है। हार्मोन इंसुलिन पैंक्रियाज़ में बनता है जोकि शरीर की कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ को अवशोषित करने में मदद करता है। पैंक्रियाज़ द्वारा पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन का उत्‍पादन ना कर पाने की स्थिति में टाइप 1 मधुमेह की बीमारी हो जाती है। वहीं इंसुलिन को प्रतिक्रिया ना देने पर टाइप 2 डायबिटीज़ होती है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन उत्‍पादन को प्रतिक्रिया नहीं दे पाती हैं। डायबिटीज़ की बीमारी में बार-बार मूत्र आना और भूख बढ़ना सामान्‍य लक्षण है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए न्‍यूट्रिशनल मैनेजमेंट बहुत जरूरी होता है। एक संतुलित डायबिटीक आहार में 1500-1800 कैलोरी प्रतिदिन होना चाहिए और सभी खाद्य पदार्थ लो ग्‍लाइसेमिक इंडेक्‍स के होने चाहिए। जी आई से ब्‍लड शुगर लेवल और डाइट में बदलाव का संकेत मिलता है। लो जीआई वाले फूड्स में फल, सब्जियां, बींस, ओट्स और कई तरह के साबुत अनाज आते हैं। इन फूड्स में विटामिन और फाइबर उच्‍च मात्रा में होता है। साथ ही ये प्रोटीन और कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेट से भी प्रचुर होता है जबकि इसमें फैट कम होता है। सेहतमंद और स्‍वाद दोनों का ही बेजोड़ मेल है रागी।

रागी के अन्‍य से‍हतमंद फायदे

Picture credit : tarladalal.com

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  • रागी खाने से भूख कम लगती है जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
  • हड्डियों को मजबूत करने के लिए रागी का सेवन कर सकते हैं।
  • कोलेस्‍ट्रॉल कम कर शरीर को राहत देता है।
  • रागी प्रोटीन और अमीनो एसिड का उत्तम स्रोत माना जाता है।
  • अनीमिया को ठीक करने और पाचन तंत्र को दुरुस्‍त रखने में भी रागी मदद करती है।
  • बढ़ती उम्र के निशानों को भी रागी से दूर किया जा सकता है।  
  • नियमित रागी का सेवन करने से डायबिटीज़ मेलिटस का खतरा कम हो जाता है क्‍योंकि इसमें डायटरी फाइबर्स और पॉलीफेनॉल्‍स की उच्‍च मात्रा होती है। चावल, गेहूं और अन्‍य अनाजों की तुलना में इसमें फाइबर ज्‍यादा होता है। रागी में मौजूद फाइबर की उच्‍च मात्रा के चलते ब्‍लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो आपको रागी को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए लेकिन अगर आप स्‍वस्‍थ हैं तो भी आप इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं क्‍योंकि ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है।

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