डाइट सोडा पीते हैं तो आप जल्‍दी बन सकते हैं डायबिटीज़ के मरीज़

लोगों को आर्टिफिशियल स्‍वीटनर्स के हानिकारक प्रभावों को लेकर चेताया जाता रहा है कि इनका सेवन करने से कैंसर आदि जैसे कई तरह के भयंकर रोग हो सकते हैं। हाल ही में एनुअल एक्‍सपेरिमेंट बायोलॉजी कॉन्‍फ्रेंस के मुताबिक डाइट सोडा से टाइप 2 डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारियां होने का भी खतरा बढ़ जाता है।

विसकोनिन एंड मारक्‍यूट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस परिणाम तक पहुंचने के लिए चूहों पर रिसर्च की थी। तीन सप्‍ताह तक अलग-अलग ग्रुप के चूहों को दो शुगर, ग्‍लूकोज़ और फ्रूक्‍टोज़ की हाई डोज़ दी गई और दो आर्टिफिशियल स्‍वीटनर – एस्‍पारटेम और एसेसुलफैम पोटाशियम दिया गया। इसके बाद शोधकर्ताओं ने चूहों के रक्‍त में एक ऐसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया जिससे उनके मेटाबॉलिक बदलाव का पता लगाया जा सके। इसे मेटाबोलोमिक्‍स कहा जाता है।

ये स्‍वीटनर्स और शुगर देने के तीन सप्‍ताह देने के बाद ही चूहों में डायबिटीज़ का खतरा पाया गया। इनके रक्‍त में बायोकेमिकल बदलाव देखे गए जोकि फैट और एनर्जी मेटाबॉलिज्‍म में बदल गए।

डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जिसमें हमारे शरीर में ग्‍लूकोज़ लेवल संतुलित नहीं रहता है। ये प्रक्रिया इंसुलिन नामक हार्मोन द्वारा नियंत्रित की जाती है। इस अवस्‍था में शरीर इंसुलिन प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है या इंसुलिन बनना ही बंद हो जाता है। डाइट में ज्‍यादा शुगर की वजह से डायबिटीज़ हो सकती है जिसमें इंसुलिन बनाने वाली मशीन बाधित हो जाती है।

Picture credit : blogs.webmd.com

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इस वजह से आर्टिफिशियल स्‍वीटर्न्‍स को खतरनाक बताया गया है आर इनका सेवन करने से डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन डायबिटीज़ और ओबेसिटी दोनों का एकसाथ होना व्‍यक्‍ति के लिए और भी ज्‍यादा खतरे का कारण बन जाता है। स्‍वीटनर युक्‍त फूड और ड्रिंक्‍स का अधिक सेवन 1950 में ही शुरु हो गया था।

शोधकर्ताओं को इस बात की जानकारी तो थी कि शुगर के कारण डायबिटीज़ का खतरा रहता है लेकिन स्‍वीटनर के प्रभावों को लेकर उनमें स्‍पष्‍टता नहीं थी। अगर स्‍वीटनर से डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है तो ये शुगर से अलग तरह से शरीर को प्रभावित करती है।

आइए अब जान लेते हैं कि डाइट सोडा का शरीर पर क्‍या प्रभाव पड़ता है और इसके क्‍या नुकसान हैं :

वजन को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी होता है और अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो ये आपके लिए और भी ज्‍यादा जरूरी हो जाता है। ज्‍यादा वजन या मोटापे के कारण मुश्किलें भी बढ़ सकती है। ज्‍यादा वजन के कारण भी शरीर को इंसुलिन बनाने में दिक्‍कत आती है।

डाइट सोडा पीने पर शरीर को कैलोरी तो मिलती है लेकिन इससे किसी तरह का पोषण नहीं मिलता है। साथ ही इसमें अनहैल्‍दी चीज़ों का प्रयोग किया जाता है जोकि शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।

लंबे समय तक डाइट सोडा पीने से वजन भी बढ़ता है और कई अन्‍य तरह के रोग होने का भी खतरा रहता है।

रोज़ सोडा या डाइट सोडा का सेवन करने से डायबिटीज़ का खतरा भी बढ़ जाता है और ये बात कई रिसर्च में साबित हो चुकी है।

Picture credit : diabeticsweekly.com

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डाइट ड्रिंक और टाइप 2 डायबिटीज़

शोधकर्ताओं का कहना है कि शुगरयुक्‍त सॉफ्ट ड्रिंक्‍स का संबंध टाइप 2 डायबिटीज़ से होता है और रिसर्च में इसका संबंध आर्टिफिशियली स्‍वीटंड बेवरेज़ेज से भी बताया गया है।

एक फ्रेंच स्‍टडी के मुताबिक टाइप 2 डायबटीज़ का खतरा उन लोगों में भी ज्‍यादा होता है जो कभी-कभी डाइट सॉफ्ट ड्रिंक्‍स पीने वाले लोगों की तुलना में रोज़ इनका सेवन करते हैं।

शोधकर्ताओं ने स्‍टडी में इस बात पर भी गौर किया कि प्रतिभागियों की डाइट को मॉनिटर नहीं किया गया था और इसलिए यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि डाइट सोडा टाइप 2 मधुमेह का कारण है।

डाइट सोडा से अन्‍य नुकसान

स्‍वीटनर्स के सेवन को लेकर कई बार चर्चा की जा चुकी है और इसमें ये भी कहा गया है कि इसकी वजह से डिप्रेशन से लेकर पेट से जुड़ी समस्‍याएं तक हो सकती हैं और जैसा कि हमने पहले भी बताया कि ये टाइप 2 डायबिटीज़ का कारण भी होता है।

डाइट सोडा की जगह आप ये ड्रिंक्‍स पी सकते हैं :

चॉकलेट मिल्‍क शेक

वर्कआउट या व्‍यायाम के बाद लो फैट चॉकलेट मिल्‍क पीना बेहतर रहता है लेकिन बाज़ार में मिल रहे पैक्‍ड ब्रांडेड चॉकलेट मिल्‍क में शुगर होता है जोकि आपके लिए खतरनाक हो सकता है। इसे कुछ इस तरह आप घर पर भी बना सकते हैं। 1 गिलास दूध में 3 चम्‍मच कोकोआ पाउडर, 2 टेबलस्‍पून आर्टिफिशयल स्‍वीटनर डालें। इससे 70 प्रतिशत कैलारी लेने से बचा सकता है। वहीं बाज़ार में मिलने वाले चॉकलेट मिल्‍क की तुलना में इसमें 16 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 2 ग्राम फैट भी कम होता है। अपने चॉकलेट मिल्‍क में आप कुछ बादाम भी डाल सकते हैं।

मीठी चाय

शुगर फ्री आईस्‍ड टी और आईस्‍ड टी क्रिस्‍टल कार्बोहाइड्रेट से मुक्‍त होती हैं। घर पर बड़ी आसानी से आप इसे बना सकते हैं। चाय में अपने पसंदीदा फल को क्रश कर के डाल दें। थोड़ी देर उबलने के बाद इसे छान लें और इसमें अपना पसंदीदा स्‍वीटनर डालें। इस हैल्‍दी चाय को पीने से आप तरोताज़ा महसूस करेंगें।

ऑरेंज जूस संतरे का रस

ऑरेंज जूस का स्‍वाद बहुत बढिया होता है लेकिन एक कप संतरे के रस में 26 ग्राम कार्बोहाइड्रेट  होता है। इससे तो बेहतर होगा कि आप एक पूरा संतरा ही खा लें। इसमें मौजूद फाइबर से पेट भरा हुआ रहता है। किसी ऐसे ब्रांड का ऑरेंज जूस चुनें जिसमें 3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 15 कैलोरी और रोज़ाना की विटामिन सी की 100 % जरूरत की पूर्ति करता है।

नींबू का रस लैमनेड

गर्मी के मौसम में मधुमेह के मरीज़ों के लिए नीबू पानी से अच्‍छा और सेहतमंद और कुछ नहीं हो सकता। रेस्‍टोरेंट में परोसे गए 16 आउंस के लैमनेड में 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। इससे बेहतर होगा कि आप घर पर ही लैमनेड तैयार कर लें। पानी में नीबू का रस डालें और इसमें जीरो कैलोरी आर्टिफिशल स्‍वीटनर भी मिलाएं। इसमें कार्बोहाइड्रेट और कैलारी 0% रहेगा।

अगर आप मधुमेह की बीमारी में बेवरेज़ेज के शौकीन हैं तो आपको इन पेय पदार्थों को ट्राई करना चाहिए लेकिन ध्‍यान रहे इन्‍हें घर पर बनाना ज्‍यादा सेहतमंद रहता है। मार्केट में उपलब्‍ध ब्रांडेड बेवरेज को तो हाथ भी ना लगाएं।

डायबिटीज़ के मरीज़ अगर हैल्‍दी डाइट जैसे अपने आहार में साबुत अनाज को शामिल करें तो वो इस बीमारी से छुटकारा भी पा सकते हैं। आपको फास्‍टफूड से बिलकुल दूर रहना चाहिए वरना ये आपकी परिस्थिति और भी ज्‍यादा खराब कर सकती है। हालांकि, इसमें भी कुछ बदलाव कर इसे खाया जा सकता है।

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