टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से लड़कियों में मासिक चक्र हो सकता है गड़बड़

Picture credit : thehealthsite.com

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टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त लड़कियों में अनियमित माहवारी का खतरा ज्‍यादा रहता है। एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि जिन लड़कियों को टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी होती है उनके पीरियड्स रेगुलर नहीं होते है एवं पीरियड्स का अनियमित होना पीसीओडी यानि पॉलीसिस्‍टिक ओवरी सिंड्रोम का एक लक्षण है।

पीसीओडी एक हार्मोनल डिस्‍ऑर्डर है जिसमें ओवरी का साइज़ बड़ा हो जाता है और उसके बाहरी हिस्‍से में छोटे-छोटे सिस्‍ट बनने लगते हैं। इसकी वजह से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है क्‍योंकि इसमें इंसुलिन रेसिस्‍टेंस की समस्‍या आती है।

टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त लड़कियों को अपने माहवारी से जुड़ी समस्‍याओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

क्‍या होती है अनियमित माहवारी

पिछले पीरियड्स की तुलना में अनियमित माहवारी में रक्‍तस्राव असामान्‍य होता है। इसमें आपको डेट से पहले या बाद में रक्‍तस्राव हो सकता है। साथ ही इसमें बहुत ज्‍यादा या बहुत कम ब्‍लीडिंग भी होती है।

पहले पीरियड से 21 दिनों से कम समय और 35 दिनों से ज्‍यादा समय तक पीरियड्स ना होना अनियमित माहवारी कहलाता है।

हर महिला को कभी ना कभी अनियमित माहवारी की दिक्‍कत होती ही है। महिलाओं में उनका मासिक चक्र उनके सेहतमंद होने का संकेत देता है। इसलिए अगर आपके पीरियड्स समय पर नहीं आते हैं तो आपको इसके कारण का पता लगाकर समय रहते ही इसका ईलाज शुरु कर देना चाहिए।

अनियमित माहवारी के कारण

  • स्‍ट्रेस
  • असंतुलित डाइट
  • गर्भनिरोधक गोलियां
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
  • मेनोपॉज
  • जीवनशैली से जुड़ी खराब आदतें
  • थायराएड रोग
  • अनीमिया
Picture credit : newsnation.in

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अनियमित माहवारी के लक्षण

अनियमित माहवारी के कारण पीरियड्स के दौरान पेट में बहुत दर्द होता है और रक्‍तस्राव भी ज्‍यादा रहता है। इससे फैटी लिवर रोग का खतरा रहता है और फर्टिलिटी संबंधित रोग या एंड्रोमेट्रियल कैंसर की संभावना भी बढ़ जाती है।

यह स्‍टडी जर्नल ऑफ क्‍नीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्‍म में प्रकाशित हो चुकी है। टीम के शोधकर्ताओं का कहना है कि लड़कियों में अनियमित माहवारी और मधुमेह का पता चलने पर लाइफस्‍टाइल में कुछ जरूरी बदलाव कर मेटाफोर्मिन के सेवन से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।

ये पीसीओडी या पीसीओएस के साथ-साथ डायबिटीज़ का ईलाज भी हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि 20 प्रतिशत लड़कियों को अनियमित माहवारी की समस्‍या थी। इनमें से कई लड़कियों में टेस्‍टोस्‍टेरॉन का लेवल भी ज्‍यादा था जोकि पीसीओएस का कारण है।

हालांकि, अनियमित माहवारी से ग्रस्‍त सभी लड़कियों में टेस्‍टोस्‍टेरॉन का लेवल ज्‍यादा नहीं था। इनमें अनियमित माहवारी के अन्‍य कारण भी हो सकते हैं जैसे गर्भावस्‍था, हार्मोंस का असंतुलन, संक्रमण, ट्रॉमा या किसी दवा का असर।

शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज़ से ग्रस्‍त लड़कियों को अपना ज्‍यादा ध्‍यान रखना चाहिए और अपनी मेंस्‍ट्रुअल हैल्‍थ को सुधारने के लिए उन्‍हें डायबिटीज़ ट्रीटमेंट से ज्‍यादा की जरूरत है।

क्‍या कहती है रिसर्च

इस रिसर्च में 14 साल तक की 370 लड़कियों को शामिल किया गया था। साल में एक बार सभी प्रतिभागियों से उनकी अनियमित माहवारी के बारे में रिपोर्ट ली जाती है और उनके सेक्‍स हार्मोन, ब्‍लड ग्‍लूकोज़ और इंसुलिन का लेवल भी चैक किया जाता था।

इस स्‍टडी में सामने आया है कि जिन लड़कियों का वजन बहुत ज्‍यादा था उनमें कम मोटी लड़कियों की तुलना में अनियमित माहवारी की समस्‍या कम थी। अनियमित माहवारी के साथ हाई ब्‍लड शुगर और इंसुलिन की समस्‍या से 25 लड़कियां ग्रस्‍त थीं।

इस बदलाव के बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि इसका संबंध अनियमित माहवारी से हो सकता है क्‍योंकि इसमें मेटाबॉलिज्‍म में बदलाव के प्रति ओवरी प्रतिक्रिया देने लगती है।

ये संबंध किशोरावस्‍था में साफ पाया गया और युवा लड़कियों में भी ऐसा देखा गया एवं इसने कुछ समय बाद कार्डियोवस्‍कुलर रोग या टाइप 2 डायबिटीज़ का रूप ले लिया।

अगर आपकी माहवारी भी अनियमित है तो आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। ओबेसिटी और टाइप 2 डायबिटीज़ से बचने के लिए डॉक्‍टर आपके लाइफस्‍टाइल में कुछ उचित बदलाव कर सकते हैं।

Picture credit : hotzehwc.com

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अनियमित माहवारी से बचने के लिए क्‍या करें

  • खाने में पूरी तरह से कैलोरी को बंद ना करें और ना ही बहुत ज्‍यादा वजन घटाएं। संतुलित वजन रखें और लो फैट फूड का सेवन करें।
  • रोज़ व्‍यायाम जरूर करें। ऐसी एक्‍सरसाइज़ करें जिनसे रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्‍स बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं।
  • तनाव से दूर रहें। स्‍ट्रेस की वजह से ओव्‍यूलेशन की प्रकिया धीरे या छूट जाती है जिसकी वजह से पीरियड्स देर से आते हैं। शरीर के साथ-साथ मानसिक तनाव भी अनियमित माहवारी का कारण हो सकता है। ज्‍यादा मात्रा में कैफीन का सेवन, अचानक से वजन का बढ़ना और घटना या किसी बीमारी की वजह से शरीर पर स्‍ट्रेस हो सकता है।
  • अपनी डाइट में सुधार करें। बहुत ज्‍यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से अनियमित माहवारी की समस्‍या हो सकती है। कहते हैं कि जो महिलाएं शाकाहारी खाद्य पदार्थ ज्‍यादा खाती हैं उनमें अनियमित माहवारी की दिक्‍कत ज्‍यादा रहती है। अन्‍य महिलाओं की तुलना में वेजिटेरियन महिलाओं को फाइबर ज्‍यादा खाने की जरूरत है। ये फाइबर एस्‍ट्रोजन के उत्‍पादन को प्रभावित करता है। डॉक्‍टर से आपका एस्‍ट्रोजन लेवल चैक करने के लिए कहें।
  • डॉक्‍टर के परामर्श से जड़ी-बूटियों का सेवन करें। कुछ जड़ी बूटियां अनियमित माहवारी की समस्‍या से निजात दिलाने में मददगार साबित हो सकती हैं। वाइटेक्‍स, वाइल्‍ड याम, रेड क्‍लोवर, सेज, अनार, रसभरी की पत्तियां और डोंग क्‍वाई जैसी जड़ी-बूटियां फायदेमंद रहती हैं।
  • कुछ प्राकृतिक नुस्‍खों और जड़ी-बूटियों का ज्‍यादा मात्रा में या लगातार सेवन करना खतरनाक साबित हो सकता है। ये दूसरी दवाओं के साथ मिलकर आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। डॉक्‍टर से पूछे बिना कोई भी प्राकृतिक नुस्‍खा ना अपनाएं।
  • संतुलित और पोषणयुक्‍त आहार लें। आयरन युक्‍त खाद्य जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, डेयरी प्रॉडक्‍ट्स, मांस, अंडे, बादाम, दालें, अनाज और सिट्रस फल और सब्जियां खाएं।
  • अगर आपको पढ़ाई, काम या रिलेशनशिप से जुड़ा कोई भी स्‍ट्रेस है तो उसे खत्‍म करने की कोशिश करें। रिलैक्‍स रहें।

अगर आपका मासिक चक्र अनियमित है तो आपको डायबिटीज़ का खतरा रहता है वहीं टाइप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्‍त लड़कियों पर भी अनियमित मासिक चक्र का खतरा मंडराता रहता है। अगर कुछ समय से आपके पीरियड्स समय पर नहीं आ रहे हैं तो डॉक्‍टर से संपर्क करने में देरी ना करें।

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