पत्‍नी मोटी है तो पति को हो सकती है डायबिटीज़ की बीमारी

Picture credit : diabetes.euroscicon.com

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शरीर में अतिरिक्‍त वसा जमा होने के कारण मोटापे की समस्‍या होती है जोकि कई अनेक बीमारियों का कारण बनता है। लंबे समय से विशेषेज्ञों ने इंसान के शरीर पर ओबेसिटी के प्रभाव की जांच कर रहे हैं लेकिन हाल ही में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि पत्‍नी के मोटे होने की वजह से उन्‍हें तो डायबिटीज़ का खतरा रहता ही है साथ ही उनके पति पर भी मधुमेह का खतरा मंडराता है। इस स्‍टडी में पता चला कि मोटापे की वजह से महिलाओं में मध्‍य उम्र में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा रहता है लेकिन अगर पति मोटे हों तो उनसे पत्‍नी की सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि बीवी के मोटे होने का असर पति की सेहत पर पड़ता है। अगर पति मोटा है तो इससे उनमें तो डायबिटीज़ का खतरा बढ़ ही जाता है लेकिन अगर पत्‍नी भी मोटी है तो इसका असर भी उनकी ही सेहत पर पड़ता है। वहीं पति के मोटा होने पर महिलाओं की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है और ना ही उनमें टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है। रिसर्च की मानें तो अगर पति मोटे होते हैं तो इससे सिर्फ उनमें ही टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है और इसका असर उनकी पत्‍नी की सेहत पर नहीं पड़ता है जबकि पुरुषों के साथ इसका उल्‍टा है। अगर कोई पुरुष मोटा है तो इसकी वजह से तो उसमें डायबिटीज़ का खतरा रहता ही है साथ ही पत्‍नी के मोटा होने पर भी उन पर इस बीमारी का खतरा रहता है।

रिसर्च के निष्‍कर्षों की मानें तो पार्टनर के मोटापे से संबंधित डायबिटीज़ के परिणाम बिलकुल सही हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि 55 से अधिक उम्र के लोगों में मोटापे की वजह से पार्टनर में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा पाया गया है।

इस स्‍टडी को 2017 में यूरोपियन एसोसिएशन फॉर स्‍टडी ऑफ डायबिटीज़ वार्षिक बैठक में पेश किया गया था। इसमें बताया गया कि एक पार्टनर में ओबेसिटी होने पर दूसरे को भी टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है। दोनों पार्टनर्स की एक जैसी गलत खानपान की आदतों और शारीरिक व्‍यायाम की कमी की वजह से ऐसा होता है।

दोनों पार्टनर्स में डायबिटीज़ के खतरे की वजह से दोनों को ही साथ में अपनी खानपान की आदतों को बदलना चाहिए और व्‍यायाम को भी बढ़ा देना चाहिए। दो लोग मिलकर काम करेंगें तो फायदा ज्‍यादा होगा।

कम नींद का भी पड़ता है असर

कम नींद लेने से वजन बढ़ने के साथ-साथ मधुमेह का खतरा भी रहता है। नींद की कमी से प्री डा‍यबिटीज़ हो सकती है। दरअसल, शरीर में नींद की कमी का सीधा असर इंसुलिन की संवेदनशीलता पर पड़ता है जोकि आगे चलकर डायबिटीज़ का रूप ले लेता है। इंसुलिन का कार्य शरीर को ग्‍लूकोज़ को एनर्जी में बदलने में मदद करना है। इंसुलिन संवेदनशीलता में कोशिकाएं हार्मोन का प्रयोग करने में असफल रहती हैं और इससे ब्‍लड शुगर बढ़ जाता है।

कुछ अध्‍ययनों में ये बात सामने आई है कि जो लोग कम नींद लेते थे वो पर्याप्‍त नींद लेने वाले लोगों की तुलना में ज्‍यादा मोटे थे। अधिक वजन और मोटापे की वजह से डायबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है।

ओवरवेट होने की वजह से ह्रदय रोगों और डायबिटीज़ के अलावा कई और भी सेहत संबंधित रोग होने का खतरा रहता है। हम आपको कुछ आसान सी चीज़ों के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें अपने हाथ में रखकर आप मोटापे को मात दे सकते हैं।

खाने में साबुत अनाज करें शामिल

साबुत अनाज से शरीर को एनर्जी मिलती है और इससे सभी आवश्‍यक पोषक तत्‍व भी मिल जाते हैं। प्रोसेस्‍ड अनाज को छोड़कर साबुत अनाज का सेवन करें जैसे बाजरा, दलिया, गेहूं और ज्‍वार आदि। सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस लें।

ट्रांस फैट से रहें दूर

फास्‍टफूड, स्‍ट्रीट स्‍नैक, फ्राइड फूड, कुकीज़, मारगेरिन और स्‍प्रेड्स में ट्रांस फैट मौजूद रहता है। ये सब लेबल देखकर खरीदें और अगर इन पर लेबल नहीं है तो इनका विकल्‍प ढूंढें।

खाना जरूर खाएं

संतुलित आहार लेना बहुत जरूरी है। अपनी डिनर प्‍लेट में आधा हिस्‍सा सब्जियों, एक तिहाई अनाज, एक तिहाई प्रोटीन और 150 मिली दूध/दही/डेज़र्ट को दें।

शुगर को रखें सीमित

शुगर कैलोरी का प्रमुख स्रोत है जिसका शरीर में कोई काम नहीं होता है और ये फैट को जमा करता है। रिफाइंड शुगर से दूर रहें और इस बात का ध्‍यान रखें कि ऐसे कई खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें प्राकृतिक शुगर भी होती है। इसलिए इनसे दूर रहें और रोज़ 10 प्रतिशत से कम कैलोरी का सेवन करें।

खाने में जरूर होना चाहिए प्रोटीन

प्रोटीन पचने में समय लगाता है। इसका मतलब है कि प्रोटीन खाने के बाद लंबे समय तक आपका पेट भरा रहेगा और ये शरीर का फैट घटाने में भी मदद करता है। प्रोटीनयुक्‍त खाद्य जैसे स्‍प्राउट्स, मटर, अंडे आदि खाने चाहिए।

ये तो थी मोटे लोगों की बात लेकिन अगर आपको लगता है कि पतले लोगों को डायबिटीज़ का खतरा नहीं रहता है तो आप गलत हैं। पतले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा कम होता है लेकिन फिर भी ये लोग इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं खासतौर पर बूढे लोग। इस मामले में ये स्‍पष्‍ट रूप से नहीं कहा जा सकता है कि कितने पतले लोगों को इस बीमारी का खतरा रहता है। ये लोग भले ही मोटे ना हों लेकिन शरीर पर थोड़ा बहुत वसा खासतौर पर पेट पर फैट इन्‍हें टाइप 2 डायबिटीज़ का मरीज़ बना सकता है।

जेनटिक्‍स से आप जान सकते हैं कि किसी मोटे व्‍यक्‍ति को डायबिटीज़ क्‍यों नहीं हुई और किसी पतले इंसान को ये बीमारी हे गई। आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक व्‍यायाम ना के बराबर होता है और इस वजह से आपको डायबिटीज़ तो क्‍या अन्‍य कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इससे वजन का कोई लेना-देना नहीं है। सिगरेट में निकोटीन होता है जो रक्‍त वाहिकाओं को सख्‍त और संकरा बना देता है जिसकी वजह से शरीर में रक्‍त प्रवाह में दिक्‍कत आती है। डायबिटीज़ की वजह से ह्रदय रोग का खतरा रहता है और आप धूम्रपान से होने वाले अन्‍य खतरों से खुद को ग्रसित नहीं करना चाहते होंगें।

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