दांतों का ख्‍याल नहीं रखते हैं तो आपको हो सकती है डायबिटीज़ की बीमारी

Picture credit : express.co.uk

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ओरल हैल्‍थ और हाईजीन का ध्‍यान रखकर आप मुंह को साफ और कई तरह की बीमारियों से बच सकते हैं। कई लोग सोचते हैं कि दिन में दो बार ब्रश करने से दांतों की सफाई हो गई और सिर्फ इतने भर से ही वो कई बीमारियों से बच जाएंगें। लेकिन आपको बता दें कि ओरल हाईजीन और डेंटल हैल्‍थ सफेद चमकते दांतों से कई ज्‍यादा है और खराब दांतों के कारण आप डायबिटीज़ तक की चपेट में आ सकते हैं।

इस बात को लेकर स्‍टडी की गई है कि दांतों की सेहत से भी मधुमेह का पता लगाया जा सकता है।

दांतों और ग्‍लूकोज़ टॉलरेंस के बीच गहरा संबंध पाया गया है। इस स्‍टडी को एंडोक्राइन सोसायटी के 100वीं वार्षिक मीटिंग के दौरान पेश किया गया था। शोधकर्ताओं ने 20 साल की उम्र के युवाओं और 2009 से 2014 के बीच डेंटिस्‍ट से चिकित्‍सा करवा रहे 9,670 लोगों के रिकॉर्ड का अध्‍ययन किया।

इस रिसर्च में शामिल प्रतिभागियों के कीड़े, कैविटी और अन्‍य पीरिओडोंटल रोग को शोधकर्ताओं ने रिकॉर्ड किया।

ग्‍लूकोज़ टोलरेंस और दांतों के बीच संबंध जानने के लिए शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के उम्र, लिंग, रंग, जीवनशैली, डा‍यबिटीज़ के आनुवांशिक होने, धूम्रपान, शराब का सेवन, शिक्षा और गरीबी रेखा को आधार बनाया।

निष्‍कर्ष में पाया गया कि 45.57 प्रतिशत लोगों में दांत ना होने पर ग्‍लूकोज़ टोलरेंस खत्‍म हो चुकी थी, वहीं असामान्‍य ग्‍लूकोज़ टोलरेंस ग्रुप 67.61 प्रतिशत और डायबिटीज़ मेलिटस 82.87 प्रतिशत दर्ज किया गया।

इस रिसर्च की मानें तो दांतों के रोग का संबंध डायबिटीज़ से होता है। ओरल हाईजीन में ब्रश करना, जीभ साफ करना आदि शामिल है। वहीं अगर आप अपने आहार में कुछ प्राकृतिक चीज़ों को शामिल कर लेंगें तो आपके दांत हमेशा के लिए स्‍वस्‍थ रह सकते हैं।

मजबूत मसूड़ों के लिए ये चीज़ें फायदेमंद होती हैं :

Picture credit : youtube.com

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सेब

सेब में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है जोकि क्‍लींजिंग एजेंट के तौर पर काम करता है। इसमें मौजूद मैलिक एसिड सलाईवा के उत्‍पादन को बढ़ाता है और इससे मुंह का बैक्‍टीरिया नष्‍ट होता है। सेब मसूड़ों को भी मजबूत बनाता है।

नट्स और बीज

नट्स और बीज से दांतों पर पड़े दाग-धब्‍बे दूर होते हैं। अखरोट और फ्लैक्‍स सीड में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड भी मसूड़ों से जुड़े रोग के खतरे को कम करता है और दांतों को नुकसान से बचाता है।

विटामिन सी युक्‍त फूड

संतरे, बैरीज़ और नीबू में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जोकि मसूड़ों को संक्रमण से बचाता है।

मजबूत दांतों के लिए फूड

दूध

दूध में मौजूद कैल्शियम दांतों को मजबूत बनाता है जबकि प्रोटीन मुंह में एसिड के स्‍तर को कम करता है।

चीज़

चीज़, कैल्शियम, फास्‍फोरस और प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है और इससे दांत सफेद, मजबूत और कीड़ों से सुरक्षित भी रहते हैं। उम्र के साथ घटने वाले एनेमल को भी ये बचाता है।

स्‍ट्रॉबेरी

स्‍ट्रॉबेरी में कई सारे एंटीऑक्‍सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो दांतों को स्‍वस्‍थ बनाए रखते हैं। फल में मौजूद एस्‍कॉर्बिक एसिड दांतों को सफेद बनाए रखने में मदद करता है।

मधुमेह शरीर के बाकी हिस्‍सों की तरह मुंह की सेहत को भी नुकसान पहुंचाती है। इसकी वजह से दांतों से संबंधित कई तरह की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। मधुमेह में दांतों से संबंधित रोग या मुंह में किसी अन्‍य तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। सांस से बदबू आने की एक वजह डायबिटीज़ भी हो सकती है क्‍योंकि ये मधुमेह की बीमारी का एक गंभीर लक्षण है। इस बीमारी में शरीर में ब्‍लड शुगर का लेवल बहुत बढ़ जाता है जिस वजह से शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है या शरीर में इंसुलिन बनना बिलकुल ही बंद हो जाता है, इस बीमारी को डायबिटीज़ कहा जाता है। जब शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर अनियंत्रित या अनियमित हो जाता है तो मरीज़ को मसूड़ों से संबंधित बीमारी होने लगती है जिस कारण सांसों से बदबू आनी शुरु हो जाती है।

यहां तक कि 10 में से 5 मामलों में टाइप 2 डायबिटीज़ की वजह से मरीज़ को अपने सारे दांत ही खोने पड़े हैं। बच्‍चों में टाइप 1 डायबिटीज़ होता है और इस उम्र में दांतों से संबंधित परेशानियां अधिक रहती हैं।

अगर आप मधुमेह जैसे साइलेंट किलर से बचना चाहते हैं तो अपनी जीवनशैली में योग और व्‍यायाम को शामिल करें। डायबिटीज़ हो भी गया है तो इससे दांतों को बचाने के लिए अपने ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें, दांतों की नियमित सफाई का ध्‍यान रखें और नियमित डेंटिस्‍ट के पास जांच के लिए जाते रहें।

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