दुनियाभर में डायबिटीज़ बन रहा है कैंसर की वजह

Picture credit : familycare.com

Picture credit : familycare.com

हाल ही में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि मेटाबॉलिक रोगों से संबंधित कैंसर खासतौर पर डायबिटीज़ और ओबेसिटी के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। शोधकर्ताओं की टीम के अनुसार दुनियाभर में कैंसर के 5.6 प्रतिशत मामले डायबिटीज़ और हाई बॉडी मास इंडेक्‍स की वजह से पैदा हुए हैं।

इसमें 3.9 प्रतिशत मामले डायबिटीज़ से जुड़े हैं जबकि इससे दोगुने मामले हाई बीएमआई के कारण हैं।

इस स्‍टडी के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जोनाथन पीयरसन स्‍टूटर्ड का कहना है कि कभी-कभी ओबेसिटी का संबंध कैंसर से हो सकता है। डायबिटीज़ और कैंसर के बीच संबंध के बारे में हाल ही में पता चला है। इस स्‍टडी में पाया गया कि मोटापा कई तरह के कैंसर का कारण बन सकता है और दुनियाभर में इस वजह से कैंसर के मरीज़ों की संख्‍या भी बढ़ रही है।

पिछले चार दशकों में इन दोनों ही बीमारियों के मरीज़ों की संख्‍या बढ़ रही है। 1980 से 2002 के बीच वैश्विक स्‍तर पर डायबिटीज़ के मरीजों की संख्‍या 800,000 थी जबकि इस समय से ओबेसिटी के मामलों में अब तक 30 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।

कैंसर का खतरा महिलाओं में 30 प्रतिशत और पुरुषों में 20 प्रतिशत है। वहीं शोधकर्ता की मानें तो पहले के समय में कैंसर का प्रमुख कारण धूम्रपान हुआ करता था लेकिन अब डायबिटीज़ और ओवरवेट लोगों में भी कैंसर का खतरा बढ़ रहा है।

पुरुषों में ओबेसिटी और डायबिटीज़ की वजह से 40 प्रतिशत लिवर कैंसर जबकि महिलाओं में तीन चौथाई यूट्रिन कैंसर और ब्रेस्‍ट कैंसर होता है। एक नई स्‍टडी में डायबिटीज़ और हाई बीएमआई की वजह से 1980 से 2002 के बीच 175 देशों में 18 नए तरह के कैंसर का पता चला है।

मधुमेह और बीएमआई की वजह से कोलोन, मूत्राशय ग्रंथि, लिवर और अग्‍नाश्‍य में ट्यूमर बनने का खतरा रहता है। सिर्फ मधुमेह और बीएमआई ही इन कैंसर की वजह नहीं हो सकते हैं लेकिन ये इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

आपको बता दें कि डायबिटीज के मुख्‍य दो प्रकार के मरीज़ पाए जाते हैं जिनमें टाइप 1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ है। टाइप 1 डायबिटीज़ बच्‍चों और टाइप 2 डायबिटीज़ 35 की उम्र पार करने वाले वयस्‍कों में ज्‍यादा होती है।

बीएमआई और मधुमेह दोनों को मिलाकर एंड्रोमैट्रियल कैंसर के मामले 38.4 प्रतिशत रहे जबकि ब्रेस्‍ट कैंसर में ये आंकड़ा सिर्फ 8.9 प्रतिशत रहा। पुरुषों में मधुमेह और बीएमआई की वजह से लिवर कैंसर के मामले 23.3 प्रतिशत रहे लेकिन कोलेरक्‍टल कैंसर के मामले केवल 8.6 प्रतिशत रहे।

इसके अलावा पश्चिमी देशों में ज्‍यादा कमाने वाले हाई बीएमआई वाले लोगों में 16 प्रतिशत कैंसर के मामले सामने आए। लेकिन यही आंकड़ा एशिया प्रशांत क्षेत्रों में ज्‍यादा कमाई करने वाले हाई बीएमआई वाले लोगों में मात्र 5 प्रतिशत रहा।

दुनियाभर में मोटापा और डायबिटीज़ बड़ी तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मरीजों में सबसे ज्‍यादा गॉल ब्‍लैडर, लिवर और एंडोमेट्रियम कैंसर देखा गया।

कैंसर से बेहतर है कि आप डायबिटीज़ और मोटापे को नियंत्रित कर लें वरना ये बीमारी आपकी जान ले सकती है।

डायबिटीज़ से बचने के टिप्‍स

Picture credit : Youtube

Picture credit : Youtube

  • कई तरह के फल-सब्जियां खाएं, प्रोटीन लें और फैट के बेहतर स्रोतों का सेवन करें।
  • रोज़ाना कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं। खूब सारे फल खाएं और शरीर को डिहाइड्रेट रखने के लिए हर्बल टी पीएं।
  • ना के बराबर शारीरिक क्रिया करने वाले लोगों में सबसे ज्‍यादा मधुमेह का खतरा रहता है।
  • तनाव की वजह से कई तरह के हार्मोन रिलीज़ होते हैं जिससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है।
  • या बेहतर नींद ना ले पाने की स्थिति में डायबिटीज़ और ओबेसिटी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सोने के लिए एक तय वक्‍त रखें और पर्याप्‍त नींद लें। रोज़ाना 7 से 8 घंटे की नींद बहुत जरूरी होती है। पर्याप्‍त नींद ना लेने से ना केवल इसका असर शरीर पर पड़ता है बल्कि इससे आपका काम और जीवन भी प्रभावित होने लगता है।
  • किसी भी बीमारी से बचने के लिए समय-समय पर जरूरी जांच करवाना भी जरूरी होता है। डायबिटीज़ को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है वो भी तब जब आप पूरी तरह से सावधानी बरतें। नियमित चेकअप करवाते रहें और खुद भी अपने अंदर दिखने वाले लक्षणों पर गौर फरमाएं। किसी भी तरह का लक्षण दिखने पर तुरंत उसका उपाय करें। जीवनशैली में कुछ चंद बदलाव करने से आप लंबे समय तक स्‍वस्‍थ रह सकते हैं।

Read source

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *