डायबिटीज़ की बेहतरीन दवा है एक्‍सरसाइज़

Picture credit : health.harvard.edu

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डायबिटीज़ एक जीवनशैली संबंधित रोग है जोकि आपकी रोज़मर्रा की खराब आदतों के कारण होती है। खराब और असंतुलित आहार और व्‍यायाम की कमी के कारण आज बड़ी तेजी से मधुमेह के मरीज़ों की संख्‍या बढ़ रही है। अगर आप अपनी जीवनशैली में थोड़ा सा भी बदलाव कर लें तो काफी हद तक आप इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं। वैसे तो अब दवाओं से भी इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन डॉक्‍टर भी थोड़ा शारीरिक व्‍यायाम और ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए डाइट में बदलाव करने के लिए कहते हैं।

लेकिन जीवनशैली में बदलाव के साथ भी दवाओं का सेवन करना जरूरी होता है इसलिए कई मरीज़ सिर्फ दवाओं पर ही निर्भर रहते हैं। हालांकि, हाल ही में एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि दवाओं और जीवनशैली को नियंत्रित कर मधुमेह को प्रभावी रूप से कंट्रोल किया जा सकता है।

इस स्‍टडी में पता चला है कि दवाओं और जीवनशैली दोनों में से अगर आप थोड़ा सा भी बदलाव अपन लाइफस्‍टाइल में ले आएं तो प्री डायबिटीज़ को डायबिटीज़ बनने से 58 प्रतिशत तक रोका जा सकता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही ये बात सटीक बैठती है। 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में जीवनशैली में बदलाव कर मधुमेह के खतरे को 71 प्रतिशत तक कम कर दिया गया।

जीवनशैली में लाएं ये प्रमुख बदलाव

  • संतुलित वजन रखें और ओबेसिटी से बचें
  • सप्‍ताह में 4-5 दिन एरोबिक एक्‍सरसाइज़ करें
  • सप्‍ताह में दो बार से ज्‍यादा नॉन एरोबिक एक्‍सरसाइज़ ना करें।
Picture credit : primetimeparenting.com

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एक क्‍नीनिकल ट्रायल में 98 नॉन इंसुलिन डिपेंडेंट टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने इनके ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर पर जीवनशैली के बदलाव और दवाओं की जरूरत पर अध्‍ययन किया। प्रतिभागियों को दो ग्रुप में बांटा गया जिसमें 34 मरीज़ों को स्‍टैंडर्ड केयर ग्रुप और 64 मरीज़ों को लाइफस्‍टाइल ग्रुप में बांटा गया। सभी को दवाएं लेने के लिए कहा गया लेकिन लाइफस्‍टाइल ग्रुप के लोगों को सप्‍ताह में 5 से 6 ट्रेनिंग सेशन भी दिए गए जिसमें डाय‍ट्री प्‍लान भी शामिल था जिसका काम इनके बीएमआई को 25 तक करना था।

12 महीने तक इन प्रतिभागियों में पाया गया कि दवा लेने वाले मरीज़ों की तुलना में लाइफस्‍टाइल वाले ग्रुप में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का लेवल ज्‍यादा नियंत्रित पाया गया। इसका मतलब है कि दवाओं, एक्‍सरसाइज़ और डाइट में बदलाव कर आप बड़ी आसानी से मधुमेह को कंट्रोल कर सकते हैं। डायबिटीज़ के मरीज़ों के ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल पर दवाओं से ज्‍यादा असर शारीरिक व्‍यायाम का पड़ता है।

टेक्‍नोलॉजी की वजह से आज हम बड़ी आसानी से एक ही दवा से अपनी बीमारी को कंट्रोल तो कर सकते हैं लेकिन शारीरिक व्‍यायाम और पोषित आहार अब भी डायबिटीज़ या अन्‍य किसी बीमारी को रोकने का सबसे असरदार तरीका है।

बेहतर ब्‍लड सर्कुलेशन के लिए डायबिटीज़ के मरीज़ कर सकते हैं ये एक्‍सरसाइज़ -:

Picture credit : http://beyondnutrition-rdn.com

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स्‍ट्रेच

स्‍ट्रेचिंग एक्‍सरसाइज़ से तनाव कम होता है और पूरे शरीर की मांसपेशियां क्रियाशील होती हैं जिससे रक्‍तस्राव बेहतर हो पाता है। विभिन्‍न मांसपेशियों को स्‍ट्रेच करने से खासतौर पर जो हिस्‍सा डायबिटीज़ से प्रभावित हो उसमें रक्‍त स्राव बेहतर हो पाता है। सप्‍ताह में दो बार शरीर की प्रमुख मांसपेशियों की स्‍ट्रेचिंग करना जरूरी है।

पैरों और एड़ी में रक्‍तस्राव के लिए आप अलग से स्‍ट्रेचिंग भी कर सकते हैं क्‍योंकि इन हिस्‍सों पर सबसे ज्‍यादा मधुमेह असर करता है।

एंकल रोटेशन

इससे एडियों, तलवों और पैरों में रक्‍तस्राव बढ़ जाता है। एंकल को रोटेट करने के लिए एक आरामदायक कुर्सी पर बैठ जाएं और जमीन पर पैरों को रख दें। सीधे पैर को जमीन से 12 ईंच तक ऊपर उठाएं और पैरों की अंगुलियों को शरीर के सामने रखें। अंगूठे को गोलाकार में घुमाएं। 10 बार घुमाने के बाद दूसरे पैर में भी ऐसा ही करें।

एरोबिक एक्‍सरसाइज़

एरोबिक एक्‍सरसाइज़ का फायदा शरीर के निचले हिस्‍से पर ज्‍यादा होता है। इसमें डांस, वॉक, तैराकी और बाइकिंग शामिल है। इस दौरान अपने पैरों में आरामदायक जूते जरूर पहनें जिससे पैरों को जरूरी आराम मिल सके।

ऐसी कई एक्‍सरसाइज़ हैं जिनसे मधुमेह के मरीज़ों को फायदा हो सकता है। आइए जानते हैं उन एक्‍सरसाइज़ के बारे में जो डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फायदेमंद होती हैं।

वॉकिंग – वॉकिंग को आप कभी भी आप कहीं भी कर सकते हैं इसलिए ये सबसे आसान एक्‍सरसाइज़ है साथ ही ये लोगों के बीच सबसे ज्‍यादा पॉपुलर भी है। डायबिटीज़ के मरीज़ों को ये एक्‍सरसाइज़ बहुत फायदा पहुंचाती है। मधुमेह के मरीज़ों को रोज़ 30 मिनट से 1 घंटे तक ब्रिस्‍क वॉकिंग करनी चाहिए। सप्‍ताह में तीन बार 30 मिनट की सैर करना फायदेमंद रहता है। इससे आपके शारीरिक व्‍यायाम की क्षमता भी बेहतर होती है।

ताई चि – ये एक्‍सरसाइज़ धीमी गति से की जाती है जिससे दिमाग और शरीर को रिलैक्‍स रखा जाता है। साल 2009 में यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के शोधकर्ताओं ने 62 कोरियाई महिलाओं पर अध्‍ययन किया था। इन महिलाओं को दो ग्रुप में बांट दिया गया था। इसमें एक कंट्रोल ग्रुप और दूसरा एक्‍सरसाइज़ ग्रुप था जिन्‍हें रोज़ ताई चि की प्रैक्‍टिस करवाई गई। ताई चि सेशन को जल्‍दी खत्‍म करने वाले ग्रुप की महिलाओं में ब्‍लड शुगर कंट्रोल में बेहतर बदलावा देखा गया। इसके अलावा इससे उनमें एनर्जी और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य भी बेहतर हुआ।

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