डाायबिटीज़ की बीमारी से आपकी रक्षा कर सकती है गुणकारी हल्‍दी

 

Picture credit : Only Pure Nature

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हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ न्‍यूकैसल न्‍यूट्रासियूटिकल्‍स रिसर्च ग्रुप के शोधकर्ताओं ने टाइप 2 डायबिटीज़ के ईलाज में ओमेगा 3 फैट के साथ हल्‍दी के असर पर शोध किया है। शोधकर्ता जानना चाहते थे कि क्‍या हल्‍दी से टाइप 2 डायबिटीज़ को नियंत्रित किया जा सकता है या फिर इससे बचाव संभव है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि हल्‍दी में मौजूद करक्‍यूमिन तत्‍व को ओमेगा 3 फैट से मिलाने पर ये टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी से बचाव या उसे देरी करने में मददगार साबित हो सकती है।

टाइप 2 डायबिटीज़ की बीमारी में शरीर में सूजन की समस्‍या रहती है जिसका असर इंसुलिन के स्राव और क्रिया पर भी पड़ता है। इस स्‍टडी में खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले दो बायोएक्टिव यौगिक करक्‍यूमिन और ओमेगा 3 फैट को शामिल किया गया था। ये दोनों ही बहुत महत्‍वपूर्ण एंटी-इंफ्लामेट्री यौगिक हैं।

करक्‍यूमिन, हल्‍दी में पाया जाता है जोकि अदरक के परिवार से है और आमतौर पर इसका प्रयोग खाने में रंग के लिए किया जाता है। भारत में हल्‍दी को इसके औषधीय गुणों के कारण भी जाना जाता है।

सदियों से हल्‍दी का प्रयोग घाव, मोच, चोट और सूजन के ईलाज में किया जाता रहा है। आजकल भारत में हल्‍दी का प्रयोग कम होता जा रहा है क्‍योंकि अब लोग पश्चिमी फास्‍टफूड ज्‍यादा खाने लगे हैं जिसकी वजह से टाइप 2 डायबिटीज़ के मामले बहुत बढ़ गए हैं। यहां तक कि अब तो भारत में ये बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है और अब वो दिन भी दूर नहीं है जब भारत में ये किसी महामारी की तरह फैल चुकी होगी।

ताजा हल्‍दी क्‍यों है फायदेमंद

Picture Credit : Youtube

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इस रिसर्च में प्रतिभागियों को तीन समूह में बांट दिया गया। एक ग्रुप के लोगों को हल्‍दी का सेवन करने के लिए कहा गया तो वहीं दूसरे ग्रुप को ओमेगा 3 फैट का और तीसरे ग्रुप को इन दोनों चीज़ों का सेवन करने को कहा गया।

हल्‍दी और ओमेगा 3 फैट्स में एंटी-इंफ्लामेट्री गुण अलग-अलग पाए जाते हैं इसलिए शोधकर्ता इस पर अलग से रिसर्च करना चाहते थे और मरीज़ पर इसके प्रभाव के बारे में जानना चाहते थे। उनका मानना है कि इन दोनों चीज़ों को एक साथ लेने पर ये सुरक्षित रहती हैं और इनका कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं होता है और ये डायबिटीज़ की दवा की तरह ही असरकारक भी है।

किस तरह हल्‍दी होती है फायदेमंद

  • हल्‍दी इंसुलिन का उत्‍पादन करने वाले बीटा सेल्‍स को सुरक्षित रखती है। स्‍टडी में पाया गया है कि हल्‍दी खाने से बीटा सेल्‍स तेजी से बढ़ते हैं और लंबे समय तक रहते हैं।
  • हल्‍दी किडनी के लिए भी फायदेमंद होती है। ये रक्‍त से क्रिएटिनाइन और यूरिया को साफ करती है जोकि एक तरह से किडनी का कार्य है।
  • कैंसर से लड़ने में भी हल्‍दी मददगार साबित होती है। कैंसर रिसर्च यूके के अनुसार हल्‍दी कैंसर पैदा करने वाली कोशिकाओं को खत्‍म करती है और उन्‍हें बढ़ने से भी रोकती है। ब्रेस्‍ट कैंसर, पेट का कैंसर और त्‍वचा के कैंसर में हल्‍दी बहुत असरकारक होती है।
  • हल्‍दी पाचन तंत्र को भी मजबूत करती है। गैस्‍ट्रोपैरेसिस से ग्रस्‍त मरीज़ों के लिए हल्‍दी बहुत फायदेमंद साबित होती है।
  • हल्‍दी एक एंटीऑक्‍सीडेंट है जो जीवन के लिए ऑक्‍सीजन की तरह काम करती है। ये शरीर में स्‍वस्‍थ कोशिकाओं को ऑक्‍सीकरण से रोकती है।
  • डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए हल्‍दी एक प्राकृतिक दवा है और इसे किसी भी रूप में बड़ी आसानी से अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसका प्रयोग कई दवाएं बनाने में भी किया जाता है जैसे कि आयुर्वेद और पांरपरिक चीनी दवाईयां। इसमें मौजूद औषधीय तत्‍वों के कारण इस जडी-बूटी को मेडिकल साइंस में भी महत्‍वपूर्ण माना जाता है।

इन बीमारियों में है फायदेमंद

Picture Credit : Before it's News

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  • पेट दर्द
  • पेट संबंधित रोग
  • कैंसर
  • अर्थराइटिस
  • पेप्टिक अल्‍सर
  • सूजन
  • विटलिगो
  • सोरायसिस
  • अल्‍जाइमर
  • ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस और सूजन को कम करने के लिए भी डाइट में हल्‍दी को शामिल किया जा सकता है।

कैसे करें प्रयोग

  • दो चम्‍मच गूसबैरी जूस में एक चुटकी हल्‍दी डालें। दोनों को मिक्‍स करें और सुबह खाली पेट लें। इससे ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
  • दालचीनी भी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए फायदेमंद होती है। दालचीनी से ब्‍लड शुगर लेवल को 24 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। खाने में एक चुटकी हल्‍दी और दो चुटकी दालचीनी डालें। दूध में हल्‍दी और दालचीनी मिलाकर भी सुबह पी सकते हैं।
  • हल्‍दी के साथ शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है। हल्‍दी के दूध में शहद डालें और सुबह पी लें। हालांकि, शहद का सेवन करने से पहले एक बार अपने डॉक्‍टर से सलाह जरूर कर लें।

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