एलोवेरा खाने से ठीक हो सकती है मधुमेह जैसी जानलेवा बीमारी

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दुनियाभर में डायबिटीज़ के मरीज़ बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं और इस वजह से सबसे ज्‍यादा मृत्‍यु हो रही हैं साथ ही ये बीमारी कई अन्‍य रोगों का भी कारक बन रही है। आज अधिकतर टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ नई, किफायती और प्रभावशाली दवाओं की वजह से अपनी इस बीमारी को नियंत्रित करने में सफल हो पाए हैं।

हाल ही में हुई एक स्‍टडी में अब यह बात भी सामने आई है कि एलोवेरा खाने से डायबिटीज़ और प्री डायबिटीज़ के मरीज़ों को फायदा होता है और इस औषधीय पौधे में एंटीडायबिटीक यौगिक पाए गए हैं।

इस अध्‍ययन में शामिल डायबिटीज़ के मरीज़ जिनका ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल 200 एमजी/डीएल से ऊपर था उनमें एलोवेरा की ट्रीटमेंट से फायदा देखा गया।

डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो जीवनभर पीछा नहीं छोड़ती है और अगर इसका ईलाज ना किया जाए तो अन्‍य अंगों को भी प्रभावित करने लगती है। दुनियाभर में 383 मिलियन लोग मधुमेह की बीमारी से जूझ रहे हैं जिनमें से ज्‍यादा मरीज़ टाइप 2 डायबिटीज़ के होते हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया कि 21 मिलियन लोग इस बीमारी से ग्रस्‍त है और इस वजह से साल 2012 में मरीज़ों ने इसके ईलाज पर 245 बिलियन डॉलर रुपए खर्च किए थे। 2030 तक ये खर्चा बढ़कर 490 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा।

सामान्‍य लोगों की तुलना में मधुमेह के मरीज़ों के लिए ज्‍यादा वैकल्पिक उपचार ढूंढने के प्रयास किए जाते हैं। इसी की एक लोकप्रिय औ‍षधि एलोवेरा है जिसका प्रयोग सदियों से चीन, इजिप्‍ट, ग्रीक, भारत, जापान और मेक्सिको में दवा के रूप में किया जाता रहा है।

फिलहाल एलोवेरा का प्रयोग त्‍वचा से संबंधित विकारों आदि में किया जाता रहा है एवं यह एक रेचक औ‍षधि है।

एलोवेरा में हैं दर्जनभर एक्टिव यौगिक

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एलोवेरा पौधे की पत्तियों का दवा में प्रयोग किया जाता है एवं इसके बाहरी हरे रंग के हिस्‍से और अंदर के जैल का प्रमुख रूप से प्रयोग होता है। इन दोनों से ही एलोवेरा की चीज़ें बनती हैं।

एलोवेरा के पौधे में 75 एक्टिव यौगिक जैसे विटामिंस, मिनरल्‍स, एंथराक्‍यूनोंस, मोनोसौचराइड, पॉलीसैचाराइड, लिग्निन, सपोनिंगस, सलिसिलिक एसिड, फाइटोस्‍टेरॉल और अमिनो एसिड होता है। इनमें से अधिकतर यौगिक ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को बेहतर करने में मदद करते हैं।

इसके अलावा एलोवेरा के पौधे में क्रोमियम, मैग्‍निशियम, मैंग्‍नींज और जिंक होता है जोकि इंसुलिन की प्रभावशीलता को बढ़ाकर ग्‍लूकोज़ मेटाबॉलिज्‍म बेहतर करता है।

एलोवेरा कई घातक बीमारियों जैसे अस्‍थमा, ग्‍लूकोमा, हाई ब्‍लड प्रेशर, इंफ्लामेंट्री बोवल रोग और डायबिटीज़ आदि में दवा का काम करता है। हालांकि एलोवेरा खाना लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रहा है इसलिए शोधकर्ता इसके प्रभाव को लेकर और ज्‍यादा रिसर्च करना चाहते हैं।

इस शोध के परिणाम तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने ओरल एलोवेरा का ब्‍लड ग्‍लूकोज़, हीमोग्‍लोबिन ए1सी, ओरल ग्‍लूकोज टॉलरेंस टेस्‍ट और डायबिटीक और प्रीडायबिटीज़ के कई कारकों पर रिसर्च की। उन्‍होंने पाया इसका प्रभाव सिर्फ ब्‍लड ग्‍लूकोज़ और एचबीए1सी पर पड़ा था। इससे पहले भी कई अध्‍ययनों में ये बात सामने आ चुकी है कि डायबिटीज़ जैसी घातक बीमारियों में प्राकृतिक औषधियां ज्‍यादा कारगर होती हैं।

आइए जानते हैं डायबिटीज़ के कुछ अन्‍य घरेलू नुस्‍खों के बारे में :

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  • सुबह खाली पेट करेले का जूस पीएं। दो-तीन करेले लें और उसमें से बीजों को निकाल दें और इनका जूस निकाल लें। इसमें थोड़ा पानी मिलाएं और इसे सुबह खानी पेट पी लें।
  • एक से डेढ़ चम्‍मच दालचीनी पाउडर को एक कप गर्म पानी में मिलाएं। रोज़ इस पानी को पीने से ब्‍लड शुगर का स्‍तर सामान्‍य रहता है।
  • रातभर के लिए दो चम्‍मच मेथीदाना पानी में भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट इस पानी को छानकर पीएं। कुछ महीने तक बिना रूके इस नुस्‍खे का सख्‍ती से पालन करें। इससे निश्‍चित ही ग्‍लूकोज़ लेवल सामान्‍य स्‍तर पर आएगा।
  • 2-3 आंवला लें और उसमें से बीज निकाल कर उसे ग्राइंड कर पेस्‍ट तैयार कर लें। अब इस पेस्‍ट को एक कपड़े में डालें और उसे दबाकर उसका रस निकाल लें। एक कप पानी में दो चम्‍मच आंवले का ये रस मिलाकर सुबह खाली पेट पीने से रक्‍त शर्करा का स्‍तर सामान्‍य रहता है।
  • मधुमेह की बीमारी के ईलाज में आम की पत्तियां भी फायदेमंद होती है। इससे भी रक्‍त में इंसुलिन के स्‍तर को नियंत्रित रखा जा सकता है। इसके अलावा ये ब्‍लड लिपिड प्रोफाइल को भी बेहतर करती है। रातभर के लिए पानी में 10 से 15 आम की पत्तियां भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को छान लें और खाली पेट इसे पीएं।

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