ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए निकाली नई Guidelines

अमेरिकन कॉलेज के फिजिशियन ने अब टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में ब्‍लड शुगर कंट्रोल लेवल के लिए नई गाइडलाइंस प्रकाशित की हैं। डॉक्‍टरों ने वर्तमान में चल रही थेरेपी को बदलकर मरीज़ों के लिए ब्‍लड शुगर के मॉडरेट लेवल को लाने के लिए जांच की थी।

हाल ही में हुई रिसर्चों पर गौर करें तो लगभग 30 मिलियन लोग टाइप 2 डायबिटीज़ के शिकार हैं एवं भारत में भी बड़ी तेजी से डायबिटीज़ के मरीज़ बढ़ रहे हैं।

टाइप 2 डायबिटीज़ का पता चलने के बाद डॉक्‍टर मरीज़ को एचबीए1सी टेस्‍ट करवाने का निर्देश देते हैं जिससे ब्‍लड शुगर के स्‍तर का पता लगाया जा सके। ये टेस्‍अ 2 से 3 महीने के अंतराल में किया जाता है और अगर एचबीए1सी स्‍कोर 6.5 से ज्‍यादा है तो इसका मतलब है कि आपको डायबिटीज़ की बीमारी हो चुकी है।

लेकिन कुछ स्‍टडी में ये बात सामने आई है कि अब यूएस में एचबी1एसी टेस्‍ट बहुत ज्‍यादा होने लगता है और इस ओवर टेस्टिंग की वजह से मरीज़ों को हाइपाग्‍लाइसेमिक ड्रग्‍स लेनी पड़ रही हैं।

इन ड्रग्‍स के कुछ हानिकारक प्रभाव भी हैं जैसे गैस्‍ट्रोइंटेस्‍टाइनल समस्‍याएं, ब्‍लड शुगर का बहुत ज्‍यादा लो होना, वजन बढ़ना और हार्ट फेल्‍योर।

इसके अलावा कुछ शोधकर्ताओं का कहना है कि बहुत ज्‍यादा टेस्‍ट करवाने से हेल्‍थकेयर में डायबिटीज़ मैनेजमेंट पर मरीज़ों का बोझ भी बढ़ रहा है। इसी संदर्भ में अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियन ने टाइप 2 डायबिटीज़ के ईलाज को बेहतर करने के लिए डॉक्‍टर्स को नई गाइडलाइंस दी हैं।

इससे पहले हुई एक स्‍टडी में ये बात सामने आई थी कि डायबिटीज़ 2 या 3 नहीं बल्कि 5 टाइप की होती है। असल में इस बीमारी के पांच प्रकार होते हैं और इनमें से कुछ ज्‍यादा ही खतरनाक होती हैं। अब डायबिटीज़ की पांच श्रेणियों की जानकारी की मदद से डॉक्‍टरों को इससे जुड़ी दिक्‍कतों को जानने में मदद मिलेगी और ईलाज को भी ज्‍यादा प्रभावशाली और मरीज़ के अनुकूल बनाया जा सकेगा।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के‍ लिए टिप्‍स

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  • प्रत्‍येक किलो वजन घटाने से मधुमेह का खतरा भी 16 प्रतिशत तक कम हो जाता है। स्‍वस्‍थ जीवनशैली और डाइट के ज़रिए वजन आसानी से घटाया जा सकता है।
  • कई तरह के फल-सब्जियां खाएं, प्रोटीन लें और फैट के बेहतर स्रोतों का सेवन करें। जिन फूड्स में ट्रांस फैट यानि की हाइड्रोजेनरेटेड फैट, प्रोसेस्‍ड फूड और शुगर ज्‍यादा होता है उनसे दूर रहें।
  • रोज़ाना कम से कम 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं। खूब सारे फल खाएं और शरीर को डिहाइड्रेट रखने के लिए हर्बल टी पीएं।
  • एक्‍सरसाइज़ से कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ज्‍यादा संवेदनशील हो जाती है। इसके लिए आप ब्रिस्‍क वॉक कर सकते हैं। 35-40 मिनट तक रोज़ हल्‍के व्‍यायाम से भी फायदा हो सकता है।
  • तनाव की वजह से कई तरह के हार्मोन रिलीज़ होते हैं जिससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। कई अध्‍ययनों में भी ये बात साबित हुई है कि मेडिटेशन करने से तनाव को कम किया जा सकता है। शारीरिक व्‍यायाम और सोशल सपोर्ट से तनाव को कम किया जा सकता है।
  • डायबिटीज़ को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है वो भी तब जब आप पूरी तरह से सावधानी बरतें। नियमित चेकअप करवाते रहें और खुद भी अपने अंदर दिखने वाले लक्षणों पर गौर फरमाएं।
  • अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम रखें और साबुत अनाज, मछली, चिकन और लो फैट डेयरी प्रॉडक्‍ट्स का सेवन करें। वजन को नियंत्रित रखने के लिए हर चीज़ को संतुलित मात्रा में खाएं।
  • दिन में दो बार खाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में खाने की आदत डालें। थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में स्‍नैक्‍स खाने से ब्‍लड शुगर का स्‍तर संतुलित रहता है।
  • ह्रदय को स्‍वस्‍थ रखने के लिए एरोबिक एक्‍सरसाज़ जैसे जॉगिंग और साइक्‍लिंग आदि करें। इस तरह की एक्‍सरसाइज़ अपने डॉक्‍टर से सलाह लेने के बाद ही करें।
  • समय-समय पर अपने ब्‍लड ग्‍लूकोज़ की जांच करवाते रहें।
  • कुछ लोगों डॉक्‍टर के बताए अनुसार दवाओं का सेवन नहीं करते हैं। समय पर दवा लें और जैसे डॉक्‍टर ने बताया है उसी तरह से दवा लें। दवा के डोज़ और मात्रा का ध्‍यान रखें।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ को लेकर नई रिसर्च होती रहती हैं। इनके बारे में जानें और ईलाज की नई तकनीकों के बारे में अपने डॉक्‍टर से परामर्श करें।
  • मधुमेह की वजह से कई मरीज़ों में डिप्रेशन की समस्‍या उभरने लगती है। दवाओं की मदद से डिप्रेशन को कम किया जा सकता है लेकिन बेहतर होगा कि कोई भी दवा लेने से पहले आप अपने डॉक्‍टर को अपने डिप्रेशन और इसकी वजह के बारे में बताएं।

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