टाइप 2 डायबिटीज़ की डाइट तैयार करते हुए ध्‍यान रखें ये बातें

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टाइप 2 डायबिटीज़ को स्‍वस्‍थ और संतुलित आहार से नियंत्रित किया जा सकता है और इस बीमारी की तरह अन्‍य कई रोगों को नियंत्रित करने में संतुलित आहार अहम भूमिका निभाता है। अपने लिए स्‍वस्‍थ डाइट प्‍लान बनाने के लिए आप इन बातों को ध्‍यान में रख सकते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए एक जैसी डाइट नहीं होती है। आपको कुछ ऐसा खाना चाहिए जिससे आपका ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहे। अगर आप प्री डायबिटीज़ या टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो आपको अपना ए1सी लेवल लो करने के लिए अपना खुद का पर्सनलाइज्‍ड डाइट चार्ट बनाना चाहिए जिससे आप मोटापा भी कम हो सके और इंसुलिन प्रतिरोध में भी कमी आए।

क्‍या है जरूरी

प्री डायबिटीज़ डाइट और डायबिटीज़ को पूरी तरह से ठीक करने वाली डाइट, ये दोनों एक ही बात है। इन दोनों में ही आपकी डाइट में साबुत खाद्यों को शामिल किया जाता है जिसमें नॉन स्‍टार्च सब्जियां, फल, स्‍वस्‍थ वसा और प्रोटीन को वरीयता दी जाती है। इन दोनों ही डाइट में कार्ब और कैलोरी की मात्रा को बहुत कम रखा जाता है और शारीरिक व्‍यायाम भी जरूरी होता है।

अपने लिए डायबिटीज़ डाइट तैयार करते हुए इन बातों को जरूर ध्‍यान में रखें।

फूड चुनते समय कार्बोहाइड्रेट की रखें जानकारी

फूड में कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर में जाने के बाद शुगर के रूप में परिवर्तित होकर रक्‍त में मिल जाता है। जिन खाद्यों में जी आई का लेवल ज्‍यादा होता है वो मध्‍यम या लो जीआई वाले फूड्स की तुलना में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को ज्‍यादा तेजी से बढ़ाते हैं। डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपने आहार में ऐसे खाद्यों को चुनना चाहिए जिनमें लो और मीडियम जीआई हो। अगर आप हाई जीआई वाले फूड खाते हैं तो इसको संतुलित करने के लिए आपको लो जीआई फूड खाने चाहिए।

इसमें आप इस बात का भी ध्‍यान रख सकते हैं कि किस तरह से आप कार्बोहाइड्रेट को ले सकते हैं जिससे इसका बुरा असर आपकी सेहत पर ना पड़े। एक बार के भोजन में 45 से 60 ग्राम कार्बोहाइड्रेट लिया जा सकता है। एक बार के स्‍नैक में 15 ग्राम या इससे कम कार्बोहाइड्रेट की मात्रा रखें। कार्बोहाइड्रेट युक्‍त फूड्स जिनमें लो जीआई होता है जैसे कि सूखे बींस और दालें और नॉन स्‍टार्च फूड और कुछ स्‍टार्च युक्‍त सब्जियां जैसे शकरकंद, फल और होलग्रेन ब्रेड और अनाज (गेहूं, होलव्‍हीट व्‍हाइट ब्रेड आदि) ले सकते हैं।

लो ग्‍लाइसेमिक फूड्स से होगा फायदा

जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया कि आपको वो फूड्स खाने चाहिए जिनमें जीआई लेवल कम हो। वसा और फाइबर भोजन के जीआई को कम करते हैं। सामान्‍य नियम के अनुसार जितना ज्‍यादा आप किसी खाद्य को पकाएंगें या प्रोसेस्‍ड करेंगें उतना ही ज्‍यादा उसमें जीआई की मात्रा बढ़ेगी। इसलिए ध्‍यान रखें कि आप किसी भी खाद्य को ज्‍यादा ना पकाएं।

किसी भी फूड का जीआई रेट अकेले खाने या किसी अन्‍य फूड के साथ खाने पर बदल जाता है। अगर आप कोई हाई जीआई वाला फूड खा रहे हैं तो आप इसे लो जीआई फूड के साथ खा सकते हैं। इससे ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल संतुलित रहता है।

प्‍लेट मैथेड आएगा काम

टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ प्‍लेट मैथेड से अपने लिए संतुलित भोजन तैयार कर सकते हैं। अपनी आधी प्‍लेट में नॉन स्‍टार्च सब्जियों, एक चौथाई स्‍वस्‍थ कार्बोहाइड्रेट और चौथे हिस्‍से में प्रोटीन को जगह दें। रोज़ाना आपको कितना मात्रा में इसका सेवन करना है, इसे एक कागज़ पर लिख लें। एक दिन में आपको 1,550 से 1650 कैलोरी की जरूरत होती है।

ओवरईटिंग से बचने के लिए करें ये काम

एनर्जी पाने के लिए प्रत्‍येक खाद्य की सही मात्रा चुनने की कोशिश करें। जैसे कि आप कौन सा फूड कितनी मात्रा में खा रहे हैं, ये भी बहुत जरूरी है। इससे वजन भी कम होता है और इस रतह आपकी बॉडी इंसुलिन का इस्‍तेमाल कर पाती है और ब्‍लड शुगर सामान्‍य हो जाता है।

डाइट सोड़ा पर रखें कंट्रोल

कई ड्रिंक्‍स आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप इन्‍हें घर पर तैयार करके ही पीएं ताकि आप अपनी बॉडी की जरूरत के अनुसार इन्‍हें तैयार कर सकें। ये टेस्‍टी ड्रिंक आपकी डायबिटीज़ डाइट में भी फिट होते हैं और आपकी स्‍वाद की ललक को भी पूरा करते हैं। आमतौर पर बाहर मिलने वाले सभी ड्रिंक्‍स में शुगर मिला होता है और ये आपके ब्‍लड शुगर लेवल को खराब कर सकते हैं। आप नीबू पानी, संतरे का जूस और चॉकलेट मिल्‍क आदि ले सकते हैं लेकिन इन्‍हें घर पर ही तैयार करें तो बेहतर होगा।

डाइट में फाइबर को करें शामिल

डायबिटीज़ डाइट में फाइबर युक्‍त चीज़ें शामिल करने से रक्‍त शर्करा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए आपको धीरे और सावधानी से इसका प्रयोग करना चाहिए। किसी भी तरह के स्‍वस्‍थ आहार में फाइबर बहुत जरूरी होता है लेकिन मधुमेह रोगियों के लिए फाइबर ज्‍यादा जरूरी होता है। फाइबर शरीर में कई तरह से काम करता है। ये ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को कम रखने में मदद करता है और मधुमेह रोगियों में यही सबसे अहम कार्य होता है। टाइप 1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ दोनों में ही फाइबर जरूरी होता है।

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