साल 2008 में हुए रिसेशन की वजह से बढ़ गए हैं डायबिटीज़ के मरीज़ : स्‍टडी

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2008 में हुए रिसेशन का असर दुनियाभर की अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ा था लेकिन आपको बता दें कि इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ा था। जी हां, ये सच है कि 2008 में आए रिसेशन यानि आर्थिक मंदी के कारण लोग मोटापे, डायबिटीज़ और मानसिक विकार के शिकार हो गए थे। ये बात हाल ही में हुई एक स्‍टडी में सामने आई है।

लंदन यूनिवर्सिटी और यूके के किंग्‍स कॉलेज लंदन की एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि मोटापे और ओवरवेट लोगों की संख्‍या में पिछले कुछ सालों में 4.1 और 2.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इसी तरह साल 2008 के बाद डायबिटीज़ के मरीज़ों में भी 1.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं में 4 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

स्‍टडी में यह भी पाया गया है कि 2008 के बाद से फलों का सेवन बढ़ा है और धूम्रपान और शराब के सेवन में कमी आई है।

इसके अलावा ये बदलाव महिलाओं में ज्‍यादा पाए गए खासतौर पर जो कम पढ़ी लिखी थीं। बेरोजगारी की बजाय मंदी से उत्पन्न अनिश्चितता और नकारात्मक उम्‍मीदों के कारण ऐसे बदलाव देखे गए।

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इस स्‍टडी में हैल्‍थ सर्वे फॉर इंग्‍लैंड के आंकड़ों पर भी शोधकर्ताओं ने नज़र डाली जिसमें एक साल में 9,000 घरेलू वर्कर्स को शामिल किया गया था।

इसमें 2001-2013 के बीच के 16 साल से ज्‍यादा उम्र के लोगों को शामिल किया गया था। इसमें सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं के साथ-साथ स्‍वस्‍थ जीवनशैली और स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को आधार बनाया गया था।

इस स्‍टडी के परिणाम में बताया गया है कि रिसेशन की शुरुआत का सबंध खराब खानपान की आदतों, बढ़ते बीएमआई और ओबेसिटी से था।

इसके साथ ही इस दौरान धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोगों में कमी आई। आपको बता दें कि धूम्रपान डायबिटीज़ के प्रमुख कारणों में से एक है।

इसके अलावा इस दौरान दवाओं के सेवन और डायबिटीज़ एवं मानसिक रूप से बीमार लोगों की संख्‍या में भी बढ़ोत्तरी पाई गई। ये प्रभाव कम शिक्षित महिलाओं में ज्‍यादा पाए गए।

इस स्‍टडी में सेहत और आर्थिक स्थिरता के बीच गहरा संबंध पाया गया है। 2008 में आए रिसेशन का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ा था और इसकी वजह से ओबेसिटी, डायबिटीज़ और मानसिक विकारों से ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी।

इस स्‍टडी की मानें तो कम शिक्षित लोग रिसेशन के दौरान ज्‍यादा सेहत संबंधित समस्‍याओं के शिकार हुए थे। इसका मतलब साफ है कि कम पढ़े-लिखे लोगों को सेहत से जुड़ी आवश्‍यक जानकारी और इसकी वजह से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना चाहिए।

अब तो आप जान गए ना कि आपकी आर्थिक स्थिति का सीधा संबंध आपकी सेहत से होता है। अगर आप पूरी तरह से संपन्‍न हैं तो आपकी सेहत भी अच्‍छी रहेगी लेकिन अगर आपके पास पैसे या नौकरी नहीं है तो आपको कई घातक बीमारियां घेर सकती हैं। इसका एक कारण स्‍ट्रेस भी हो सकता है क्‍योंकि स्‍ट्रेस में आकर लोग ज्‍यादा खाते हैं और ओवरईटिंग से मोटापे का शिकार बन जाते हैं। वहीं स्‍ट्रेस डायबिटीज़ का भी प्रमुख कारक है।

डायबिटीज़ के कुछ लक्षण

  • बार-बार प्‍यास लगने लगती है।
  • बार-बार पेशाब आने की समस्‍या भी रहती है।
  • कोई भी बीमारी सबसे पहले आपके एनर्जी लेवल पर आक्रमण करती है और डायबिटीज़ में भी मरीज़ की एनर्जी कम होने लगती है। अगर आपको भी थोड़ा सा काम करने के बाद थकान महसूस होती है या एनर्जी में कमी लगती है तो हो सकता है कि आपको डायबिटीज़ की बीमारी हो।
  • वजन में कमी आना भी मधुमेह का ही एक लक्षण है। अचानक से वजन में कमी आना या मांसपेशियों का कमज़ोर हो जाना मधुमेह का लक्षण है।
  • पेनिस या वजाईना के आसपास खुजली रहती है या शरीर के इन हिस्‍सों पर छाले रहते हैं तो आपको भी डायबिटीज़ की बीमारी हो सकती है।
  • अगर आपको अपनी आंखों की रोशनी कम होती महसूस हो रही है तो एक बार डॉक्‍टर या नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श जरूर कर लें।

डायबिटीज़ की बीमारी में किडनी फेल होने, स्‍ट्रोक और हार्ट अटैक का भी खतरा रहता है इसलिए जितना हो सके इस बीमारी से बचने की कोशिश करें लेकिन अगर आप इस की बीमारी का शिकार हो चुके हैं तो स्‍वस्‍थ आहार और व्‍यायाम की मदद लें। ये ही दो उपाय हैं जो आपको डायबिटीज़ के साथ भी स्‍वस्‍थ जीवन दे सकते हैं।

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