स्‍टडी में हुआ खुलासा.. इस ड्रिंक से घट सकता है ब्‍लड शुगर का लेवल

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शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि केटोन सप्‍लीमेंट को पीने से प्रभावित तरीके से ब्‍लड शुगर के स्‍तर को कम किया जा सकता है। अचानक शुगर के बढ़ने की स्थिति को इस ड्रिंक से नियंत्रित की जा सकती है और अगर आपका ग्‍लूकोज़ लेवल भी अनियंत्रित रहता है तो भी आपके लिए ये ड्रिंक फायदेमंद है। पैंक्रियाज़ रक्‍त में इंसुलिन रिलीज़ करता है जोकि ब्‍लड शुगर के स्‍तर पर आधारित है।

कभी-कभी शरीर पर्याप्‍त मात्रा में शुगर नहीं ले पाता है और इस वजह से बॉडी में शुगर का स्‍तर बिगड़ जाता है। ब्रिटिश कोलंबिया और ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि एक पोर्शन में केटोन ईस्‍टर का सेवन करने से अचानक ब्‍लड शुगर के बढ़ने की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है और ये ब्‍लड शुगर कंट्रोल को बेहतर करता है। ये स्‍टडी जर्नल ऑफ फि‍जियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

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इस स्‍टडी में 12 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। दो मौकों पर 10 घंटे के उपवास के बाद केटोन मोनोस्टर सप्‍लीमेंट या एक प्लेसबो का सेवन करवाया गया। 30 मिनट के बाद उन्‍हें 75 ग्राम शुगर युक्‍त ड्रिंक दिया गया।

इसके बाद शोधकर्ताओं ने 2.5 घंटे के अंदर प्रतिभागियों के हर 15 से 30 मिनट के अंदर ब्‍लड सैंपल लिए। इसमें उनके ग्‍लूकोज़, लिपिड और हार्मोंस का स्‍तर जांचा गया।

अध्‍ययन में खुलासा हुआ कि प्‍लेसबो लेने वाले प्रतिभागियों की तुलना में केटोन ड्रिंक पीने वाले लोगों में ब्‍लड शुगर के बढ़ते स्‍तर को आसानी से नियंत्रित किया गया था। शोधकर्ताओं ने ये भी कहा कि केटोन सप्‍लीमेंट्स स्‍वाद में बहुत अच्‍छे नहीं होते हैं लेकिन प्रतिभागियों को इस बारे में बिना बताए इसमें थोड़ा बदलाव कर उन्‍हें ये पीने को दिया गया था।

हालांकि, ये बात भी ध्‍यान देने योग्‍य है कि इस रिसर्च में शामिल लोगों को डायबिटीज़ की बीमारी नहीं थी और वे सभी स्‍वस्‍थ थे। ऐसा इंसुलिन रेसिस्‍टेंस, बीटा सेल रोग और दवाओं के भ्रमित प्रभाव को कम करने के लिया किया गया था। इस वजह से टाइप 2 डायबिटीज़, प्री डायबिटीज़ और ओबेसिटी से ग्रस्‍त रोगियों पर इसके प्रभाव को जानना जरूरी है।

ब्‍लड शुगर के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए ये आसान टिप्‍स आपके काम आ सकते है :

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कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब युक्‍त संतुलित आहार

कई तरह की फल-सब्जियों, प्रोटीन और फैट के बेहतर स्रोतों से ब्‍लड शुगर को प्रभावित तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। ट्रांस फैट से प्रचुर खाद्यों से दूर रहें साथ ही प्रोसेस्‍ड फूड और शुगर का सेवन ना करें। कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्बोहाइड्रेटस में फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है। ये पचने में ज्‍यादा समय लेते हैं और इस वजह से इनसे लंबे समय तक शरीर को एनर्जी मिलती है।

गेहूं से भरपूर डाइट

फाइबर की उच्‍च मात्रा के कारण गेहूं भूख को कम करता है और ब्‍लड शुगर के स्‍तर को भी नियंत्रित रखता है। गेहूं आपके संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी बेहतर होता है और इससे कार्डियोवस्‍कुलर रोग का खतरा भी कम रहता है।

नट्स को करें शामिल

नट्स में अनसैचुरेटेड फैट, प्रोटीन और विटामिन और मिनरल्‍स होते हैं जोकि कोलेस्‍ट्रॉल, इंफ्लामेशन और इंसुलिन रेसिस्‍टेंस को कम करता है। आपको अपने आहार में कम से कम 50 ग्राम बादाम, काजू, अखरोट और पिस्‍ता को शामिल करना चाहिए। ये ट्राइग्लिसराइड और शुगर को नियंत्रित करते हैं।

शारीरिक व्‍यायाम

डायबिटीज़ के मरीज़ों को रोज़ कम से कम 30 मिनट की सैर या शारीरिक व्‍यायाम जरूर करना चाहिए। नियमित व्‍यायाम से ग्‍लूकोज़ लेवल नियंत्रण में रहता है। मांसपेशियों के काम करते रहने से इंसुलिन का प्रयोग होता रहता है। रोज़ 30 मिनट की सैर से डायबिटीज़ के खतरे को कम किया जा सकता है। वहीं खाने के तुरंत बाद सैर करने से रक्‍त में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर कम करने में मदद मिलती है। इसकी मदद से लोगों की इंसुलिन इंजेक्‍शन पर निर्भरता कम हो सकती है और ये वजन को भी नियंत्रित रख सकता है।

नाश्‍ते से इसे रखें दूर

कार्बोहाइड्रेट युक्‍त एक विशेष फूड को अपनी डाइट से निकाल देना चाहिए। मधुमेह से बचाव के लिए ब्रेकफास्‍ट आइटम बैगल को अपने मैन्‍यू से हटा देना चाहिए। डायबिटीज़ के मरीज़ों को लगता है कि उनके ब्‍लड शुगर पर सबसे ज्‍यादा असर शुगर का पड़ता है ले‍किन ऐसा नहीं है। इसमें कार्बोहाइड्रेट का असर ज्‍यादा होता है। किसी भी कार्बोहाइड्रेट युक्‍त चीज़ को लेने से पहले उसके न्‍यूट्रिशियन लेबल को जरूर चैक करें ना कि सिर्फ उसमें शुगर की मात्रा को जांचें। संतुलित आहार से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है साथ ही इसका बचाव भी यही है।

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