डायबिटीज़ का ईलाज नहीं करवा रहे हैं तो आपका भविष्‍य हो सकता है कुछ ऐसा

diabetes

डायबिटीज़ की बीमारी बहुत खतरनाक होती है और अगर इसका ईलाज समय पर ना करवाया जाए तो ये और भी भयंकर रूप ले सकती है। डायबिटीज़ की वजह से कई अन्‍य बीमारियां होने का खतरा भी बना रहता है। ग्‍लूकोज़ के स्‍तर के बढ़ने पर रक्‍त कोशिकाएं, नसें और अंग क्षतिग्रस्‍त हो सकते हैं।

यहां तक कि ग्‍लूकोज़ लेवल के थोड़ा सा बढ़ने पर आपको कोई लक्षण नहीं दिखाई देगा लेकिन ये कुछ समय के बाद आपको प्रभावित कर सकता है। आज इस आर्टिकल के ज़रिए हम आपको यही बताने जा रहे हैं अगर डायबिटीज़ के मरीज़ इस बीमारी का ईलाज ना करवाएं तो उनके साथ क्‍या हो सकता है।

ह्रदय रोग और स्‍ट्रोक

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डायबिटीज़ के मरीज़ों में कोरोनरी ह्रदय रोग और स्‍ट्रोक का खतरा पांच गुना ज्‍यादा होता है। लंबे समय तक ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के लेवल को कंट्रोल ना किया जाए तो मरीज़ एथेरोसक्‍लेरोसिस से ग्रस्‍त हो सकता है। इसके परिणामस्‍वरूप ह्रदय तक रक्‍त प्रवाह बाधित हो जाता है और उसकी वजह से सीने में दर्द महसूस हो सकता है।

इसकी वजह से ह्रदय और मस्तिष्‍क की रक्‍त कोशिकाओं के पूरी तरह से ब्‍लॉक होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ये हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक का कारण बनता है।

नसों का क्षतिग्रस्‍त होना

nerve-damage

हाई ब्‍लड ग्‍लूकोज़ की वजह से नसों की छोटी रक्‍त कोशिकाएं भी क्षतिग्रस्‍त हो सकती हैं। इसकी वजह से हाथ और पैरों की उंगलियों में सरसराहट और दर्द महसूस होता है। इसकी वजह से पैर सुन्‍न हो सकते हैं जिसके कारण पैरों में अल्‍सर हो सकता है।

तं‍त्रिका तंत्र (मस्तिष्‍क और स्‍पाइनल कोर्ड का बाहरी तंत्रिका तंत्र) के क्षतिग्रस्‍त होने पर न्‍यूरोपैथी करवाई जाती है। पाचन तंत्र की नसों के प्रभावित होने पर आपको जी मितली, उल्टी, दस्त या कब्ज की शिकायत हो सकती है।

डायबिटीक रेटिनोपैथी

eyes

आंखों में पड़ने वाली रोशनी को रेटिना महसूस कर मस्तिष्‍क को दिखने वाली चीज़ों के बारे में संदेश भेजता है। ब्‍लड शुगर बढ़ने से रेटिना के अंदर की रक्‍त कोशिकाओं को क्षति पहुंचने को डायबिटीक रेटिनोपैथी कहते हैं।

शुरुआत में आपको कोई बदलाव नज़र नहीं आएगा लेकिन कुछ समय बाद रक्‍त कोशिकाओं से फ्लूइड निकल सकता है। मधुमेह रोग में रक्‍त कोशिका रेटिना पर धब्‍बा बना देती हैं और रेटिना को अपनी आंखों के पीछे से खींच लेती हैं जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है।

जितना ज्‍यादा आप ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के लेवल को कंट्रोल कर के रखेंगें उतना ज्‍यादा आंखों से संबंधित गंभीर रोगों से बच पाएंगें।

डायबिटीक रेटिनोपैथी को शुरुआती स्‍तर पर लेज़र ट्रीटमेंट से ठीक किया जा सकता है। हालांकि, इससे आपकी आंखों की बची हुई रोशनी को ही ठीक किया जा सकता है।

किडनी रोग

kidney

अगर किडनी में उपस्‍थित छोटी रक्‍त कोशिकाएं ब्‍लॉक या सावित होने लगती हैं तो इससे किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है। आमतौर पर इसका संबंध हाई ब्‍लड प्रेशर से है और इसका ईलाज इसे कंट्रोल करना ही है।

कुछ और गंभीर मामलों में इस वजह से किडनी फेल तक हो सकती है। इसका मतलब है कि आपको डायलिसिस के साथ किडनी रिप्‍लेसमेंट या कभी-कभी किडनी ट्रांस्‍प्‍लांट की भी जरूरत पड़ सकती है।

पैरों में दिक्‍कत

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पैरों की नसों के क्षतिग्रस्‍त होने पर उनमें कट या घाव बन सकता है और पैरों की रक्‍त कोशिकाओं के बाधिक होने की वजह से पैरों में अल्‍सर का खतरा भी रहता है। डायबिटीज़ में 10 में से 1 मरीज़ फुट अल्‍सर से ग्रस्‍त होता है और ये कोई गंभीर संक्रमण कर सकता है। मधुमेह की बीमारी में पैरों का ख्‍याल रखना बहुत जरूरी होता है खासतौर पर बुजुर्गों के लिए मधुमेह में फुट केयर बहुत जरूरी होती है। इस बीमारी में पैरों को नज़रअंदाज़ करना कोई गंभीर समस्‍या का रूप ले सकती है और इस वजह से मरीज़ को अपना पैर तक खोना पड़ सकता है। पैरों को रोज़ चैक करना चाहिए कि कहीं उनमें अल्‍सर, ब्‍लिस्‍टर, कट या सूजन तो नहीं है। आपको हमेशा संतुलित आहार और बताई गई दवाओं से अपने ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का ध्‍यान रखना चाहिए। इससे पैरों में नर्व डैमेज नहीं होता है। मधुमेह के मरीज़ों को अपने पैरों का खास ख्‍याल रखना चाहिए क्‍योंकि इस बीमारी की वजह से उनके पैर बहुत ज्‍यादा संवेदनशील हो जाते हैं और बाकी अंगों की तरह मधुमेह का असर पैरों पर भी पड़ता है।

इसके अलावा मधुमेह का असर मरीज़ की सेक्‍स क्षमता पर भी पड़ता है। डायबिटीज़ की वजह से महिलाओं में गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। अगर आप मधुमेह के मरीज़ हैं तो आपको ये बात जान लेनी चाहिए कि संतुलित डाइट और एक्‍सरसाइज़ से आप इस बीमारी से जुड़ी सभी तरह की समस्‍याओं से बच सकते हैं।

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