10 मिनट की सैर से मधुमेह के मरीज़ों का मिलेगी राहत

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अन्‍य समय की तुलना में खाना खाने के बाद छोटी सी सैर ब्‍लड शुगर के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

हाल ही में हुई एक स्‍टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में 30 मिनट की सैर की तुलना में खाना खाने के बाद 10 मिनट की सैर से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर कम हो जाता है।

इस स्‍टडी में 41 वयस्‍कों को शामिल किया गया था। इसमें पाया गया कि खाने के तुरंत बाद थोड़ी सैर करने से ही 30 मिनट की वॉक की तुलना में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर 12 प्रतिशत तक कम हुआ।

सबसे ज्‍यादा फायदा शाम के खाने के बाद देखा गया जब कार्बोहाइड्रेट का सेवन सबसे ज्‍यादा किया गया था और प्रतिभागी थोड़े कम एक्टिव थे।

शोधकर्ताओं की मानें तो खाने के तुरंत बाद सैर करने से रक्‍त में ग्‍लूकोज़ का स्‍तर कम करने में मदद मिलती है। इसकी मदद से लोगों की इंसुलिन इंजेक्‍शन पर निर्भरता कम हो सकती है और ये वजन को भी नियंत्रित रख सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान की शारीरिक क्रियाओं के नियमों को खाने के तुरंत बाद किसी एक्टिविटी के करने में तब्‍दील कर देना चाहिए। अगर आप खाने में खूब कार्बोहाइड्रेट जैसे कि ब्रेड, चावल, आलू या पास्‍ता का सेवन करते हैं तो आपको खाने के तुरंत बाद 10 मिनट की वॉक जरूर करनी चाहिए।

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टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर में कोशिकाएं इंसुलिन का संग्रहण नहीं कर पाती हैं या पैंक्रियाज़ बहुत कम इंसुलिन बनाता है। ज्‍यादातर मरीज़ों को टाइप 2 डायबिटीज़ होती है। डॉक्‍टर्स का कहना है कि डायबिटीज़ के ईलाज में ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए जीवनभर दवाएं खानी पड़ती हैं। टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी किशोरावस्‍था के दौरान होती है जबकि टाइप 2 डायबिटीज़ 35 की उम्र पार करने के बाद अपना शिकार बनाती है। टाइप 2 डायबिटीज़ ज्‍यादा खतरनाक होती है और इससे ग्रसित व्‍यक्‍ति अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं खा पाता है।

रिसर्च में क्‍या हुआ

इस स्‍टडी में 18 से 75 साल के टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को शामिल किया गया। इसमें स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और शारीरिक रूप से असक्षम लोगों को शामिल नहीं किया गया था।

सभी प्रतिभागियों को दो ग्रुपों में बांट दिया गया और इसमें 14 दिनों तक फॉलो अप लिया गया। इसमें एक ग्रुप के लोगों को रोज़ 30 मिनट की सैर करने के लिए कहा गया जबकि दूसरे ग्रुप के प्रतिभागियों को खाने के बाद 10 मिनट की सैर करने के लिए कहा गया।

इसमें सैर करने, बैठने के समय और आधुनिक जीवनशैली की जानकारी भी ली गई। स्‍टडी में 14 दिनों तक प्रतिभागियों ने सैर के समय एक्‍सरसाइज़ मॉनिटर डिवाइस पहना हुआ था और इसी से जानकारी जुटाकर शोधकर्ताओं ने ये प्रमाण जारी किया है।

खाना खाने के तीन घंटों के भीतर मूल्‍यांकन किया गया था। इसमें भोजन के बाद रक्‍त में ग्‍लूकोज़ के स्‍तर का आंकलन करना प्रमुख था।

पहले, सातवें और 14वें दिन सभी प्रतिभागी असेसमेंट के लिए क्‍नीनिक आए।

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पहले दिन – ब्‍लड सैंपल और बॉडी का माप लिया गया और उन्‍हें कुछ शारीरिक क्रियाएं बताई गईं और एक्‍सरसाइज़ मॉनिटर फिट किया गया।

सातवें दिन – प्रतिभागियों के नियमित ग्‍लूकोज़ मॉनिटर सिस्‍टम फिट किया गया और उन्‍हें पोर्टेबल ग्‍लूकोमीटर दिया गया। सात दिनों की फूड डायरी भी शुरु की।

14वें दिन – ब्‍लड सैंपल और बॉडी का माप लिया गया और ग्‍लूकोज़ और एक्‍सरसाइज़ मॉनिटर हटाकर फूड डायरी वापिस ली गई।

ये प्रक्रिया दोनों ग्रुप के प्रतिभागियों के साथ की गई।

इस रिसर्च में शोधकर्ताओं ने 60 साल की उम्र तक के 41 वयस्‍कों को शामिल किया था जिन्‍हें लगभग 10 सालों से डायबिटीज़ की बीमारी थी।

इस स्‍टडी में पाया गया कि रोज़ 30 मिनट की वॉक करने वाले प्रतिभागियों की तुलना में खाने के तुरंत बाद सैर करने वाले लोगों का ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर 12 प्रतिशत ज्‍यादा कम हुआ। इस स्‍टडी की मानें तो खाने के बाद 10 मिनट की वॉक से टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को कई फायदे हो सकते हैं।

अगर डायबिटीज़ के मरीज़ों ने खाने में कार्बोहाइड्रेट का सेवन ज्‍यादा किया है तो उन्‍हें भोजन के बाद 10 मिनट की सैर जरूर करनी चाहिए। स्‍टडी की मानें तो भोजन के तुरंत बाद छोटी सैर से ब्‍लड ग्‍लूकोज़ बहुत प्रभावित होता है। इसके परिणाम को देखते हुए शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान के नियमों में बदलाव कर खाने के बाद 10 मिनट सैर करने की सलाह मधुमेह के मरीज़ों को दी जानी चाहिए।

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