मक्‍खन और मीट खाने से बढ़ सकता है टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा

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मसालों में लिपटी चिकन की डिशेज़ का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। भले ही हम जानते हों कि मीट हमारी सेहत के लिए अच्‍छी नहीं होती है और इसमें ढेर सारी कैलोरी भी होती है जो हमारे शरीर और दिल को नुकसान पहुंचाती है लेकिन फिर भी इससे दूरी बनाने के लिए मन नहीं मानता है। ये सब जानने के बाद भी हमारा मन बारबीक्‍यू की ओर खिंचा ही चला जाता है।

ऐसा देखा जाता है कि हमें जो कोई भी चीज़ खाने में सबसे ज्‍यादा पसंद होती है वो सेहत के लिए हानिकारक होती है। अब मक्‍खन और मीट को ही ले लीजिए। मक्‍खन से जहां खाने का स्‍वाद बढ़ जाता है वहीं मीट से कई स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन बनाए जा सकते हैं लेकिन दुख की बात तो ये है कि मीट और मक्‍खन दोनों ही सेहत के लिए नुकसानदायक होते हैं।

सेहत विशेषज्ञों के अनुसार इन दोनों ही चीज़ों को ज्‍यादा मात्रा में खाना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होता है। ऐसी चीज़ों को ज्‍यादा खाने से ह्रदय रोग हो सकता है और ये धमनियों के जमने का कारण भी बन सकता है।

मक्‍खन में 51 प्रतिशत सैचुरेटेड फैट होता है। इसे कम मात्रा में खाना सेहत के लिए बेहतर होता है। आज जिस पर्यावरण में हम रह रहे हैं वो पूरी तरह से रसायनों से भरी है और ऐसे में हमारे खाने में भी ये मिले होते हैं।

चूंकि मक्‍खन में वसा की मात्रा अधिक होती है इसलिए ये कई बीमारियों का कारण बनता है। यूएस के हार्वर्ड टी.एच चान स्‍कूल ऑफ पब्‍लिक हैल्‍थ की एक स्‍टडी में पाया गया है कि दिन में 12 ग्राम मक्‍खन खाने से डायबिटीज़ का खतरा बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है।

मक्‍खन क्‍यों हानिकारक होता है

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किसी फूड में सैचुरेटेड फैट कितना है इस बात से ज्‍यादा जरूरी है कि उसे कितनी मात्रा में खाया जा रहा है। मक्‍खन प्रोसेस्‍ड फूड होता है और इसी वजह से इसे हानिकारक माना जाता है। जहां घर पर सफेद मक्‍खन को मलाई और दूध की क्रीम को जलाकर बनाया जाता है वहीं स्‍टोर में मिलने वाला मक्‍खन मिल्‍क फैट और मिल्‍क प्रोटीन से मिलकर बनता है और बाद में इसमें नमक डाला जाता है। इसमें ट्रांस फैट होता है जोकि सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचाता है।

इस स्‍टडी के शोधकर्ताओं की मानें तो सैचुरेटेड और एनिमल फैट जैसे चीज़ और मक्‍खन में सैचुरेटेड फैटी एसिड और ट्रांस फैट प्रचुर मात्रा में होता है, इनका सेवन करने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा बह़त ज्‍यादा बढ़ जाता है जबकि होल फैट योगर्ट इस खतरे को कम करता है।

इससे पहले डायट्री फैट को कार्डियोवस्‍कुलर रोगों से संबंधित बताया गया था। इस स्‍टडी के परिणाम तक पहुंचने के लिए टीम ने 3,349 प्रतिभागियों पर रिसर्च की जिन्‍हें मधुमेह की बीमारी नहीं थी लेकिन इनमें कार्डियोवस्‍कुलर रोगों का खतरा बहुत ज्‍यादा था। 4 से 4.5 साल के फॉलो अप के बाद 266 प्रतिभागियों में मधुमेह पाया गया।

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ताजे फल-सब्जियों, प्रोटीन, हैल्‍दी फैट जैसे ऑलिव ऑयल और लो रिफाइंड शुगर और सैचुरेटेड फैट से युक्‍त मेडिटेरियन डाइट लेनी चाहिए। ये आपको कई भयंकर रोगों से बचा सकती है, यहां तक कि टाइप 2 डायबिटीज़ से भी। इस स्‍टडी के परिणाम क्‍नीनिकल न्‍यूट्रिशियन अमेरिकन जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

ऑलिव ऑयल, सूखे मेवे और एवोकैडो के साथ-साथ सब्जियों जैसे पालक, सेलेरी और गाजर में नाइट्राइट् और निट्रेट्स की मात्रा बहुत ज्‍यादा होती हैं। इसके अलावा एक स्‍टडी में यह बात भी सामने आई है कि वेगन डाइट से भी डायबिटीज़ के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वेगन डाइट से ओवरवेट लोगों को टाइप 2 मधुमेह की बीमारी से बचाया जा सकता है। वेगन डाइट लेने से प्रभावी तरीके से टाइप 2 डायबिटीज़ को होने से रोका जा सकता है। खाना दवा की तरह काम करता है और प्‍लांट बेस्‍ड डाइट लेने आप लंबे समय तक डायबिटीज़ से बच सकते हैं।

सेहत विशेषज्ञों की मानें तो हमें पशुओं पर आधारित फूड प्रॉडक्‍ट्स की जगह प्‍लांट बेस्‍ड डाइट लेनी चाहिए। आपको अपने नियमित आहार में रेड मीट, मक्‍खन, चीज़ आदि की जगह प्‍लांट बेस्‍ड फूड्स को जगह देनी चाहिए।

परिणाम बताते हैं कि प्‍लांट बेस्‍ड डाइट जैसे कि दालें, साबुत अनाज, फल, सब्जियां और नट्स लेना एनिमल बेस्‍ड फूड्स जैसे कि रैड मीट और प्रोसेस्‍ड मीट आदि लेने से ज्‍यादा अच्‍छा होता है।

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