ऑफिस में स्‍ट्रेस की वजह से आपको हो सकता है डायबिटीज़

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आजकल काम का बोझ इतना ज्‍यादा बढ़ गया है कि लोग घंटों तक बिना रूके काम करते रहते हैं और इसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। देर तक काम करने की वजह से स्‍ट्रेस लेवल भी बढ़ जाता है। अगर आप भी पहले की तुलना में ऑफिस में ज्‍यादा काम करने लगे हैं तो अब आपको सावधान हो जाना चाहिए।

हाल ही में हुई एक नई स्‍टडी में सामने आया है कि ऑफिस में स्‍ट्रेस की वजह से डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है। इस स्‍टडी के मुताबिक जिन लोगों को ऑफिस में बहुत ज्‍यादा स्‍ट्रेस से गुज़रना पड़ता है उनमें ऐसा ना करने वाले लोगों की तुलना में डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा रहता है।

इस स्‍टडी के लिए जिंजिआंग मेडिकल यूनिवर्सिटी टीम के शोधकर्ताओं ने चीन के पेट्रोलियम इंडस्‍ट्री के 3,730 मज़दूरों पर रिसर्च की। इस स्‍टडी की शुरुआत में किसी भी वर्कर को डायबिटीज़ की बीमारी नहीं थी।

12 तक इनका फॉलो अप लेने के बाद डायबिटीज़ केयर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिन लोगों ने काम में ज्‍यादा स्‍ट्रेस लिया उनमें मधुमेह का खतरा 57 प्रतिशत ज्‍यादा पाया गया। काम में कोई बड़ा बदलाव भी डायबिटीज़ का जिम्‍मेदार हो सकता है।

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साल 2014 में दुनियाभर में 10 में से हर एक बच्‍चे को मधुमेह की बीमारी थी। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने भी कहा है कि साल 2030 तक दुनिया में सबसे ज्‍यादा मौतों का कारण मधुमेह होगा। वैसे तो डायबिटीज़ कई प्रकार हैं लेकिन टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्‍या सबसे ज्‍यादा है।

नौकरी से संबंधित स्‍ट्रेस से जुड़े कई पहलुओं पर इस स्‍टडी में ध्‍यान दिया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों पर काम का ज्‍यादा बोझ था या जिन्‍हें अपनी नौकरी की जिम्‍मेदारियां या उम्‍मीदों के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं थी उनमें सबसे ज्‍यादा स्‍ट्रेस था।

वहीं इस स्‍टडी को सिर्फ मेल वर्कर्स तक ही सीमित रखा गया था और इसका ज्‍यादा ध्‍यान स्‍ट्रेस और डायबिटीज़ के बीच संबंध जानने पर ही था।

स्‍ट्रेस की वजह से कई तरह की मानसिक और शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। साथ ही तनाव में व्‍यक्‍ति को ज्‍यादा भूख लगती है और ऐसे में वो ज्‍यादा खाना खाता है और इस वजह से उसका वजन बढ़ जाता है। वजन बढ़ना या ओवरवेट होना भी मधुमेह का प्रमुख कारण है। काम में तनाव के साथ शारीरिक क्रिया ना करना और खराब लाइफस्‍टाइल इस रिस्‍क को और बढ़ा देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी जीवनशैली को सुधारें और संतुलित वजन रखें और इन बातों का ध्‍यान आपको ऑफिस में स्‍ट्रेस के दौरान भी रखना है।

अपनी रोज़ाना की डाइट में थोड़ा बदलाव करके आप अपने मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर कर तनाव से बच सकते हैं।

अगर आप अपनी डाइट में इन चीज़ों को शामिल करेंगें तो आपके स्‍ट्रेस में कमी आ सकती है।

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ब्‍लूबैरीज़

ब्‍लूबैरीज़ एंटीऑक्‍सीडेंट्स का बेहतर स्रोत होती हैं और इनसे कई तरह के फायदे मिलते हैं। बैरीज़ में आप रसभरी, स्‍ट्रॉबेरी और यहां तक कि विटामिन सी युक्‍त ब्‍लैकबैरी भी खा सकते हैं। इससे काफी हद तक स्‍ट्रेस से लड़ने में मदद मिलती है। एंटीऑक्‍सीडेंट युक्‍त फूड्स खाने से टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा कम हो जाता है। एंटीऑक्‍सीडेंट्स ऐसे रसायन होते हैं जो कोशिकाओं को क्षतिग्रस्‍त होने से रोकते हैं और इनका बचाव करते हैं। इसमें बीटा कैरोटीन, विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई और सेलेनियम आदि शामिल है।

केला

केले में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है जोकि स्‍ट्रेस से लड़ने में मददगार होता है। ये तनाव की वजह से क्षतिग्रस्‍त हुई कोशिकाओं को दुरुस्‍त करता है। वहीं इसमें पोटाशियम भी होता है जोकि ह्रदय की मांसपेशियों को स्‍वस्‍थ बनाए रखता है।

डार्क चॉकलेट

डार्क चॉकलेट स्‍वस्‍थ एंटीऑक्‍सीडेंट्स जैसे पॉलीफेनॉल और फ्लेवेनॉएड्स का बेहतर स्रोत है। ये दोनों एंटीऑक्‍सीडेंट्स ब्‍लड प्रेशर कम करने के लिए जाना जाता है। जब ब्‍लड प्रेशर सामान्‍य रहेगा तो आप अपने आप ही शांत रहेंगें।

लहसुन

स्‍ट्रेस और तनाव की वजह से थकान महूसस हो सकती है और इसका असर आपके इम्‍यून सिस्‍टम पर भी पड़ता है। लहसुन में ढेर सारे एंटीऑक्‍सीडेंट्स होते हैं जोकि शरीर में फ्री रेडिकल्‍स को न्‍यूट्रलाइज़ करते हैं।

ग्रीन टी

हालांकि इसमें कैफीन होता है लेकिन ग्रीन टी में एमिनो एसिड भी होता है जोकि मस्‍तिष्‍क को ताकत देता है। ग्रीन टी में थोड़ा बदलाव कर मानसिकत क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं तो आपको चाय पीनी चाहिए। चाय से इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा जा सकता है लेकिन इसमें दूध का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

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