इन 5 तरीकों से आपकी त्‍वचा को खराब कर सकता है मधुमेह

Diabetes

डायबिटीज़ का असर शरीर के बाकी अंगों पर भी पड़ता है। मधुमेह की बीमारी ह्रदय, किडनी, आंखों के साथ-साथ पूरी सेहत को बिगाड़ सकती है। इसके अलावा इस बीमारी का असर त्‍वचा पर भी पड़ता है। मधुमेह के एक तिहाई मरीज़ त्‍वचा संबंधित समस्‍याओं से ग्रस्‍त हैं। अगर आप पहले से ही इन बातों पर ध्‍यान दें और अपनी त्‍वचा का ख्‍याल रखें तो किसी बड़ी मुश्किल से बचा जा सकता है। किसी भी गंभीर परेशानी से बचने के लिए आपको त्‍वचा की कुछ सामान्‍य स्थितियों को जान लेना चाहिए जो कि मधुमेह से जुड़ी होती हैं।

सबसे पहले तो आपको अपनी डायबिटीज़ को कंट्रोल में रखना है। हैल्‍दी डाइट प्‍लान, नियमित व्‍यायाम, तनाव में कमी और डॉक्‍टर द्वारा बताई गई दवाओं से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके अलावा अगर आप शुरु से ही अपनी त्‍वचा का ख्‍याल रखें और हर छोटी बात पर ध्‍यान दें और डॉक्‍टर से चेकअप करवाते रहें तो आप त्‍वचा संबंधित किसी बड़ी परेशानी से बच सकते हैं।

डायबिटीज़ के मरीज़ों को त्‍वचा संबंधित इन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है :

अकेनथोसिस निग्रिकैंस

dia 2

ये अवस्‍था इंसुलिन रेसिस्‍टेंस से संबंधित है। इसमें त्‍वचा पर जैसे गर्दन, बगल, घुटनों, कोहनी और हाथों पर वैलवैटी डार्क पैच पड़ने लगते हैं। अगर आपकी त्‍वचा पर ऐसी कोई समस्‍या है तो आपको टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा सामान्‍य लोगों की तुलना में ज्‍यादा है। ऐसा इंसुलिन के ज्‍यादा बनने की वजह से होता है। इसे कंट्रोल करने के लिए आपको अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम कर देना चाहिए जिससे इंसुलिन कम बने और आपकी त्‍वचा ठीक हो जाए।

त्‍वचा पर खुजली

itchy-skin-620x400

अधिकतर मधुमेह के मरीज़ों को शुष्‍क त्‍वचा और खुजली की शिकायत रहती है। हाई ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल और रक्‍त कोशिकाओं में ज्‍यादा शुगर बनने की वजह से ऐसा होता है। अगर किसी को ऐसी कोई शिकायत है तो वह व्‍यक्‍ति हाइड्रेटेड नहीं है और इसी वजह से उनकी त्‍वचा शुष्‍क और खुजली वाली हो जाती है। ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के अनियंत्रित होने की वजह से भी परों की त्‍वचा और तलवों में खुजली और शुष्‍कता की शिकायत हो सकती है। पर्याप्‍त पानी पीने और मॉइश्‍चराइजिंग क्रीम लगाने से और रोज़ नहाने से इस समस्‍या से बचा जा सकता है।

स्किन टैग्‍स

tags

कई लोगों को स्किन टैग्‍स की समस्‍या भी होती है। ये गर्दन, आंखों के नीचे और बगल में ज्‍यादा होता है। स्किन टैग्‍स प्री डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़ से संबंधित होता है और त्‍वचा पर टैग्‍स होने का मतलब है कि आपके शरीर में रक्‍त के अंदर इंसुलिन की मात्रा ज्‍यादा बढ़ गई है। डर्मेटोलॉजिस्‍ट की मदद से स्किन टैग्‍स से छुटकारा पाया जा सकता है।

त्‍वचा संक्रमण

skin

मधुमेह की बीमारी में बैक्‍टीरियल और फंगल इंफेक्‍शन होना सामान्‍य बात है। ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल के बढ़ जाने पर इन दो तरह का संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन में नेल इंफेक्‍शन और बालों के फॉलिकल में संक्रमण शामिल है। मधुमेह के मरीज़ों में स्‍टेफीलोकोकस नामक बैक्‍टीरिया की वजह से ये संक्रमण होता है।

वहीं फंगल इंफेक्‍शन में शरीर के नमीयुक्‍त वाले हिस्‍सों पर खुजली वाले रैशेज़ पड़ जाते हैं। ये रैशेज़ लाल हो सकते हैं।

दोनों ही बैक्‍टीरियल और फंगल इंफेक्‍शन को दवाओं से ठीक किया जा सकता है साथ ही ब्‍लड ग्‍लूकोज़ को कंट्रोल करें और त्‍वचा को सूखा और साफ रखें।

खुले फोड़े और घाव

ghaav

जब लंबे समय तक मधुमेह रोगियों का ब्‍लड शुगर लेवल बहुत ज्‍यादा रहता है तो इस वजह से स्राव खराब हो जाता है नसें खासतौर पर पैरों और तलवों की क्षतिग्रस्‍त होने लगती हैं। अगर आपको लंबे समय कोई घाव है और वो भरने में बहुत समय लगा रहा है तो इसका मतलब है कि आपकी नसें क्षतिग्रस्‍त हो चुकी हैं और इस स्थिति को डायबिटीक अल्‍सर कहा जाता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बहुत जरूरी है कि वो नियमित अपने पैरों का चेकअप करवाएं। किसी भी तरह के फफोले, घाव या फोड़ा होने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें। इससे स्थि‍ति को और गंभीर होने से बचाया जा सकता है। मधुमेह की बीमारी में पैरों का ख्‍याल रखना बहुत जरूरी होता है खासतौर पर बुजुर्गों के लिए मधुमेह में फुट केयर बहुत जरूरी होती है। इस बीमारी में पैरों को नज़रअंदरज़ करना कोई गंभीर समस्‍या का रूप ले सकती है और इस वजह से मरीज़ को अपना पैर तक खोना पड़ सकता है। पैरों को रोज़ चैक करना चाहिए कि कहीं उनमें अल्‍सर, ब्‍लिस्‍टर, कट या सूजन तो नहीं है।

Read source

Image source

Image source 2

Image source 3

Image source 4

Image source 5

Image source 6

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *