क्‍या डायबिटीज़ के मरीज़ पी सकते हैं कॉफी ?

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भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मधुमेह की बीमारी अपने पैर पसार रही है। आज दुनियाभर में मिलियन लोग डायबिटीज़ की बीमारी से ग्रस्‍त हैं और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का तो यहां तक कहना है कि साल 2030 तक डायबिटीज़ मौत का सबसे बड़ा कारण होगा।

पिछले दशक में मधुमेह मरीज़ों के मामले में 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसका मतलब है कि 29 मिलियन से भी ज्‍यादा अमेरिकी मधुमेह से ग्रस्‍त हैं। दुनियाभर में 380 मिलियन से भी ज्‍यादा लोग डायबिटीज़ के शिकार हैं और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने साल 2030 में मधुमेह के मरीज़ों की संख्‍या इससे दोगुनी होने का अनुमान लगाया है।

भोजन ग्रहण करने पर शरीर उस खाने को शुगर और ग्‍लूकोज़ में बदल देता है। इस समय अग्‍नाशय को इंसुलिन रिलीज़ करना होता है। कोशिकाओं को खोलने, ग्‍लूकोज़ के प्रवेश और ऊर्जा के लिए ग्‍लूकोज़ का प्रयोग करने में इंसुलिन अहम भूमिका निभाता है। लेकिन डायबिटीज़ में ये क्रिया बाधित हो जाती है। डायबिटीज़ की वजह से शरीर की कई क्रियाएं और अंग बिगड़ने लगते हैं।

cofffe 2डायबिटीज़ के बारे में और इससे जुड़ी मुश्किलों के बारे में कम जानकारी, देरी से बीमारी का पता चलना और इससे जुड़े भ्रम के कारण इस बीमारी को संभाल पाना मरीज़ के लिए मुश्किल हो जाता है। हालांकि, संतुलित डाइट और बताई गई एक्‍सरसाइज़ से डायबिटीज़ को भी पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

आपको अपने आसपास डायबिटीक डाइट के कई कोर्स मिल जाएंगें जिसमें आपको साफ तौर पर बताया जाएगा कि आपको क्‍या खाना चाहिए और किन चीज़ों से दूर रहना चाहिए।

दुनियाभर में डायबिटीज़ की बीमारी में कॉफी के सेवन को लेकर चर्चा हो रही है। सभी इस बात पर चर्चा करने मे लगे हैं कि क्‍या कॉफी का सेवन डायबिटीज़ की बीमारी में सुरक्षित होता है।

आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब :

एक समय ऐसा था जब कॉफी को डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए बेस्‍ट ड्रिंक माना जाता था और कई रिपोर्टों में ये बात सामने आई है कि कॉफी का असर ब्‍लड शुगर लेवल पर पड़ता है, ये असर लंबे और कम समय के लिए हो सकता है।

अध्‍ययनों की मानें तो कैफीन थोड़े समय के लिए ग्‍लूकोज़ और इंसुलिन दोनों के स्‍तर को बढ़ा सकता है। साल 2004 में जर्नल डायबिटीज़ केयर में प्रकाशित हुई एक स्‍टडी में खुलासा हुआ है कि खाने से पहले कैफीन लेने से टाइप 2 मरीज़ों में अचानक ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का स्‍तर बढ़ जाता है।

हालांकि, कई रिसर्चों में यह भी दावा किया गया है कि कॉफी के सेवन से मधुमेह का खतरा कम होता है लेकिन इसमें शुगर डालने से इसका ब्‍लड शुगर पर उल्‍टा असर पड़ सकता है और ये टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकती है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज़ के मरीज़ आराम से बिना किसी चिंता के कॉफी पी सकते हैं। एक दिन में दो कप कॉफी पीना सामान्‍य है, यहां तक कि इससे शुगर लेवल भी संतुलित रहता है। हालांकि, आपको इस बात का ध्‍यान रखना है कि मधुमेह रोगियों को इसमें चीनी नहीं मिलानी है। कॉफी एक हाई मेटाबॉलिक फूड है जिसमें मैग्‍नीशियम और क्रोमियम होता है जोकि ब्‍लड शुगर के लेवल को कम करने के लिए जाने जाते हैं। इसके अलावा कई अध्‍ययनों में यह बात भी सामने आई है कि टाइप 2 डायबिटीज़ में न्‍यूरोजॉजिकल बीमारियों को भी कॉफी से नियंत्रित किया जा सकता है।

तो अब मधुमेह रोगी भी आराम से कॉफी पी सकते हैं लेकिन हां इसमें उन्‍हें चीनी नहीं डालनी है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए सबसे बेहतर सलाह है कि वो जो कुछ भी लें उसमें थोड़ा बदलाव जरूर करें। कोई भी चीज़ ज्‍यादा मात्रा में नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए दिन में 1 या 2 से ज्‍यादा कप ना पीएं और इसमें चीनी बिलकुल भी ना डालें।

कॉफी के अलावा मधुमेह के मरीज़ चाय का सेवन भी कर सकते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए भी चाय फायदेमंद होती है। मधुमेह रोगी चाय का सेवन दूध के साथ नहीं कर सकते हैं बल्‍कि उन्‍हें ग्रीन टी या ब्‍लैक टी से ही फायदा होता है। उन्‍हें बिना चीनी और दूध की चाय पीनी चाहिए और उन्‍हें हर्बल टी से दूर रहना चाहिए। चाय से इंसुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा जा सकता है लेकिन इसमें दूध का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। जिन लोगों को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा है उन्‍हें एक दिन में तीन से पांच कप ब्‍लैक टी पीनी चाहिए। इससे टाइप 2 डायबिटीज़ का विकास रूक सकता है।

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