जानिए क्‍या है इंसुलिन और क्‍यों मधुमेह रोगियों लिए ये इतना जरूरी है

insulin 1

इंसुलिन एक आवश्यक, प्राकृतिक रूप से स्रावित होने वाला हार्मोन है जिसकी शरीर को बहुत जरूरत होती है। आइए इंसुलिन के बारे में कुछ जरूरी बातों के बारे में जानते हैं।

क्‍या होता है इंसुलिन

इंसुलिन एक आवश्यक, प्राकृतिक रूप से स्रावित होने वाला हार्मोन है जिसकी शरीर को बहुत जरूरत होती है। शरीर में इंसुलिन के कम बनने, बिगड़ने या खत्‍म होने की स्थिति में मनुष्‍य का शरीर ठीक तरह से काम नहीं कर पाता है।

डायबिटीज़ की ट्रीटमेंट में इंसुलिन की भूमिका

डायबिटीज़ की ट्रीटमेंट में इंसुलिन की भूमिका इस बात पर निर्भर करती है कि आपको किस टाइप की डायबिटीज़ है। टाइप 1 डायबिटीज़ की स्थिति में मरीज़ के शरीर में इंसुलिन बिलकुल भी नहीं बन पाता है या खत्‍म हो जाता है और ऐसी स्थिति में मरीज़ पूरी तरह से इंसुलिन थेरेपी पर निर्भर हो जाता है।

प्राकृतिक इंसुलिन के बिगड़ने पर क्‍या होता है

टाइप 1 डायबिटीज़ में रोज़ इंसुलिन ट्रीटमेंट ना लेने पर ब्‍लड शुगर के स्‍तर में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा जानलेवा डायबिटीक एसिडोसिस जैसी समस्‍या भी आ सकती है। इस समस्‍या के सामान्‍य लक्षणों में पीलापन, पसीना आना, अनियमित हार्टबीट, आंखों में धुंधलापन और भूख लगना है।

कितने प्रकार के इंसुलिन प्रॉडक्‍ट्स होते हैं

insulin 2

प्रमुख तौर पर इंसुलिन चार भागों में विभाजित होता है। शॉर्ट एक्टिंग इंसुलिन घुलनशील इंसुलिन होता है जोकि जल्‍दी काम करता है और 6 से 8 घंटों तक इसका असर रहता है। इंटरमीडिएट एक्टिंग इंसुलिन दूसरी तरह का इंसुलिन होता है जोकि धीरे काम करता है और इसका असर 10 से 12 साल तक इसका असर रहता है। लॉन्‍ग एक्टिंग इंसुलिन 1 से 2 घंटे में असर करता है और इसका असर 20 घंटों तक रहता है। इसका आखिरी टाइप शॉर्ट और इंटरमीडिएट एक्टिंग इंसुलिन का मिश्रण होता है।

कैसे ले सकते हैं इंसुलिन

मधुमेह में इंसुलिन लेना बड़ी चुनौती रहती है। अगर रोज़ इंजेक्‍शन नहीं लिया गया तो ये आपकी दैनिक दिनचर्या को बाधित कर सकता है। सामान्‍यत: इंसुलिन डिस्‍पोजेबल इंसुलिन पैन द्वारा दिया जाता है। सुई और इंसुलिन पंप भी कभी-कभी प्रयोग किए जाते हैं। अब इंसुलिन को खाकर भी लिया जा सकता है।

क्‍या इंसुलिन खतरनाक तरीके से ब्‍लड शुगर को कम करता है

ब्‍लड शुगर के लो लेवल की वजह से मरीज़ बेहोश या कोमा में जा सकता है। लो ब्‍लड शुगर के लक्षण में तनाव, हाथों का कांपना, पसीना आना और भूख लगना शामिल है। थोड़ी सी चीनी, जूस या ग्‍लूकोज़ टैबलेट लेने से ब्‍लड शुगर के स्‍तर का सामान्‍य किया जा सकता है।

कैसे ले सकते हैं रोज़ इंसुलिन

अपने डॉक्‍टर से इस बारे में बात करें। आप खुद भी इंसुलिन ले सकते हैं। आपके डॉक्‍टर आपको हाइपोग्‍लाइसेमिक रिएक्‍शन के संकेतों और इसके उपचार के बारे में जानकारी देंगें। कुछ दिनों में आप ब्‍लड शुगर को मापना सीख जाएंगें और आपको यह भी पता चल जाएगा कि आप ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को नियंत्रित कैसे रख सकते हैं।

इंसुलिन रेजिमेन बदलने की कब है जरूरत

insulin 3

जब ब्‍लड शुगर का स्‍तर गिरता है और मरीज़ हाइपोग्‍लाइसेमिक की स्थिति में पहुंच जाता है जो उसके इंसुलिन रेजिमेन बदलने की जरूरत होती है। ऐसे में आपको शॉर्ट एक्टिंग इंसुलिन की मात्रा कम या ज्‍यादा करनी पड़ सकती है।

क्‍या मरीज़ों को जीवनभर इंसुलिन की जरूरत पड़ती है

टाइप 2 डायबिटीज़ में स्‍थायी रूप से इंसुलिन लेने की जरूरत नहीं होती है जैसे कि गर्भावस्‍था या बीमारी के पता लगने के तुरंत बाद इंसुलिन लेना जरूरी नहीं होता है। अगर आपने बहुत ज्‍यादा वजन कम कर लिया है तो भी आपको इंसुलिन की जरूरत नहीं है। वहीं अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपको इंसुलिन की जरूरत होगी। इसके अलावा आपके शरीर में इंसुलिन का उत्‍पादन करने वाली कोशिकाएं कितनी क्षतिग्रस्‍त हैं, ये इस बात पर भी निर्भर करता है।

डायबिटीज़ को लेकर हुई एक रिसर्च के परिणाम मधुमेह के मरीज़ों के लिए एक बड़ी खुशखबरी लाए हैं। शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक दर्द रहित स्किन पैच विकसित किया है जिसमें ग्‍लूकोज़ को स्‍वत: बनाने वाले घुलनशील यौगिक शामिल हैं। इस अध्‍ययन में एक बायोकेमिकल फॉर्म्‍यूला पाया गया है जिसके अनुसार खनिज यौगिकों के पैच से एक बार में ही कई दिनों तक के लिए शुगर की पूर्ति की जा सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि घुलनशील माइक्रोनिडल्‍स के बायोकेमिकली रूप से तैयार पैच से टाइप 2 डायबिटीज़ को नियंत्रित करना आसान हो सकता है। रोज़ इंसुलिन लेने की बजाय सप्‍ताह में एक बार माइक्रोनिडल पैच से इंसुलिन लेना ज्‍यादा आसान और दर्दरहित है।

Read source

Image source 

Image source 2

Image source 3

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Bitnami