जवानी में ही आपके दिमाग को कमज़ोर बना सकती है डायबिटीज़

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मधुमेह बहुत घातक बीमारी है और अगर इसका ईलाज ना किया जाए तो इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है। जी हां, मधुमेह शरीर के बाकी अंगों के साथ-साथ दिमाग पर भी असर डालती है।

ब्‍लड शुगर के लेवल के बढ़ने और घटने का संबंध डिप्रेशन, डिमेंशिया, आयु के कम होने से होता है।

साल 2015 में जर्नल न्‍यूरोलॉजी में प्रकाशित हुई एक स्‍टडी में यह पाया गया कि महज़ 2 सालों में सामान्‍य लोगों की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों की बौद्धिक क्षमता को बहुत ज्‍यादा क्षति पहुंची थी। इसका मतलब है कि टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीजों की याद्दाश्‍त पर इस बीमारी का बहुत असर पड़ता है।

वहीं 2015 में हुई एक अन्‍य स्‍टडी में बताया गया कि डायबिटीज़ का संबंध मस्तिष्‍क में बदलाव से हो सकता है और ऐसा अल्‍जाइमर के मरीज़ों में भी देखा गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि टाइप 2 डायबिटीज़ के मरीज़ों में डिमेंशिया का दोगुना खतरा बना रहता है।

मधुमेह के मस्तिष्‍क पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर और रिसर्च की जाने की जरूरत है ताकि ये पता चल सके कि ये बीमारी दिमाग पर लॉन्‍ग और शॉर्ट टर्म में क्‍या और कितना असर डालती है।

हाई ब्‍लड शुगर का बच्‍चों पर क्‍या असर पड़ता है

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साल 2014 में अमेरिकन डायबिटीज़ एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक स्‍टडी में पाया गया कि ब्‍लड शुगर के बहुत ज्‍यादा बढ़ने यानि हाइपरग्‍लाइसेमिया मस्तिष्‍क के विकास को धीमा कर सकता है। ऐसा ही बच्‍चों पर भी असर पड़ता है। अगर किसी बच्‍चे के शरीर में ब्‍लड शुगर का लेवल बहुत ज्‍यादा हो गया है तो उसका मानसिक विकास रूक या धीमा हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने ब्रेन स्‍कैन के ज़रिए डायबिटीज़ से ग्रस्‍त बच्‍चे और सामान्‍य बच्‍चे के बीच के अंतर के बारे में बताया। हालांकि,  शोधकर्ताओं ने इनके आईक्‍यू, मूड, व्‍यवहार और याद करने की क्षमता में कोई बड़ा बदलाव नहीं पाया। अभी तक इस बात का पता नहीं चल पाया है कि ये बीमारी मस्तिष्‍क की मांसपेशियों को किस हद तक प्रभावित कर सकती है। देखा जाए तो पिछले कुछ सालों में बच्‍चों में होने वाले डायबिटीज़ के मामलों में 15 प्रतिशत से ज्‍यादा की बढ़ोत्तरी हुई है। चिंता का विषय यह है कि टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज़ दोनों ही तरह के मधुमेह के मामलों में बच्‍चों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।

क्‍या कर सकते हैं

आपके शरीर में ब्‍लड शुगर का लेवल जितने ज्‍यादा समय तक कम या ज्‍यादा या असंतुलित रहेगा उतना ही ज्‍यादा इसका असर दिमाग पर पड़ेगा। मधुमेह से मस्तिष्‍क के साथ-साथ शरीर के किसी अन्‍य अंग को बचाने का सबसे अच्‍छा तरीका है ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करना और संतुलित आहार लेना।

याद्दाश्‍त में कमी

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मधुमेह की बीमारी की वजह से आपको चीज़ों को याद करने में भी दिक्‍कत हो सकती है। इसके अलावा लो ब्‍लड शुगर और दवाओं के साइड इफेक्‍ट्स की वजह से भी सेहत संबंधित परेशानियां जैसे डिमेंशिया आदि हो सकता है। रिसर्च में भी सामने आया है कि डायबिटीज़ को कंट्रोल करके आाप याद्दाश्‍त संबंधित समस्‍याओं से बच सकते हैं वरना आगे चलकर आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

याद्दाश्‍त के साथ जिंदगी भी हो रही है कम

हाल ही में चीन में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि डायबिटीज़ की बीमारी की वजह से मरीज़ों की जिदंगी सामान्‍य उम्र से 9 साल कम हो जाती है। इस स्‍टडी में ये चेताया गया है कि ऐसा अपर्याप्‍त ईलाज की वजह से होता है साथ ही ये भी कहा गया कि गांवों में लोग मधुमेह या अन्‍य किसी बीमारी को लेकर ज्‍यादा गंभीरता नहीं दिखाते हैं और इसका असर उनकी आयु और जीवन स्‍तर पर पड़ता है। मधुमेह की वजह से कई और तरह की बीमारियां जैसे ह्रदय रोग, स्‍ट्रोक, किडनी संबंधित बीमारी, लिवर रोग, संक्रमण, लिवर का कैंसर आदि भी होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। इस वजह से भी मधुमेह में मृत्‍यु की संभावना ज्‍यादा रहती है।

अब तक डायबिटीज़ पर हुए अध्‍ययनों से ये बात सामने आती है कि डायबिटीज़ की वजह से जिंदगी भी कम होती है और इसका असर हमारे दिमाग पर भी पड़ता है। मधुमेह की वजह से कम उम्र में ही आप डिमेंशिया का शिकार हो सकते हैं इसलिए जितना हो सके इससे बचाव करें। अगर आपको मधुमेह की बीमारी है तो अपना ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल में रखें और अगर आप स्‍वस्‍थ हैं तो जितना हो सके इस बीमारी से बचने की कोशिश करें। ये बीमारी बड़ी तेजी से दुनियाभर में फैल रही है इसलिए इससे बचाव और सुरक्षा बहुत जरूरी है।

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