मधुमेह की वजह से प्रेग्‍नेंसी में आ सकती हैं ये परेशानियां, जानें समाधान

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डायबिटीज़ की बीमारी में ब्‍लड ग्‍लूकोज़ का संतुलित स्‍तर होना बहुत जरूरी होता है। आप गर्भवती हों या ना हों लेकिन मधुमेह की बीमारी में रर्क्‍त शर्करा का स्‍तर सही होना चाहिए।

अगर आपको मधुमेह की बीमारी है और आप गर्भधारण के बारे में सोच रही हैं तो आपको इससे पहले अपने डॉक्‍टर से इस बारे में बात जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा अगर आपको पहले से मधुमेह नहीं भी है तो भी गर्भधारण से पूर्व इसकी जांच करवा लें।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़

कई बार गर्भधारण करने के बाद गर्भावस्‍था काल में भी महिलाओं को डायबिटीज़ हो जाता है। इस स्थिति को जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ या गर्भावधि मधुमेह कहा जाता है। गर्भवती महिलाओं में से कम से कम 4 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्‍त हो जाती हैं। आमतौर पर इस बीमारी का पता गर्भावस्‍था के अंतिम चरण में चल पाता है और ये बीमारी उन महिलाओं को ज्‍यादा होती है जिनके परिवार में भी किसी को डायबिटीज़ रही हो। सभी गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्‍था के दौरान नियमित जांच करवाते रहना चाहिए। अधिकतर गर्भवती महिलाओं की 24 से 28वें हफ्ते में जांच की जाती है।

आपको टाइप 1 डायबिटीज़ हो या टाइप 2, गर्भधारण करने से पहले आपको कुछ विशेष बातों को जान लेना चाहिए।

गर्भावस्‍था के दौरान किसी भी तरह की जटिलता से बचने के लिए पहले से ही मधुमेह को नियंत्रित करने की कोशिश करें। इसके लिए अपने ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के लेवल पर नज़र रखें। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि गर्भावस्‍था काल में रक्‍त शर्करा सामान्‍य स्‍तर से अलग तेजी से बढ़ता है घटता है। गर्भावस्‍था के दौरान ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर में उतार-चढ़ाव के कारण शिशु को कई तरह की जटिलताएं आ सकती हैं जोकि इस प्रकार है :

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  • ह्रदय संबंधित कोई रोग
  • धमनियों और मस्तिष्‍क में विकार यानि शिशु मानसिक रूप से अस्‍वस्‍थ हो सकता है या फिर उसकी बौद्धिक क्षमता भी कमजोर हो सकती है।

जिन महिलाओं को गर्भावस्‍था से पहले ही डायबिटीज़ की बीमारी होती है उनमें प्रसव के दौरान या गर्भावस्‍था में ज्‍यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, इस बीमारी की वजह से होने वाली इन जटिलताओं का बच्‍चे की सेहत पर कोई दीर्घकालीन असर कम ही पड़ता है।

मधुमेह से ग्रस्‍त गर्भवती महिलाओं को कुछ इस तरह की समस्‍याएं हो सकती हैं :

  • गर्भपात
  • मृत शिशु का जन्‍म
  • जन्‍म के बाद शिशु को मधुमेह का खतरा

अगर आप गर्भधारण के प्रयासों के समय ही मधुमेह को नियंत्रित करने की कोशिश करें तो इन जटिलताओं से बचा जा सकता है।

आपको ज्‍यादा घबराने की जरूरत नहीं है क्‍योंकि कुछ सावधानियां बरतकर और दवाओं की मदद से आप एक स्‍वस्‍थ शिशु को बिना किसी परेशानी के जन्‍म दे सकती हैं।

क्‍या हैं उपाय

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  • ब्‍लड शुगर के लेवल को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। इसकी नियमित जांच करवाते रहें।
  • सेहतमंद और संतुलित आहार लें।
  • नियमित व्‍यायाम और योग करें।
  • वजन बढ़ने ना दें। किसी भी बीमारी के लिए वजन बढ़ना नुकसानदायक होता है इसलिए अपने वजन को कंट्रोल में रखें। अगर आपका बॉडी मास इंडेक्‍स यानि बीएमआई 23 से ज्‍यादा है तो इसका मतलब है कि सामान्‍य वजन से ज्‍यादा हैं।
  • अगर आप गर्भधारण के प्रयासों के दौरान ही वजन घटाना शुरु कर देंगीं तो इससे गर्भावस्‍था के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आ सकती है।
  • महिलाओं को शराब और धूम्रपान से दूर रहना चाहिए और अगर आपको मधुमेह है तो कम से कम अपने लिए ना सही तो अपने आने वाले शिशु के लिए इन चीज़ों को त्‍याग दें।
  • गर्भधारण से पूर्व फोलिक एसिड सप्‍लीमेंट्स भी लें। सामान्‍य महिलाएं भी गर्भधारण के प्रयासों के दौरान इसे ले सकती हैं। ये एसिड शिुश की स्‍पाइना बिफिडा से रक्षा करता है। अगर शिशु का स्‍पाइनल कॉलम सही तरह से बंद ना हो पाए तो स्‍पाइना बिफिडा की समस्‍या हो सकती है।
  • अगर आप मधुमेह को नियंत्रित करने की गोलियां लेती हैं तो गर्भावस्‍था के दौरान इनका सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से जरूर परामर्श करें। इसकी जगह डॉक्‍टर आपको इंसुलिन उपचार की सलाह दे सकते हैं।
  • अपनी नॉर्मल डाइट की तुलना में कार्बोहाइट्रेट का सेवन कम करें। शुगर की उच्‍च मात्रा वाले खाद्यों से दूर रहें। मधुमेह में साबुत अनाज भी खा सकती हैं। ये ना केवल शरीर को पोषण देंगें बल्कि रक्‍त शर्करा के स्‍तर को भी संतुलित रखने का काम करेंगें। फल और सब्‍जियों से भी इसे नियंत्रित रखा जा सकता है।

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