मधुमेह की वजह से घट रहे हैं जिंदगी के 9 साल : स्‍टडी

हाल ही में चीन में हुई एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है कि डायबिटीज़ की बीमारी की वजह से मरीज़ों की जिदंगी सामान्‍य उम्र से 9 साल कम हो जाती है। इस स्‍टडी में ये चेताया गया है कि ऐसा अपर्याप्‍त ईलाज की वजह से होता है साथ ही ये भी कहा गया कि गांवों में लोग मधुमेह या अन्‍य किसी बीमारी को लेकर ज्‍यादा गंभीरता नहीं दिखाते हैं और इसका असर उनकी आयु और जीवन स्‍तर पर पड़ता है।

पिछले कुछ सालों में चीन में डायबिटीज़ के मरीज़ों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही भारत में भी डायबिटीज़ के मामले बढ़ रहे हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज़ के मामलों में बढ़ोत्तरी हाल ही में ज्‍यादा दर्ज की गई है इसलिए इसके मृत्‍यु दर से संबंध के बारे में ज्‍यादा लोगों को पता नहीं था और इन दोनों के बीच संबंध के बारे में अभी आगे भी जांच चल रही है।

ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी ने एकसाथ इस अध्‍ययन पर काम किया है। इसमें 30 से 79 की उम्र के बीच के 500,000 लोगों ने हिस्‍सा लिया जिन्‍हें पहले से ही मधुमेह की बीमारी थी। साल 2004 से लेकर 2008 तक प्रतिभागियों को चीन के पांच ग्रामीण और 5 शहरी क्षेत्रों में बांटा गया और 2014 तक इनकी मृत्‍यु के कारण की जांच की गई। इस अध्‍ययन में पता चला है कि इस अध्‍ययन में शामिल होने वाले प्रतिभागियों की मृत्‍यु मधुमेह की वजह से ज्‍यादा हुई।

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डायबिटीज़ का मृत्‍यु से अधिक संबंध कई कारणों से है। चूंकि मधुमेह की वजह से कई और तरह की बीमारियां जैसे ह्रदय रोग, स्‍ट्रोक, किडनी संबंधित बीमारी, लिवर रोग, संक्रमण, लिवर का कैंसर आदि भी होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। इस वजह से भी मधुमेह में मृत्‍यु की संभावना ज्‍यादा रहती है।

वैसे तो मधुमेह की बीमारी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में होती है लेकिन इस बीमारी की वजह से मृत्‍यु की दर ग्रामीण लोगों में ज्‍यादा पाई गई। आपको बता दें कि टाइप 2 डायबिटीज़ जैसी कई बीमारियां आधुनिक लाइफस्‍टाइल की देन हैं। अध्‍ययन की मानें तो शहर की तुलना में ग्रामीण लोगों में मधुमेह की स्थिति ज्‍यादा गंभीर थी। मधुमेह की बीमारी होने के बाद लोगों को जानकारी ही नहीं होती कि वो क्‍या खा सकते हैं और कितनी मात्रा में उन्‍हें क्‍या खाना चाहिए। जैसे कि मधुमेह के मरीज़ों को पता होना चाहिए हर्बल टी उनके लिए फायदेमंद होती है साथ ही उन्‍हें कड़वा करेला भी अमृत जैसा फायदा पहुंचा सकता है।

चीन में हुए इस अध्‍ययन की मानें तो चीन में अधिकतर मरीज़ इसका सही और उचित ईलाज नहीं करवाते हैं और भारत में भी कुछ ऐसा ही हाल है। इसी वजह से डायबिटीज़ के कारण होने वाली मौतों में वृद्धि हो रही है। डायबिटीज़ की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में समय से पूर्व होने वाली मृत्‍यु की दर ज्‍यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग उचित आहार नहीं लेते हैं और इनकी डाइट में साबुत अनाज और फल-सब्जियों की मात्रा बहुत कम होती है  जिस कारण ये मधुमेह जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।

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ऐसा नहीं है कि ग्रामीण लोग अच्‍छा खाना नहीं खाते, ये भोजन तो करते हैं लेकिन इन्‍हें संतुलित भोजन के बारे में पता नहीं होता। इन्‍हें इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि इन्‍हें कब, कैसे और कितना खाना है, बस इसी वजह से मधुमेह का शिकार हो जाते हैं। इससे पहले हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो बच्‍चे 3 घंटे से ज्‍यादा समय दिनभर में स्‍मार्टफोन या कंप्‍यूटर स्‍क्रीन के आगे बिताते हैं उनमें भी डायबिटीज़ का खतरा ज्‍यादा रहता है।

इस स्‍टडी की रिपोर्ट अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में प्रका‍शित हुआ है। इससे पहले हुए कुछ अध्‍ययनों में यह बात भी सामने आई है कि जिन देशों में लोगों की आय ज्‍यादा होती है वहां पर मधुमेह के मरीज़ दवाओं पर ज्‍यादा पैसे खर्च करते हैं। इसका मतलब है कि किसी बीमारी का ईलाज करने में उस देश की आर्थिक स्थिति भी महत्‍वपूर्ण होती है। अगर कोई देश समृद्ध है तो वहां रहने वाले लोगों की आय भी ज्‍यादा होगी और वो अपनी बीमारी के ईलाज में ज्‍यादा पैसे खर्च कर पाएंगें।

अगर ऐसी बात है तो शायद भारत कभी इस मुकाम तक पहुंच ही नहीं पाएगा क्‍योंकि यहां पर लोगों की सेहत के लिए कुछ नहीं किया जाता है।

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