जानिए क्‍या है टाइप 2 डायबिटीज़ और कैसे जान के लिए है ये खतरा

type 2

डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो एक बार होने के बाद जीवनभर तक साथ नहीं छोड़ती है। मधुमेह शरीर में रक्‍त के अंदर ग्‍लूकोज़ के असंतुलित होने या ना बनने पर होता है।

वैसे तो डायबिटीज़ के कई प्रकार होते हैं लेकिन सबसे ज्‍यादा मरीज़ टाइप 2 डायबिटीज़ के पाए जाते हैं। टाइप 1 डायबिटीज़ बच्‍चों में ज्‍यादा होता है। टाइप 1 डायबिटीज़ में मधुमेह में शरीर में इंसुलिन कम बनने लगता है या‍ फिर इंसुलिन बनना ही बंद हो जाता है।

वहीं दूसरी ओर टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर में रक्‍त शर्करा का स्‍तर बहुत ज्‍यादा बढ़ जाता है और इसे नियंत्रित करना बहुत कठिन होता है। इस अवस्‍था में व्‍यक्‍ति को ज्‍यादा प्‍यास लगने लगती है और बार-बार पेशाब आने लगता है। ऐसे में भूख भी बढ़ जाती है।

टाइप 2 मधुमेह के लक्षण

  • डायबिटीज़ के इस प्रकार में मरीज़ को बार-बार प्‍यास लगने लगती है। ऐसा इसलिए भी होता है क्‍योंकि टाइप 2 मधुमेह में बार-बार पेशाब आने लगता है और भूख बढ़ जाती है और मुंह सूखने लगता है। इसमें एकदम से वजन कम या बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा थकान, कम दिखना और सिरदर्द भी टाइप 2 मधुमेह के लक्षण हैं।
  • टाइप 2 मधुमेह का पता तब चलता है कि जब ये बीमारी बहुत ज्‍यादा बढ़ चुकी होती है। अगर शरीर पर कोई घाव हो जाए और वो जल्‍दी ठीक भी हो जाए तो ये मधुमेह का लक्षण हो सकता है।
  • इसके अतिरिक्‍त पेशाब की जगह या त्‍वचा पर कोई संक्रमण हो तो तुरंत चिकित्‍सक को दिखाएं।
  • टाइप 2 के मरीज़ों को यौन रोग की समस्‍या भी हो जाती है। मधुमेह यौन अंगों की रक्‍त वाहिकाओं और नसों को भी नुकसान पहुंचाता है। महिलाओं को इसमें योनि में सूखापन और पुरुषों को नपुंसकता हो सकती है।

इन रिस्‍क को आप खुद रोक सकते हैं

  • धूम्रपान ना करें।
  • मोटापा और वजन कम करें।
  • व्‍यायाम की कमी की वजह से।
  • प्रसंस्‍कृत मांस, फैट,‍ मिठाई और लाल मांस से।
  • रोज़ माउथवॉश के प्रयोग से।
  • ट्राइग्‍लिसराइड का स्‍तर 250 से अधिक होना।
  • एचडीएल कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर 25 मिलीग्राम से कम होना।

क्‍या है समस्‍या ty

टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन तो बनता है लेकिन वो शरीर के लिए पर्याप्‍त नहीं होता है। इंसुलिन की मदद से शरीर की कोशिकाओं तक ग्‍लूकोज़ पहुंच पाता है और जब पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता तो ग्‍लूकोज़ की आपूर्ति ना हो पाने पर शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। इसे इंसुलिन प्रतिरोध कहते हैं।

किसे है खतरा

खराब जीवनशैली के साथ-साथ अधिक वजन वाले लोगों में भी इस बीमारी का खतरा रहता है। व्‍यायाम और खानपान पर ध्‍यान रखकर इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। अगर तब भी ब्‍लड शुगर का स्‍तर ज्‍यादा रहे तो दवाओं के प्रयोग से शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन बनाने का कार्य किया जाता है। कुछ मामलों में इंसुलिन के इंजेक्‍शन भी दिए जाते हैं।

टाइप 2 के मरीज़ ज्‍यादा

टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी किशोरावस्‍था के दौरान होती है जबकि टाइप 2 डायबिटीज़ 35 की उम्र पार करने के बाद अपना शिकार बनाती है। टाइप 2 डायबिटीज़ ज्‍यादा खतरनाक होती है और इससे ग्रसित व्‍यक्‍ति अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं खा पाता है।

testटाइप 2 डायबिटीज़ की जांच

टाइप 2 डायबिटीज़ की जांच में हीमोग्‍लोबिन ए1सी टेस्‍ट के दौरान खून में ग्‍लाइकोसिलेटेड हीमोग्‍लोबिन को जांचा जाता है। इससे पिछले 2 से 3 महीने की औसत रक्‍त र्शकरा के स्‍तर के बारे में जानकारी मिलती है। हीमाग्‍लोबिन ए1सी का स्‍तर 6.5 % से अधिक होना मधुमेह का सूचक है।

इस बीमारी को जांचने का दूसरा टेस्‍ट फास्टिंग ग्‍लूकोज़ ब्‍लड टेस्‍ट होता है। अगर फास्टिंग ग्‍लूकोज़ ब्‍लड टेस्‍ट का स्‍तर 126 से ज्‍यादा है तो इसका मतलब है कि आपको मधुमेह है।

मधुमेह में डिप्रेशन

मधुमेह में डिप्रेशन अच्‍छा नहीं होता है। किसी भी तरह के तनाव से मधुमेह के मरीज़ों का ब्‍लडप्रेशर बढ़ सकता है, इसके साथ ही ब्‍लड ग्‍लूकोज़ लेवल भी बढ़ जाता है। जितना हो सके तनाव से दूर रहे। मधुमेह रोगियों को चाय पीने से भी फायदा होता है।

मधुमेह में व्‍यायाम

मधुमेह में व्‍यायाम भी जरूरी है। रोज़ कम से कम 30 मिनट हल्‍का व्‍यायाम करें। सुबह टहलें, साइकिल चलाएं। इससे ब्‍लड शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल दोनों को ही नियंत्रित किया जा सकता है। मधुमेह रोगी अपनी डाइट में कुछ सुपरफूड शामिल कर के भी इसे नियंत्रित कर सकते हैं।

एंटीबायोटिक

डायबिटीज़ में एंटीबायोटिक का सेवन करवाया जाता है। इसके अलावा बाज़ार में बहुत तरह की ओरल मेडिकेशन भी उपलब्‍ध है। इनमें से कुछ दवाओं के रिजल्‍ट काफी पॉ‍जीटिव आए हैं।

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