मां का दूध और प्रोबायोटिक्‍स नवजातों को कैंसर और डायबिटीज़ से देता है सुरक्षा

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कहते हैं कि जन्‍म के बाद 6 माह तक शिशु को मां का दूध जरूर पिलाना चाहिए। शुरुआती दिनों में मां का दूध शिशु को कई तरह की बीमारियों और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। इसके अलावा मां का दूध शिशु को मधुमेह और कैंसर जैसे घातक रोगों से भी बचाता है।

हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि तीन सप्‍ताह तक स्‍तनपान करवाने से शिशु को प्रोबायोटिक सप्‍लीमेंट मिलते हैं जिससे उनकी गट हैल्‍थ बेहतर हो पाती है और इस वजह से उन्‍हें मधुमेह, अस्‍थमा और कैंसर जैसी बीमारियों से खतरे से राहत मिलती है। मां को भी डायबिटीज़ का खतरा रहता है। आपको बता दें कि मां को शिशु के जन्‍म के बाद टाइप 2 डायबिटीज़ और शिशु को आगे चलकर टाइप 1 डायबिटीज़ हो सकती है। इसके अलावा महिलाओं को गर्भावस्‍था में डायबिटीज़ का एक प्रकार गर्भावधि मधुमेह हो सकता है।

इस रिसर्च के निष्‍कर्ष माइक्रोबॉयोलॉजी जर्नल एमएसफेयर में प्रकाशित किए गए हैं। इस शोध के मुताबिक मां के दूध और प्रोबायोटिक जीवों के कोई संबंध या मेल बताया गया है जिससे गट माइक्रोबिओम में स्‍थायी परिवर्तन हो सकते हैं।

इस रिसर्च के प्रमुख लेखक मार्क अंडरवुड का कहना है कि शिशु के जन्‍म लेने के 28 दिन बाद हमने उसे प्रोबायोटिक देना बंद कर दिया। 60 दिन तक उनके मल का अध्‍ययन कर इस निष्‍कर्ष तक पहुंचा गया है।

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शोधकर्ताओं की टीम का कहना है कि बैक्‍टीरिया बी का सक्रिय रूप गट माइक्रोबाओटा बनाने के लिए शिशुओं में मां के दूध में उपस्थित शुगर के साथ मिल जाता है। टीम ने आगे बताया कि खासतौर पर जीवन के शुरुआती दिनों में माइक्रोबाओटा के विघटन से व्‍यक्‍ति को पेट और इसके बाहर कई तरह के रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों में मधुमेह, एलर्जी, अस्‍थमा, इरिटेबल बोवल सिंड्रोम और कैंसर आदि शामिल है।

कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं की मानें तो मां के दूध से शिशु को इस तरह की बीमारियों से बचने की शक्‍ति मिलती है। वहीं स्‍तनपान करवाने से महिलाओं को भी डायबिटीज़ जैसी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

इस शोध के निष्‍कर्षों तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में स्‍तनपान करवाने वाली 66 माओं को शामिल किया था। पहले ग्रुप में 34 माओं ने एक प्रोबायोटिक सप्‍लीमेंट तीन सप्ताह के कोर्स में बिफिडोबैक्टीरियम लॉन्‍गमम सबस्‍पीशियस इन्फैंटिस ईवीसी 001 दिया। जबकि दूसरे ग्रुप की महिलाओं ने अपने शिशुओं को प्रोबायोटिक्‍स नहीं दिए।

जन्‍म के बाद 60 दिनों तक नवजात शिशुओं के मल के सैंपल का अध्‍ययन किया गया। इसमें साफ तौर पर सामने आया कि दोनों समूह के शिशुओं में रोगजनक कारणों में उल्‍लेखनीय अंतर था।

Smiling mother holding baby

इस रिसर्च में खुलासा हुआ कि प्रोबायोटिक्‍स ना लिए जाने वाले नवजातों की तुलना में प्रोबायोटिक्‍स लेने वाले शिशुओं के गट हैल्‍थ में सुधार आया। नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध पोषण का सबसे पहला स्रोत होता है। मां के शरीर में पर्याप्‍त दूध ना बनने के कई कारण हो सकते हैं जिनमें हार्मोनल बदलाव, बीमारी या पोषण की कमी आदि शामिल हैं। धूम्रपान भी इसका कारण हो सकता है।

सामी लैब्‍स की डायरेक्‍टर और वरिष्‍ठ वैज्ञानिक अंजू मजीद ने कहा कि कुछ मसालों के सेवन से इस परेशानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कौन-से हैं वो मसाले –

मेथीदाना – मेथीदाना सबसे पुरानी औषधीय जड़ी-बूटियों में से एक है। मेथीदाना में फाइटोएस्‍ट्रोजन नामक यौगिक होता है जो स्‍तन ग्रंथियों को क्रियाशील बनाने में मदद करता है। रातभर मेथीदाना भिगोकर या उबालकर इसे छानकर रोज़ सुबह पी लें।

दालचीनी – दालचीनी के सेवन से भी मां का दूध बढाया जा सकता है। इससे शिशु के जन्‍म के बाद माहवारी में आई देरी को भी ठीक किया जा सकता है। आधा चम्‍मच शहद में एक चुटकी दालचीनी या गर्म दूध में दालचीनी डालकर लें।

शतावरी – इस पारंपरिक जड़ी-बूटी का प्रयोग महिलाओं में अपर्याप्‍त दूध की मात्रा को बढ़ाने के लिए किया जाता है। शतावरी में स्टेरॉयडल सैपोनिन होता है जो महिलाओं के शरीर में दूध बनाने में मदद करता है। इसके अलावा बादाम भी महिलाओं की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

जीरा – महिलाओं के शरीर में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए जीरे का प्रयोग भी किया जा सकता है। जीरे में आयरन होता है। सोते समय गर्म दूध में जीरे का पाउडर मिलाकर पीएं। इससे आपको जल्‍द ही फर्क महसूस होगा।

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