रोज़ तला हुआ खाने से महिलाओं में बढ़ सकता है ‘जेस्‍टेशनल डायबिटीज़’ का खतरा

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हाल ही में हुए एक प्रमुख अध्‍ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन महिलाओं को ज्‍यादा तला हुआ खाने की आदत होती है उनमें गर्भावधि मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि अगर आप रोज़ फ्राइड फूड खाने की शौकीन हैं तो आपको गर्भावस्‍था के दौरान डायबिटीज़ होने का खतरा सामान्‍य महिलाओं की तुलना में ज्‍यादा है।

जो महिलाएं रोज़ चिप्‍स, ऑमलेट और फ्राइड चिकन खाती हैं उनमें जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा रहता है। ये बीमारी 20 में से एक महिला को गर्भावस्‍था के दौरान होती ही है।

क्‍या है गर्भावधि मधुमेह ?

गर्भावधि मधुमेह, डायबिटीज़ का एक ऐसा प्रकार है जो गर्भवती महिलाओं में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाने पर होता है। डायबिटीज़ मुख्‍य रूप से तीन प्रकार का होता है – एक टाइप 1 डायबिटीज़, दूसरा टाइप 2 डायबिटीज़ और तीसरा गर्भावधि डायबिटीज़। गर्भावधि मधुमेह को जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ और गर्भकालीन मधुमेह भी कहा जाता है।

गर्भवती महिलाओं में से कम से कम 4 प्रतिशत महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्‍त हो जाती हैं। आमतौर पर इस बीमारी का पता गर्भावस्‍था के अंतिम चरण में चल पाता है और ये बीमारी उन महिलाओं को ज्‍यादा होती है जिनके परिवार में भी किसी को डायबिटीज़ रही हो।

2गर्भावधि मधुमेह का कारण

गर्भावस्‍था में कोर्टिसोल, एस्‍ट्रोजन जैसे हार्मोन के बढ़ने से शरीर में ब्‍लड शुगर की क्रिया में बाधा उत्‍पन्‍न होती है। इस अवस्‍था को इंसुलिन रेस्सिटेंस यानि इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है। शरीर में इंसुलिन बनाने वाले अंग को पैंक्रियाज़ कहा जाता है। इनमें इंसुलिन प्रतिरोध द्वारा इंसुलिन में आई कमी की भरपाई करने की क्षमता होती है। अगर शरीर में पैंक्रियाज़ बढ़े हार्मोन के कारण पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाते हैं तो शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है और महिलाएं गर्भकालीन यानि गर्भाविध मधुमेह का शिकार हो जाती हैं।

गर्भावधि मधुमेह से मां को खतरा

गर्भावस्‍था के दौरान जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ की वजह से महिलाओं को मूत्र संबंधी संक्रमण का खतरा रहता है। गर्भावस्‍था में मधुमेह के कारण महिलाओं का रक्‍तचाप भी बढ़ जाता है, इस अवस्‍था को प्रीकाम्‍पसीआ कहते हैं। 20 सप्‍ताह की प्रेग्‍नेंसी के बाद महिलाओं के मूत्र में प्रोटीन की उपस्थिति भी ज्‍यादा हो जाती है।

इस बीमारी के चलते प्रसव में भी परेशानियां और मुश्किलें आती हैं। प्रसव के लिए सिजेरियन भी करना पड़ सकता है। जेस्‍टेशनल यानि गर्भावधि मधुमेह के कारण मां को गर्भावस्‍था के बाद  टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा रहता है।

क्‍या कहती है रिसर्च

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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि खाने को फ्राई करने के बाद वह उस फूड में एक हानिकारक केमिकल छोड़ता है जिसका असर शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

जब गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है तो उनका ब्‍लड शुगर का स्‍तर बढ़ जाता है। जिन मामलों में इस रोग की पहचान समय पर नहीं हो पाती है उनमें प्रीमैच्‍योर बर्थ और शिशु के बहुत छोटे होने या जन्‍म के बाद मृत्‍यु का खतरा बढ़ जाता है।

इस रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने 10 साल तक 15,027 महिलाओं पर अध्‍ययन किया। इन सभी महिलाओं से उनकी डाइट और लाइफस्‍टाइल से जुड़े सवाल पूछे गए। इन सवालों में उनके द्वारा फ्राइड फूड, मीट, फल और सब्जियों का सेवन करना भी शामिल था। साथ ही उनसे ये भी पूछा गया कि वो कितनी मात्रा में पानी पीती है और धूम्रपान करती हैं या नहीं।

रिसर्च में पाया गया कि जिन महिलाओं ने सप्‍ताह में सात बार फ्राइड फूड का सेवन किया था उनमें एक सप्‍ताह में इससे कम बार फ्राइड फूड का सेवन करने वाली महिलाओं की तुलना में जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ का खतरा 88 प्रतिशत अधिक पाया गया।

फ्राइड फूड का असर आपके खाने को फ्राई करने के तरीके पर भी निर्भर करता है। इस रिसर्च के मुताबिक फ्राइड फूड से दूरी बनाकर या इसके सेवन को सीमित कर आप प्रजनन की उम्र में जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ से बच सकती हैं।

जेस्‍टेशनल डायबिटीज़ ना केवल गर्भवती मां को नुकसान पहुंचाता है बल्कि इसका असर बच्‍चे पर भी पड़ता है। इस स्थिति में बच्‍चे को टाइप 1 डायबिटीज़ होने का खतरा भी बढ़ जाता है इसलिए अपने आ‍हार को संतुलित रखें और तली-भुनी चीज़ों से दूर रहें ताकि आप और आपका बच्‍चा दोनों ही स्‍वस्‍थ रहें।

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