टाइप 1 डायबिटीज़ में इस तरह घटा सकते हैं वजन

Exercise to Lose Weight

टाइप 1 डायबिटीज़ को जुवेनाइल डायबिटीज़ के नाम से भी जाना जाता है। ये बीमारी अधिकतर बच्‍चों और किशोरावास्‍था में होती है। टाइप 1 डायबिटीज़ में शरीर में इंसुलिन नहीं बन पाता है। मधुमेह के इस प्रकार में मरीज़ जीवनभर के लिए इंसुलिन के लिए निर्भर हो जाता है। किशोरों और बच्‍चों में टाइप 1 डायबिटीज़ की वजह से शुरुआत में या तो अचानक से वजन कम होने लगता है या फिर बढ़ जाता है।

क्‍या है टाइप 1 डायबिटीज़

टाइप 1 डायबिटीज़ में शरीर में इम्‍यून सिस्‍टम अपने ही अग्‍नाशय पर अटैक करता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इम्‍यून सिस्‍टम अग्‍नाश्‍य में इंसुलिन उत्‍पादन करने वाली कोशिकाओं को विदेशी के रूप में देखता है और उन्‍हें नष्‍ट कर देता है। इस आक्रमण को ‘ऑटो इम्‍यून’ बीमारी कहा जाता है। इस्‍लेट्स नामक कोशिकाएं रक्‍त में ग्‍लूकोज़ का पता लगा लेती हैं और फिर इसकी प्रतिक्रिया में रक्त शर्करा को सामान्य करने के लिए इंसुलिन की आवश्यक मात्रा का उत्पादन करते हैं।

टाइप 1 मधुमेह की शुरुआत में ही बच्‍चों का वजन बढ़ने या घटने लगता है। अगर इस बीमारी की वजह से आपके बच्‍चे का वजन बढ़ रहा है तो उसे शरीर में ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को नियंत्रित करने के लिए नियमित शारीरिक व्‍यायाम करना चाहिए। वजन कम करने से शरीर में थायराएड ग्रंथि भी ठीक तरह से कार्य कर पाएगी और कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल भी सामान्‍य रहेगा।

टाइप 1 डायबिटीज़ में कैसे करें वजन कम

अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी है और इस कारण आपका वजन लगातार बढ़ता जा रहा है तो आप इन तरीकों से अपने बढ़ते वजन को कम कर सकते हैं :

  • अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज़ है तो आपको अपने वजन पर नज़र रखनी चाहिए। अगर थोड़ा सा भी वजन बढ़ गया है तो उसका भी ध्‍यान रखें। संतुलित और स्‍वस्‍थ आहार और उचित शारीरिक व्‍यायाम से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • टाइप 1 डायबिटीज़ में मरीज़ को ज्‍यादा खाना चाहिए। हालांकि, वजन कम करने का बेहतर तरीका है कि आप अपने भोजन में कैलोरी की मात्रा को कम कर दें। ब्‍लड शुगर लेवल को इंसुलिन थेरेपी से नियंत्रित किया जा सकता है।

weghtनियमित व्‍यायाम से कंट्रोल 

अगर इंसुलिन थेरेपी की वजह से आपको वजन बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है तो आपको अपने नियमित वर्कआउट में कुछ ऐसी एक्‍सरसाज़ को शामिल करना चाहिए -:

  • शरीर में मौजूद मुलायम फैट को फ्लैब कहा जाता है। इसे घटाने के लिए आप कार्डियो और रेसिस्‍टेंस ट्रेनिंग सबसे बेहतर रहती है।
  • हालांकि, एक्‍सरसाइज़ से पहले स्‍नैक में कुछ जरूर खा लें और इससे पहले अपना ब्‍लड शुगर लेवल चैक करें। एक्‍सरसाइज़ से पहले और बाद में ब्‍लड शुगर जरूर चैक करें।
  • वर्कआउट के बाद प्रोटीन शेक पीने से आपको दोबारा एनर्जी मिलेगी।
  • वहीं एक्‍सरसाइज़ करते समय अपने हाथ में कुछ स्‍नैक्‍स रखें और बीच-बीच में खाते रहें। फाइबरयुक्‍त स्‍नैक्‍स ज्‍यादा फायदेमंद रहते हैं।
  • एक्‍सरसाइज़ के एक दम बाद इंसुलिन शॉट ना लें। ऐसा करने से ब्‍लड प्रेशर का स्‍तर नीचे गिर सकता है।
  • जिन बच्‍चों को टाइप 1 डायबिटीज़ की बीमारी है वो ज्‍यादा से ज्‍यादा बाहर खेलने जाएं। तैराकी, क्रिकेट और फुटबॉल से बच्‍चों में वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। एक्‍सरसाइज़ के बाद फलों का रस पी सकते हैं।

dietपोषक आहार भी है फायदेमंद

  • टाइप 1 डायबिटीज़ के ईलाज के लिए कोई भी डाइट लेने से पहले बेहतर होगा कि आप किसी न्‍यूट्रिश्‍निस्‍ट से सलाह लें।
  • आपके खाने में कितनी कैलारी और फैट है उसका ध्‍यान रखें। वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी है आप अपनी डाइट में प्रोटीन और फैट की मात्रा को कम कर दें क्‍योंकि इसका ब्‍लड शुगर के स्‍तर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आप चाहें तो अपने आहार में साबुत अनाज को शामिल कर सकते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट भी आपकी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। हर बार खाने में कार्बोहाइड्रेट के सेवन से शरीर में ब्‍लड शुगर का स्‍तर नियंत्रित और संतुलित रहता है।
  • आपको पता होना चाहिए कि टाइप 1 मधुमेह में वजन घटाने के लिए आपको क्‍या खाना चाहिए। आपके शरीर की जरूरतों को ध्‍यान में रखकर न्‍यूट्रिशनिस्‍ट आपके लिए चार्ट तैयार करेंगें। आपको उस चार्ट के अनुसार ही खाना है।

अगर आप टाइप 1 डायबिटीज़ को कंट्रोल नहीं करेंगें तो आपको ह्रदय रोग का भी खतरा रहता है। साथ ही ये भी ध्‍यान रखें कि इस बीमारी के साथ रातोंरात वजन कम नहीं हो सकता है। टाइप 2 डायबिटीज़ भी खतरनाक होती है लेकिन उचित व्‍यायाम और संतुलित आहार से इसे भी कंट्रोल किया जा सकता है।

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