10-15 किलो वजन घटाकर मधुमेह से पा सकते हैं हमेशा के लिए छुटकारा

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हाल ही में एक स्‍टडी में यह बात सामने आई है‍ कि अगर टाइप 2 के मरीज़ अपना वजन घटा लें तो वो इस बीमारी से पूरी तरह से छुटकारा पा सकते हैं। यूके के वैज्ञानिकों ने अपनी एक रिसर्च में इस बात का खुलासा किया है। आपको बता दें कि इस स्‍टडी में लंबे समय से डायबिटीज़ से पीडित लोगों को शामिल किया गया था।

इस स्‍टडी में पाया गया कि टाइप 2 डायबिटीज़ के जिन मरीज़ों ने वेट मैनेजमेंट को सही तरीके और गंभीरता से फॉलो किया उन 2 में से 1 प्रतिभागी को मधुमेह को हराने में सफलता हासिल हुई।

इस अध्‍ययन में शामिल होने वाले सभी प्रतिभागियों को पिछले 6 सालों में अपने डायबिटीक होने का पता चला था। अध्‍ययन में सामने आया है कि अगर आप आवश्‍यक रूप से अपना वजन घटा लें तो टाइप 2 डायबिटीज़ को बड़ी आसानी से हराया जा सकता है।

इस स्‍टडी के नतीजे अंर्तराष्‍ट्रीय जरनल लैसेंट में प्रकाशित किए गए हैं जो बताते हैं कि डायबिटीज़ की बीमारी को मरीज़ द्वारा घटाए गए वजन से ठीक किया जा सकता है एवं डायबिटीज़ के घटने का सीधा संबंध इस बात से है कि मरीज़ कितना वजन घटा सकता है।

इस स्‍टडी में शामिल होने वाले 15 किलोग्राम तक वजन घटाने वाले 86 प्रतिशत प्रतिभागी डायबिटीज़ की बीमारी से छुटकारा पाने में सफल हुए थे। वहीं 10 किलोग्राम वजन घटाने वाले 73 प्रतिशत प्रतिभागियों के नतीजे भी करीब-करीब वैसे ही रहे। व्‍यायाम के ज़रिए मधुमेह को ठीक किया जा सकता है।

डायबिटीज़ के मरीज़ों की बदल सकते हैं जिंदगी

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अगर आप डायबिटीज़ की बीमारी में सुधार या कमी लाना चाहते हैं तो वेट लॉस की प्रक्रिया से जुड़े। ऐसा करने वाले मरीज़ों को डॉक्‍टर भी एंटी डायबीटिक और एंटी हाइपरटेंसिव दवाएं नहीं देते हैं। ऐसे लोगों को 3 महीने तक डाइट रिप्‍लेसमेंट पर रखा जाता है और इस दौरान अगर प्रतिभागी चाहे तो इस प्रक्रिया को 3 से 5 महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

इस डाइट रिप्‍लेसमेंट के दौरान मरीज़ों को लो एनर्जी फॉर्म्‍यूला डाइट यानि 825 से 853 कैलोरी प्रतिदिन दी जाती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान मरीज़ों की किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधियों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जाती है।

डायबटोलॉजिस्‍ट के अनुसार सामान्‍य डाइट में 1600 से 1800 कैलोरी होती है लेकिन लो कैलोरी डाइट में 600 से 800 कैलोरी का सेवन करना होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्‍टडी के नतीजे पथ प्रवर्तक हैं और इनसे आगे चल कर भी फायदा होगा। डॉक्‍टरों का कहना है कि इस स्‍टडी के नतीजे आने के के बाद अब वो कई मरीज़ों से जीवनभर के डायबिटीक होने का लेबल हटा सकते हैं और इससे ज्‍यादा खुशी की बात और कोई हो ही नहीं सकती हैं।

वजन घटाकर प्रैंक्रियाज़ से अत्‍यधिक फैट को कम किया जा सकता है। इससे इंसुलिन का उत्‍पादन बढ़ जाता है और उनका स्राव भी बेहतर होने लगता है। वजन घटाने का सीधा संबंध मधुमेह की बीमारी से है।

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मुख्‍य रूप से डायबिटीज़ दो तरह का होता है – टाइप 1 डायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज़। टाइप 1 डायबिटीज़ में इम्‍यून सिस्‍टम इंसुलिन बनाने वाले मुख्‍य पैंक्रियाज़ की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। वहीं दूसरी ओर टाइप 2 डायबिटीज़ में शरीर में कोशिकाएं इंसुलिन का संग्रहण नहीं कर पाती हैं या पैंक्रियाज़ बहुत कम इंसुलिन बनाता है।

बच्‍चों में होने वाली डायबिटीज़ को टाइप 1 डायबिटीज़ कहा जाता है जबकि वयस्‍कों में टाइप 2 डायबिटीज़ होती है। दुनियाभर में किशोरावस्‍था में ही मधुमेह की बीमारी अपना शिकार बना रही है।

टाइप 1 डायबिटीज़ के मरीज़ों को इंसुलिन के इंजेक्‍शन लेने पड़ते हैं। इस बाहरी तरीके से इंसुलिन लेना महत्‍वपूर्ण हो जाता है और इससे शरीर की कोशिकाओं में ग्‍लूकोज़ बनने लगता है। इस स्थिति में सबसे बड़ी मुश्किल ये होती है कि इसमें पता ही नहीं चलता कि मरीज़ को कितनी मात्रा में इंसुलिन की जरूरत है।

ज्‍यादातर मरीज़ों को टाइप 2 डायबिटीज़ होती है। डॉक्‍टर्स का कहना है कि डायबिटीज़ के ईलाज में ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए जीवनभर दवाएं खानी पड़ती हैं। हालांकि, इस स्‍टडी के नतीजों के बाद मधुमेह जैसी जीवनभर रहने वाली बीमारी को भी ठीक किया जा सकता है। मधुमेह रोगियों को साबुत अनाज और फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

ये बीमारी इतनी कष्‍टदायक होती है कि मरीज़ के शरीर के साथ-साथ उसे मानसिक क्षति भी पहुंचाती है। मधुमेह की वजह से मरीज़ को अपने खाने-पीने और अन्‍य आदतों का बहुत ध्‍यान रखना पड़ता है जिस वजह से वो कभी–कभी तनाव में भी आ जाते हैं।

मधुमेह की बीमारी कितनी ज्‍यादा खतरनाक है आप सोच भी नहीं सकते हैं। कुछ दिनों पहले अंतर्राष्‍ट्रीय मधुमेह दिवस पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप ने भी तेजी से बढ़ेते मधुमेह के मरीज़ों की संख्‍या पर चिंता जताई थी।

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Lose 10-15 kg weight and reverse diabetes, says study by UK scientists

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