मधुमेह के मरीज़ों के लिए ‘अमृत है कड़वा करेला’

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एशिया, पूर्वी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में करेले की खेती की जाती है। भारत और चीन में सदियों से मधुमेह के ईलाज में करेले का प्रयोग किया जा रहा है। टाइप 2 डायबिटीज़ में करेला ज्‍यादा असरकारी होता है।

करेले के गुण

करेले में एंटी डायबीटिक गुणों के साथ तीन तत्‍व चैरेंटिन, विसिन और पॉलीपेप्‍टाइड – पी होता है। चैरेंटिन ब्‍लड ग्‍लूकोज़ के स्‍तर को कम करता है और पॉलीपेप्‍टाइड – पी इंसुलिन की तरह एक यौगिक है। ये सभी तत्‍व एकसाथ मिलकर या अलग-अलग ब्‍लड शुगर के स्‍तर को कम करने में मदद करते हैं।

कैसे करता है काम

रिसर्च के मुताबिक करेला मेटाबॉलिज्‍म के ग्‍लूकोज़ की मदद करने वाले एंजाइम्‍स की क्रिया को बढ़ाकर रक्‍त शर्करा का स्‍तर कम कर देता है। ये एंजाइम्‍स ग्‍लूकोज़ और ब्‍लड शुगर को ग्‍लाइकोजन में तब्‍दील करने में मदद करते हैं। ग्‍लाइकोजन लिवर में संग्रहित रहता है और बाद में इसका प्रयोग ऊर्जा के रूप में किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो करेला ब्‍लड शुगर के स्‍तर के साथ-साथ कोलेस्‍ट्रॉल के लेवल को भी कम करता है। लेकिन फिर भी अब तक रक्त शर्करा को कम करने में करेले की प्रभावशीलता के ठोस प्रमाण नहीं मिल पाए हैं।

कैसे करें प्रयोग Bitter-Gourd-Juice-For-Diabetes-Treatment

करेले का जूस पी सकते हैं। करेले के बीज निकालकर उसे ब्‍लेंड कर लें और उसकी प्‍यूरी में समान मात्रा में पानी मिलाएं। करेले का जूस तैयार है। रोज़ 1/4 से ½ कप करेले का जूस जरूर पीएं। इसके अलावा करेले को उबालकर भी खाया जा सकता है। इसके लिए करेले को छीलकर उसके बीच निकाल लें और फिर उसे उबाल या भाप में पका लें। बाज़ार में करेले का प्राकृतिक जूस भी उपलब्‍ध है। रोज़ाना कम से कम तीन बार 1/4 से  ½ टीस्‍पून इसका सेवन करें। ठोस और हरे रंग के करेले खाने की सलाह दी जाती है लेकिन जिन पर पीले रंग के धब्‍बे पड़े हों, उनका सेवन करने से बचें।

सावधान रहें

कई अध्‍ययनों में यह बात सामने आई है कि मरीज़ों ने करेले को आसानी से बर्दाश्‍त कर पचा लिया लेकिन इसकी वजह से पेट में दर्द, डायरिया, सिरदर्द और बुखार आदि की समस्‍या भी पैदा हो गई। डायबिटीज़ में रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करने के लिए करेले का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से परामर्श कर लें। डॉक्‍टर की सलाह के बिना अपनी दवाएं लेना बिलकुल बंद ना करें। अगर आप गर्भवती हैं तो आपको अपना ज्‍यादा ध्‍यान रखने की आवश्‍यकता है।

सब्‍जी या जूस के रूप में नियमित करेले का सेवन करने से मधुमेह की अवस्‍था और रक्‍त शर्करा के स्‍तर को नियंत्रित किया जा सकता है। इसका मतलब है कि आपको अपनी दवा की खुराक को भी कम करना पड़ेगा। चाय से भी मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। करेले का अपने ब्‍लड शुगर लेवल पर पड़ रहे प्रभाव के बारे में डॉक्‍टर से परामर्श लेते रहें। गर्भावस्‍था में महिलाएं करेले का ज्‍यादा सेवन ना करें क्‍योंकि इससे गर्भाश्‍य उत्तेजित हो सकता है और इस वजह से समय से पूर्व प्रसव का खतरा रहता है।

डायबिटीज़ में कैसे करें करेले का सेवन

  • डायबिटीज़ के मरीज़ एक चौथाई कप करेले के जूस में समान मात्रा में गाजर का रस मिलाकर पी सकते हैं। मधुमेह रोगियो को डाइट में साबुत अनाज शामिल करके भी लाभ होगा।
  • करेले के रस या सब्‍जी से मधुमेह को कम किया जा सकता है।
  • 50 ग्राम करेले को 100 ग्राम पानी में उबालकर पीने से मधुमेह में फायदा होता है। रोज़ पांच ग्राम करेले का जूस पीएं। करले के अलावा अन्‍य फल और सब्जियों का सेवन भी कर सकते हैं।
  • जिन बच्‍चों को डायबिटीज़ है वो रोज़ाना करेले की सब्‍जी बनाकर खाएं, इससे लाभ होगा।

Bitter-Gourd

करेले के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक लाभ

  • उदरशूल
  • बुखार
  • जलन
  • पुरानी खांसी
  • माहवारी का दर्द
  • त्‍वचा विकार

इसके अलावा करेला घाव भरने में भी मदद करता है। अफ्रीका और एशिया में मलेरिया और संक्रमित रोगों जैसे चिकन पॉक्‍स आदि के ईलाज में करले का सेवन किया जा सकता है।

मधुमेह में करेले के नुकसान

गर्भवती महिलाओं के करेले के ज्‍यादा सेवन करने से गर्भस्‍थ शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। अगर आप गर्भधारण की सोच रहीं हैं तो करेले का ज्‍यादा सेवन ना करें। करेले के बीजों में मेमोरचेरिन नामक तत्‍व होता है जो गर्भावस्‍था में समस्‍या पैदा करता है। इसकी जगह मधुमेह में सुपरफूड जैसे मेथीदाना आदि खाएं।

आपको बता दें कि मधुमेह का सबसे बढिया ईलाज योग और व्‍यायाम है। बेहतर होगा कि आप पहले से ही मधुमेह से बचने की तैयारी कर लें क्‍योंकि भारत में हर मिनट में मधुमेह के हज़ारों मरीज़ बन रहे हैं।

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